30+ महिलाओं के लिए 6 जरूरी ब्लड टेस्ट, साल में एक बार जरूर कराएं

punjabkesari.in Sunday, Sep 13, 2026 - 05:03 PM (IST)

नारी डेस्क:  उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। खासकर 30 साल की उम्र के बाद हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और पोषण से जुड़ी कुछ समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। कई बार शरीर में परेशानी शुरू हो जाती है, लेकिन उसके लक्षण काफी देर से दिखाई देते हैं। ऐसे में समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना काफी मददगार हो सकता है। कुछ सामान्य ब्लड टेस्ट की मदद से एनीमिया, ब्लड शुगर, थायरॉइड, कोलेस्ट्रॉल और कुछ विटामिन की कमी जैसी स्थितियों के बारे में जानकारी मिल सकती है। हालांकि, हर महिला को हर टेस्ट हर साल करवाना जरूरी हो, ऐसा नहीं है। टेस्ट की जरूरत उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करती है।

सालाना हेल्थ चेकअप क्यों जरूरी है

महिलाओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं धीरे-धीरे विकसित हो सकती हैं और शुरुआत में इनके कोई खास लक्षण नहीं दिखते। नियमित जांच से शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रखने में मदद मिलती है। ब्लड टेस्ट से न्यूट्रिशन की कमी या कुछ बीमारियों के संकेत शुरुआती स्तर पर पता चल सकते हैं। खासकर जिन महिलाओं को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, PCOS, मोटापे या परिवार में किसी बीमारी की हिस्ट्री है, उन्हें अपनी जांच को लेकर डॉक्टर से सही सलाह लेनी चाहिए।

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CBC टेस्ट

Complete Blood Count यानी CBC एक सामान्य ब्लड टेस्ट है। इससे लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं, हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स समेत कई चीजों की जानकारी मिलती है। महिलाओं में आयरन की कमी और एनीमिया काफी आम समस्या हो सकती है। अगर आपको लगातार कमजोरी, थकान, चक्कर आना या बहुत ज्यादा ब्लीडिंग जैसी परेशानी रहती है, तो डॉक्टर CBC टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इस टेस्ट से एनीमिया, संक्रमण और शरीर में चल रही कुछ अन्य स्थितियों के संकेत मिलने में मदद मिल सकती है।

ब्लड शुगर टेस्ट

30 के बाद ब्लड शुगर की जांच को लेकर भी सतर्क रहना अच्छा है। डायबिटीज और प्रीडायबिटीज कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद हो सकती है। ब्लड शुगर या HbA1c जैसे टेस्ट से डॉक्टर को शुगर लेवल का अंदाजा लगाने में मदद मिलती है। जिन महिलाओं को PCOS, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, पहले गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज या परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री रही है, उन्हें डॉक्टर जरूरत के हिसाब से कम उम्र में भी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

थायरॉइड फंक्शन टेस्ट

महिलाओं में थायरॉइड से जुड़ी समस्या काफी आम है। थायरॉइड हार्मोन में गड़बड़ी होने पर वजन बढ़ना या कम होना, बाल झड़ना, थकान, मूड में बदलाव और पीरियड्स से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं। थायरॉइड की जांच के लिए आमतौर पर TSH देखा जाता है और जरूरत पड़ने पर T3 और T4 की जांच भी की जाती है। अगर आपको लगातार ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं या परिवार में थायरॉइड की समस्या रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर टेस्ट करवाना बेहतर है।

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 लिपिड प्रोफाइल

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए खून में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर की जांच की जाती है। इसमें LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल और HDL यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल समेत अन्य स्तर देखे जाते हैं। कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन लंबे समय में दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए उम्र, फैमिली हिस्ट्री और दूसरे जोखिमों को देखते हुए डॉक्टर लिपिड प्रोफाइल की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में इस टेस्ट से पहले फास्टिंग की जरूरत हो सकती है, लेकिन यह टेस्ट के प्रकार और डॉक्टर या लैब के निर्देश पर निर्भर करता है।

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 विटामिन D टेस्ट

विटामिन D शरीर में हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
हालांकि, हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए हर साल विटामिन D टेस्ट करवाना जरूरी नहीं माना जाता। अगर आपको विटामिन D की कमी का खतरा है, पहले कमी पाई जा चुकी है या डॉक्टर को इसकी जरूरत लगती है, तो टेस्ट कराया जा सकता है।

 विटामिन B12 टेस्ट

विटामिन B12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर एनीमिया, कमजोरी, थकान या नसों से जुड़ी कुछ परेशानियां हो सकती हैं। जो महिलाएं लंबे समय से शाकाहारी या वीगन डाइट लेती हैं, उन्हें B12 की कमी का खतरा कुछ ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा कुछ पाचन संबंधी समस्याओं या दवाओं के कारण भी B12 का स्तर प्रभावित हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

हर टेस्ट हर साल करवाना जरूरी नहीं

यह समझना जरूरी है कि 30 साल की उम्र के बाद हर महिला को इन सभी छह टेस्ट को अनिवार्य रूप से हर साल करवाना चाहिए, ऐसा नहीं है। आपकी उम्र, लक्षण, खान-पान, मेडिकल हिस्ट्री, फैमिली हिस्ट्री और पहले की रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि कौन-सी जांच कब जरूरी है। इसलिए सिर्फ इंटरनेट पर पढ़कर खुद से टेस्ट या सप्लीमेंट शुरू करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। अगर कोई ब्लड टेस्ट करवाया है, तो उसकी रिपोर्ट भी डॉक्टर को दिखाएं ताकि वह परिणामों को आपकी पूरी हेल्थ हिस्ट्री के साथ समझ सकें।

ध्यान रखें: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी बीमारी का पता लगाने या इलाज शुरू करने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है। बिना सलाह के दवा या विटामिन सप्लीमेंट लेना सही नहीं है।  

 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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