दुखद! 39 साल के फेमस कार्डियक सर्जन की हार्ट अटैक से मौत, उठे कई परेशान करने वाले सवाल
punjabkesari.in Saturday, Aug 30, 2025 - 12:11 PM (IST)

नारी डेस्क: डॉक्टरों को अक्सर भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, जो दूसरों की जान बचाते हैं। लेकिन जब वही जान बचाने वाला हाथ अचानक थम जाए, तो यह सिर्फ एक दुखद खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी होती है। चेन्नई से एक ऐसी ही दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
कौन थे डॉ. ग्रैडलिन रॉय?
डॉ. ग्रैडलिन रॉय चेन्नई स्थित सेवाथा मेडिकल कॉलेज में एक कंसल्टेंट कार्डियक सर्जन के रूप में कार्यरत थे। वे रोज़ाना सैकड़ों मरीजों के दिल की धड़कन को सही करने का काम करते थे। लेकिन दुख की बात है कि खुद एक दिन दिल के दौरे (Heart Attack) का शिकार हो गए।
When the Healer Falls: A Wake-Up Call for Doctors’ Heart Health
— Dr Sudhir Kumar MD DM (@hyderabaddoctor) August 28, 2025
💔Yesterday morning brought heartbreaking news.
Dr. Gradlin Roy, a 39-year-old cardiac surgeon, collapsed during ward rounds. Colleagues fought valiantly-CPR, urgent angioplasty with stenting, intra-aortic balloon… pic.twitter.com/cS8ViaYeYv
बुधवार को जब वे अस्पताल में राउंड ले रहे थे, अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वे वहीं फर्श पर गिर पड़े। मौके पर मौजूद सहकर्मियों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। CPR से लेकर आपातकालीन एंजियोप्लास्टी, स्टेंटिंग और यहां तक कि ECMO जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
क्यों बढ़ रहे हैं डॉक्टरों में हार्ट अटैक के मामले?
यह पहली बार नहीं है जब किसी युवा डॉक्टर की हार्ट अटैक से मौत हुई हो। हैदराबाद के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने सोशल मीडिया पर इस घटना को साझा करते हुए कहा कि डॉ. रॉय की मृत्यु कोई अलग-थलग मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में युवा डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स में अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामले लगातार बढ़े हैं।
ऐसा ही एक और मामला – डॉ. गौरव गांधी की असामयिक मृत्यु
कुछ महीने पहले गुजरात के जामनगर में 41 वर्षीय प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव गांधी का भी अचानक निधन हो गया था। उनकी मौत का कारण भी कार्डियक अरेस्ट बताया गया था। दोनों घटनाओं ने इस गंभीर विषय पर लोगों का ध्यान खींचा है कि जो डॉक्टर दिन-रात दूसरों की जान बचाते हैं, वो खुद कितना बड़ा मानसिक और शारीरिक दबाव झेलते हैं।
When the Healer Falls: A Wake-Up Call for Doctors’ Heart Health
— Dr Sudhir Kumar MD DM (@hyderabaddoctor) August 28, 2025
💔Yesterday morning brought heartbreaking news.
Dr. Gradlin Roy, a 39-year-old cardiac surgeon, collapsed during ward rounds. Colleagues fought valiantly-CPR, urgent angioplasty with stenting, intra-aortic balloon… pic.twitter.com/cS8ViaYeYv
विशेषज्ञों के मुताबिक क्यों बढ़ रहा है खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि डॉक्टरों की दिनचर्या आम इंसानों से बहुत अलग होती है डॉक्टरों को अक्सर 12 से 18 घंटे की लंबी शिफ्ट करनी पड़ती है, जो कई बार 24 घंटे से ज्यादा भी हो सकती है। हर दिन उन्हें जीवन और मृत्यु के बीच झूलते मरीजों को संभालना पड़ता है, जिससे उन पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ता है। उनकी व्यस्त दिनचर्या के कारण वे खुद के लिए ना तो अच्छा भोजन, ना पूरा आराम, और ना ही व्यायाम का समय निकाल पाते हैं। मेडिकल प्रोफेशन में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अभी भी खुलकर बातचीत नहीं होती, जिससे बर्नआउट, अवसाद (डिप्रेशन) जैसी समस्याएं समय रहते सामने नहीं आ पातीं। लगातार काम का दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं डॉक्टरों की स्वास्थ्य जांच और देखभाल को पीछे छोड़ देती हैं।
डॉ. ग्रैडलिन रॉय की मौत एक बड़ा झटका है, खासकर इसलिए क्योंकि वह उन लोगों में से थे जो हर दिन दूसरों की जान बचाते थे। यह घटना हमें याद दिलाती है कि स्वास्थ्य सेवा देने वालों को भी खुद की देखभाल की उतनी ही जरूरत है, जितनी किसी मरीज को होती है। हमें डॉक्टरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा और उनके लिए ऐसा माहौल बनाना होगा जहां वे खुद को भी प्राथमिकता दे सकें।