मम्मी, मुझे माफ़ कर दो, टेंशन मत लेना… NEET परीक्षा के तनाव में 18 वर्षीय छात्र  ने की खुदकुशी

punjabkesari.in Thursday, Jun 25, 2026 - 12:55 PM (IST)

नारी डेस्क:“मम्मी, मुझे माफ़ कर दो, टेंशन मत लेना…”  ये शब्द किसी परिवार के लिए सिर्फ एक संदेश नहीं, बल्कि एक ऐसा दर्द हैं जिसने सबको झकझोर कर रख दिया। NEET परीक्षा के दबाव में एक 18 वर्षीय छात्र ने अपनी जान दे दी, और पीछे छोड़ गया एक ऐसा सवाल जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है कि आखिर पढ़ाई का तनाव कब बच्चों के लिए इतना भारी बोझ बन गया। डॉक्टर बनने का सपना देखने वाला यह छात्र, उम्मीदों और दबाव के बीच इस कदर टूट गया कि उसने खुद को ही खत्म कर दिया। यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि आज के उन तमाम छात्रों की कहानी है जो प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव में अपनी मानसिक सेहत को खोते जा रहे हैं।

मां को भेजा था भावुक वीडियो संदेश

मृतक छात्र की पहचान सुशील धागे के रूप में हुई है। घटना से पहले उसने अपनी मां को एक वीडियो संदेश भेजा था, जिसमें उसने भावुक होकर कुछ व्यक्तिगत बातें कही थीं और परिवार के लिए संदेश छोड़ा था। वीडियो सामने आने के बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कुछ घंटों बाद उसका पता चला। पढ़ाई में था अच्छा प्रदर्शन सुशील धागे पढ़ाई में एक मेहनती और होनहार छात्र बताया जा रहा है। उसने 10वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और इसके बाद उसने डॉक्टर बनने के सपने के साथ NEET की तैयारी शुरू की थी। परिजनों के अनुसार, वह अपनी पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर था, लेकिन परीक्षा के परिणाम और उससे जुड़ा दबाव उस पर भारी पड़ रहा था।

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कुछ समय से था मानसिक तनाव में

परिवार के मुताबिक, परीक्षा को लेकर तनाव की स्थिति के कारण उसका व्यवहार कुछ दिनों से बदल गया था। घटना से पहले वह मंगलवार शाम से घर से लापता था। बाद में बुधवार सुबह उसका शव एक कुएं से बरामद किया गया। परिवार पर पहले ही पड़ा था बड़ा सदमा जानकारी के अनुसार, छात्र के पिता का निधन करीब छह महीने पहले बीमारी के कारण हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी काफी हद तक उसी पर आ गई थी। इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और घर में मातम का माहौल है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में इसे परीक्षा से जुड़े मानसिक तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा से जुड़े दबाव को लेकर गंभीर चर्चा को जन्म दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में परिवार और संस्थानों को छात्रों के साथ संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
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Content Writer

Priya dhir

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