12 हजार फीट की ऊंचाई पर विराजते हैं भगवान कृष्ण, झील के बीच बना है ये अनोखा मंदिर

punjabkesari.in Friday, Sep 04, 2026 - 01:22 PM (IST)

नारी डेस्क : हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में समुद्र तल से करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर भगवान श्रीकृष्ण का अनोखा मंदिर स्थित है। यूला कंडा में झील के बीच बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 14 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ता है। जन्माष्टमी के मौके पर यहां भक्तों की खास भीड़ देखने को मिलती है। उत्तराखंड की तरह हिमाचल प्रदेश को भी देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां पहाड़ों के बीच कई ऐसे प्राचीन और अनोखे मंदिर हैं, जो अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी खास हैं। इन्हीं में से एक है यूला कंडा का श्रीकृष्ण मंदिर। आमतौर पर ऊंचाई वाले पहाड़ी मंदिरों की बात करें तो भगवान शिव के मंदिरों का जिक्र ज्यादा होता है, लेकिन किन्नौर का यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर एक खूबसूरत झील के बीच बना हुआ है। जन्माष्टमी के दौरान यहां का माहौल बेहद खास हो जाता है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

झील के बीच बना है भगवान कृष्ण का मंदिर

यूला कंडा का यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित है। मंदिर के चारों ओर ऊंचे पहाड़ और बीच में शांत झील इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। जन्माष्टमी के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। कई भक्त जन्माष्टमी से एक दिन पहले ही यहां पहुंच जाते हैं, ताकि जन्मोत्सव में शामिल हो सकें।

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पांडवों से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

यूला कंडा मंदिर को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें से एक मान्यता इसे पांडवों से जोड़ती है। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस क्षेत्र में समय बिताया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, युधिष्ठिर ने इसी क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया था और उन्हें भगवान के दर्शन हुए थे। हालांकि, इन मान्यताओं का ऐतिहासिक प्रमाण अलग विषय है।

जन्माष्टमी पर क्यों उमड़ते हैं श्रद्धालु?

यूला कंडा में जन्माष्टमी का उत्सव काफी खास माना जाता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार यहां जन्माष्टमी समारोह की शुरुआत बुशहर रियासत के राजा केहरी सिंह के समय से मानी जाती है। समय के साथ यह आयोजन बड़ा होता गया। जन्माष्टमी के दिन आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। बाहर से आने वाले भक्तों के लिए स्थानीय स्तर पर भोजन और ठहरने जैसी व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।

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किन्नौरी टोपी से जुड़ी है अनोखी मान्यता

यूला कंडा मंदिर से जुड़ी सबसे दिलचस्प स्थानीय मान्यताओं में से एक किन्नौरी टोपी को लेकर है। मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन झील में किन्नौरी टोपी को उल्टा करके रखा या बहाया जाता है। अगर टोपी पानी में डूबे बिना झील के दूसरे किनारे तक पहुंच जाती है तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। वहीं, टोपी के डूब जाने को शुभ नहीं माना जाता। यह एक स्थानीय धार्मिक मान्यता है और इसे वैज्ञानिक रूप से भविष्यवाणी का तरीका नहीं माना जाता।

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झील की परिक्रमा भी करते हैं श्रद्धालु

मंदिर के साथ यहां की झील भी धार्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रद्धालु झील की परिक्रमा करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से पुण्य मिलता है और पापों से मुक्ति की कामना पूरी होती है। अगर आप जन्माष्टमी के दौरान यूला कंडा जाने का प्लान बना रही हैं तो इसे सामान्य घूमने की जगह न समझें। यह ऊंचाई वाला इलाका है और मंदिर तक पहुंचने के लिए ट्रैक करना पड़ता है।

यात्रा से पहले इन बातों का ध्यान रखें

मंदिर करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 14 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ता है।
पहाड़ी इलाके में मौसम तेजी से बदल सकता है।
ट्रैकिंग के लिए जरूरी जूते और सामान साथ रखें।
पर्याप्त पानी और हल्का भोजन साथ रखें।
अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही ट्रैक की योजना बनाएं।
मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेकर ही यात्रा करें।
जन्माष्टमी के समय भीड़ अधिक हो सकती है, इसलिए ठहरने की व्यवस्था पहले से देख लें।

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कहां रुक सकते हैं?

यूला कंडा ट्रैक शुरू करने से पहले आसपास के इलाकों में ठहरने के विकल्प मिल सकते हैं। इसके अलावा लीपा गांव में होमस्टे का विकल्प देखा जा सकता है। वहीं, रेकोंग पियो में होटल और हॉस्टल जैसे ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं। यात्रा से पहले उपलब्धता की जानकारी लेना बेहतर रहेगा, खासकर जन्माष्टमी जैसे व्यस्त समय में।

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यूला कंडा कैसे पहुंचें?

यूला कंडा जाने के लिए किन्नौर की ओर जाने वाले मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रेक की शुरुआत किन्नौर जिले की निचार तहसील के युल्ला खास गांव से बताई जाती है।
दिल्ली से: करीब 600 किलोमीटर की दूरी बताई जाती है। सामान्य रूट दिल्ली-चंडीगढ़-शिमला-नारकंडा-रामपुर-तापरी-युल्ला खास की ओर जाता है।
चंडीगढ़ से: करीब 450 किलोमीटर का सफर है। चंडीगढ़ से शिमला तक बस और आगे सड़क मार्ग से टैक्सी या अन्य वाहन लिया जा सकता है।
शिमला से: करीब 200 किलोमीटर की दूरी बताई जाती है। आगे का सफर नारकंडा, रामपुर और तापरी होते हुए युल्ला खास की ओर जाता है।
यात्रा की दूरी और समय मौसम, सड़क की स्थिति और यातायात के हिसाब से बदल सकते हैं। इसलिए निकलने से पहले स्थानीय स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है।

खाने-पीने की क्या व्यवस्था है?

लीपा और आसपास के इलाकों में स्थानीय भोजन के विकल्प मिल सकते हैं। यहां राजमा-चावल, पहाड़ी रोटी और खिचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन मिलते हैं। रेकोंग पियो में कैफे और खाने के अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं। ट्रैक के दौरान अपने साथ पर्याप्त पानी, ड्राई फ्रूट्स और जरूरत के मुताबिक हल्का स्नैक रखना बेहतर है।

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जन्माष्टमी पर क्यों खास है यूला कंडा?

यूला कंडा सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हिमाचल की प्राकृतिक खूबसूरती को करीब से महसूस करने वाली जगह भी है। करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई, पहाड़ों से घिरी झील और उसके बीच स्थित भगवान कृष्ण का मंदिर इसे बाकी धार्मिक स्थलों से अलग बनाता है। जन्माष्टमी के दौरान यहां धार्मिक आस्था और पहाड़ी प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम देखने को मिलता है। हालांकि, ऊंचाई और कठिन ट्रैक को देखते हुए यात्रा की तैयारी और मौसम की जानकारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।


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Content Editor

Monika

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