सुबह की इस आदत से कोई समझौता नहीं करतीं समांथा, जानें इसके फायदे
punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 03:14 PM (IST)
नारी डेस्क: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह उठते ही ज्यादातर लोगों का हाथ सबसे पहले मोबाइल की तरफ जाता है। कोई सोशल मीडिया चेक करने लगता है, तो कोई दिनभर के कामों की चिंता में डूब जाता है। धीरे-धीरे यही आदत तनाव और मानसिक थकान की वजह बन सकती है। लेकिन साउथ की मशहूर अभिनेत्री समांथा रुथ प्रभु की सुबह की दिनचर्या कुछ अलग है। वह अपनी मॉर्निंग रूटीन में एक ऐसी आदत को खास जगह देती हैं, जिसके लिए समय निकालना उनके लिए बेहद जरूरी है। यह आदत है ग्रैटिट्यूड जर्नल यानी उन चीजों को लिखना, जिनके लिए हम जिंदगी में आभारी महसूस करते हैं। समांथा के मुताबिक, इस आदत ने मुश्किल समय में उनके सोचने के तरीके को बदलने में मदद की। आखिर ग्रैटिट्यूड डायरी क्या है और इसे लिखने से मन को कैसे फायदा मिल सकता है? आइए जानते हैं।
सुबह 30 मिनट से एक घंटे तक क्या करती हैं समांथा?
समांथा रुथ प्रभु ने चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी सुबह की दिनचर्या के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया कि वह सुबह उठने के बाद अपनी ग्रैटिट्यूड डायरी लिखने के लिए समय निकालती हैं। इस दौरान वह उन चीजों को कागज पर लिखती हैं, जिनके लिए वह आभारी महसूस करती हैं। इसके लिए वह करीब 30 मिनट से एक घंटे तक का समय देती हैं। समांथा ने बताया कि जिंदगी के मुश्किल दौर में उन्हें ग्रैटिट्यूड जर्नल लिखने की सलाह दी गई थी। शुरुआत में उनके लिए ऐसा करना आसान नहीं था, क्योंकि उस समय वह भावनात्मक रूप से अच्छा महसूस नहीं कर रही थीं। ऐसे में सकारात्मक बातें लिखना भी चुनौतीपूर्ण लगता था। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि भले ही उनकी परिस्थितियां तुरंत नहीं बदलीं, लेकिन उन्हें देखने और समझने का नजरिया जरूर बदलने लगा। डायरी लिखने के अलावा समांथा सुबह की प्राकृतिक रोशनी में समय बिताने और ध्यान करने जैसी आदतों को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करती हैं।
क्या होती है ग्रैटिट्यूड डायरी?
ग्रैटिट्यूड डायरी को आसान भाषा में आभार डायरी कहा जा सकता है। इसमें आप रोजाना उन छोटी-बड़ी चीजों के बारे में लिखते हैं, जिनके लिए आप खुद को आभारी महसूस करते हैं। इसके लिए किसी बड़ी उपलब्धि या खास मौके का इंतजार करने की जरूरत नहीं होती। उदाहरण के लिए, परिवार के साथ अच्छा समय बिताना, किसी दोस्त का मुश्किल वक्त में साथ देना, मनपसंद खाना मिलना या दिनभर की थकान के बाद सुकून से आराम करना भी आभार व्यक्त करने की वजह हो सकता है। इसका मकसद यह नहीं है कि आप अपनी परेशानियों को नजरअंदाज करें या हर हाल में खुश रहने का दिखावा करें। बल्कि यह आदत आपको मुश्किलों के बीच उन अच्छी चीजों पर भी ध्यान देने में मदद कर सकती है, जिन्हें हम अक्सर रोजमर्रा की भागदौड़ में भूल जाते हैं।
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ग्रैटिट्यूड डायरी लिखने के क्या फायदे हो सकते हैं?
तनाव से निपटने में मिल सकती है मदद
जब हम लगातार काम, जिम्मेदारियों और भविष्य की चिंता में उलझे रहते हैं, तो मन पर दबाव बढ़ सकता है। डायरी में आभार से जुड़ी बातें लिखने से कुछ समय के लिए ध्यान उन चीजों की ओर जा सकता है, जो हमारे जीवन में अच्छी हैं। इससे कुछ लोगों को तनाव से निपटने में मदद मिल सकती है।
सोचने का नजरिया बदल सकता है
कई बार हम दिनभर में हुई गलतियों या परेशानियों के बारे में ही सोचते रहते हैं। ऐसे में अच्छी बातों को लिखने से दिन को एक अलग नजरिए से देखने का मौका मिल सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि समस्याएं खत्म हो जाएंगी, लेकिन उन्हें संभालने का तरीका बेहतर हो सकता है।
छोटी-छोटी खुशियों की अहमियत समझ आती है
जिंदगी में खुशी के लिए हमेशा किसी बड़ी सफलता का इंतजार करना जरूरी नहीं है। अपनों के साथ बिताया समय, किसी का सहयोग या अपनी पसंद का काम करने का मौका भी मायने रखता है। ग्रैटिट्यूड डायरी लिखने से ऐसी छोटी खुशियों पर ध्यान देना आसान हो सकता है।
अपनी भावनाओं को समझने का मौका मिलता है
डायरी लिखते समय व्यक्ति अपने दिन और भावनाओं के बारे में सोचता है। इससे उसे यह समझने में मदद मिल सकती है कि कौन-सी बातें उसे सुकून देती हैं और किन परिस्थितियों में वह ज्यादा परेशान महसूस करता है। अपनी भावनाओं को पहचानना उन्हें बेहतर तरीके से संभालने की दिशा में एक कदम हो सकता है।

दिन की शुरुआत शांत तरीके से हो सकती है
सुबह उठते ही फोन देखने या काम की चिंता करने के बजाय कुछ मिनट अपने लिए निकालना उपयोगी हो सकता है। डायरी लिखना दिन की शुरुआत को थोड़ा व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका फायदा हर व्यक्ति को एक जैसा मिले, यह जरूरी नहीं है।
आप भी कैसे शुरू कर सकते हैं यह आदत?
अगर आप अपनी सुबह की दिनचर्या में ग्रैटिट्यूड डायरी शामिल करना चाहते हैं, तो इसके लिए शुरुआत में 30 मिनट या एक घंटा निकालने की जरूरत नहीं है। केवल पांच मिनट से शुरुआत की जा सकती है। सुबह उठकर मोबाइल देखने से पहले कुछ समय अपने लिए निकालें। एक डायरी या नोटबुक में तीन ऐसी बातें लिखें, जिनके लिए आप आभारी हैं। कोशिश करें कि हर दिन कुछ नया लिखें, लेकिन खुद पर इसे लेकर दबाव न बनाएं। अगर किसी दिन आप परेशान हैं, तो अपनी भावनाओं को भी ईमानदारी से लिखें। खुद को जबरदस्ती सकारात्मक महसूस करने के लिए मजबूर न करें। चाहें तो इसके बाद कुछ मिनट ध्यान करें या सुबह की प्राकृतिक रोशनी में टहल लें। ऐसी दिनचर्या बनाएं, जिसे आप अपनी सुविधा के अनुसार नियमित रूप से अपना सकें।
क्या मानसिक स्वास्थ्य के लिए सिर्फ यही आदत काफी है
ग्रैटिट्यूड डायरी लिखना कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हर परेशानी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। इसके प्रभाव को लेकर शोध में सकारात्मक संकेत मिले हैं, हालांकि फायदे हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। अगर आप लंबे समय से तनाव, उदासी, बेचैनी या नींद की समस्या से जूझ रहे हैं और इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
समांथा की इस आदत से एक बात जरूर सीखी जा सकती है कि खुद के लिए कुछ समय निकालना और जिंदगी की छोटी-छोटी अच्छी बातों पर ध्यान देना भी दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है। जरूरी नहीं कि इसके लिए घंटों बिताए जाएं। शुरुआत कुछ मिनटों से भी की जा सकती है।

