World Heart Day : युवाओं का दिल जल्दी हाे रहा बूढ़ा, सीने में दर्द और सांस फूलना नहीं नॉर्मल बात
punjabkesari.in Tuesday, Sep 29, 2026 - 03:08 PM (IST)
नारी डेस्क: वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर फरीदाबाद के मेट्रो हॉस्पिटल में सामने आए एक हालिया मामले ने युवाओं के लिए एक ज़रूरी संदेश दिया है, दिल की बीमारी सिर्फ़ ज़्यादा उम्र के लोगों तक ही सीमित नहीं है। 32 वर्षीय महिला सीने में दर्द और सांस फूलने की शिकायत लेकर अस्पताल आई थीं। कार्डियक जांच के बाद उनमें एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (ACS) और गंभीर डबल-वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीज का पता चला।

क्या है एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम?
एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम उन स्थितियों के समूह को कहते हैं जिनमें दिल तक खून का बहाव अचानक कम हो जाता है। इसके लक्षणों में सीने में दर्द, दबाव या बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ, पसीना आना, जी मिचलाना, बहुत ज़्यादा थकान या हाथ, कंधे, जबड़े या पीठ तक फैलने वाली बेचैनी शामिल हो सकती है। 32 साल के युवा मरीज़ में गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का पता चलने से इस बात पर ध्यान जाता है कि दिल की गंभीर बीमारियां कम उम्र के लोगों को भी हो सकती हैं। सिर्फ़ उम्र को ही दिल की बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करने का कारण नहीं मानना चाहिए।
सीने में दर्द चेतावनी के संकेत
डाॅक्टर के अनुसार उम्र चाहे जो भी हो, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की सही तरह से जांच होनी चाहिए। कम उम्र के लोगों को भी कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ हो सकती है, और लक्षणों को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए या उन्हें अपने-आप तनाव, एसिडिटी या थकान का नतीजा नहीं मान लेना चाहिए। शुरुआती जांच से बीमारी का पता लगाने और समय पर इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है। हालांकि सीने में दर्द एक ज़रूरी चेतावनी का संकेत है, लेकिन सांस लेने में तकलीफ, बिना किसी वजह के थकान, पसीना आना, जी मिचलाना और शरीर के ऊपरी हिस्से में बेचैनी भी दिल की संभावित समस्या का संकेत हो सकते हैं।

ये है दिल की बीमारी का कारण
वर्ल्ड हार्ट डे पर, डॉक्टर जोखिम वाले कारकों को पहचानने और कम उम्र से ही बचाव के उपाय अपनाने के महत्व पर ज़ोर दे रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, तंबाकू का इस्तेमाल, शारीरिक गतिविधि की कमी, खान-पान की खराब आदतें और परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी का इतिहास, ये सभी कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के बढ़ते जोखिम से जुड़े कारक हैं। हालांकि, जिन लोगों में जोखिम के साफ़ कारक नहीं दिखते, उन्हें भी लगातार या असामान्य लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर की निगरानी, शरीर का वज़न सही रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना और तंबाकू से दूर रहना दिल की लंबी अवधि की सेहत की रक्षा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इन बातों का रखें ख्याल
हापुड़ के 32 साल के मरीज़ का मामला 'वर्ल्ड हार्ट डे' पर यह याद दिलाता है कि दिल की सेहत के बारे में जागरूकता कम उम्र से ही शुरू होनी चाहिए। दिल की बीमारी को सिर्फ़ बुढ़ापे की समस्या नहीं समझना चाहिए। चेतावनी के संकेतों को पहचानना, अपने जोखिम के कारणों को समझना और समय पर डॉक्टर की सलाह लेने से गंभीर दिल की बीमारियों का बिना किसी देरी के पता लगाने में मदद मिल सकती है। 'वर्ल्ड हार्ट डे' दुनिया भर के लोगों को दिल की सेहत पर ज़्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित करता है, और इस मामले से साफ़ संदेश मिलता है, अपने दिल की सुनें, चेतावनी के संकेतों को पहचानें और उम्र को लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने का कारण न बनने दें।

