सोते-सोते कैसे आ जाता है Brain Stroke? सुबह उठते ही दिखें ये लक्षण तो बिल्कुल न करें Ignore

punjabkesari.in Saturday, Oct 31, 2026 - 01:23 PM (IST)

नारी डेस्क: स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिमाग के किसी हिस्से तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है या दिमाग की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। ऐसी स्थिति में दिमाग की कोशिकाएं तेजी से प्रभावित होने लगती हैं। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि स्ट्रोक अचानक जागते समय या दिन में काम करते हुए आता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार व्यक्ति रात में सोते समय भी स्ट्रोक का शिकार हो सकता है और उसे इसकी जानकारी सुबह उठने पर मिलती है। इसे वेक-अप स्ट्रोक (Wake-Up Stroke) कहा जाता है।

इस स्थिति में व्यक्ति रात को सोने से पहले बिल्कुल सामान्य महसूस करता है, लेकिन सुबह उठने पर उसे बोलने, चलने, देखने या शरीर के किसी हिस्से को हिलाने में परेशानी हो सकती है। कई बार चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाता है या हाथ-पैर में अचानक कमजोरी महसूस होने लगती है। ऐसे लक्षणों को थकान या नींद का असर समझकर टालना भारी पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि सोते समय स्ट्रोक कैसे आता है, इसके लक्षण क्या हैं और किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।

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सोते समय कैसे आ जाता है ब्रेन स्ट्रोक

स्ट्रोक किसी भी समय आ सकता है, यहां तक कि रात में गहरी नींद के दौरान भी। ऐसा मुख्य रूप से दो स्थितियों में होता है। पहली स्थिति में दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नस में खून का थक्का जम जाता है, जिससे दिमाग के उस हिस्से तक रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसे इस्केमिक स्ट्रोक कहते हैं। दूसरी स्थिति में दिमाग की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और आसपास खून बहने लगता है। इसे हेमरेजिक स्ट्रोक कहा जाता है। कई बार स्ट्रोक रात में कब आया, इसका सही समय पता नहीं चल पाता। व्यक्ति सोने से पहले ठीक होता है, लेकिन सुबह उठने पर उसे स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं। इसी वजह से इसे वेक-अप स्ट्रोक कहा जाता है। ऐसे मामलों में डॉक्टरों के लिए यह जानना जरूरी होता है कि व्यक्ति आखिरी बार कब सामान्य अवस्था में था, क्योंकि इलाज का फैसला करने में यह जानकारी अहम भूमिका निभाती है।

सुबह उठते ही दिख सकते हैं ये लक्षण

वेक-अप स्ट्रोक के लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं। अगर सुबह उठने पर चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा नजर आए या मुस्कुराने में परेशानी हो, तो इसे हल्के में न लें। यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। इसी तरह, शरीर के एक तरफ हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना भी चेतावनी का संकेत है। व्यक्ति को हाथ उठाने, चीजें पकड़ने या चलने में परेशानी हो सकती है। बोलने में अचानक दिक्कत आना, शब्द साफ न निकलना या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना भी स्ट्रोक के लक्षणों में शामिल है। कई बार व्यक्ति कुछ कहना चाहता है, लेकिन सही शब्द नहीं बोल पाता। कुछ लोगों को अचानक एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देने लगता है या नजर कमजोर महसूस होती है। वहीं, अचानक चक्कर आना, लड़खड़ाना और शरीर का संतुलन बिगड़ना भी स्ट्रोक की ओर इशारा कर सकता है। बिना किसी स्पष्ट वजह के अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना भी गंभीर संकेत हो सकता है। खासकर अगर इसके साथ उल्टी, बेहोशी या शरीर में कमजोरी हो, तो तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।

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किन लोगों में बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा

हाई ब्लड प्रेशर: लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। यह स्ट्रोक के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है। इसलिए ब्लड प्रेशर की नियमित जांच और उसे नियंत्रित रखना जरूरी है।

डायबिटीज: लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा रहने से रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है। इससे स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है। डायबिटीज के मरीजों को अपनी शुगर नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए।

बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल: शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से धमनियों में प्लाक जमा हो सकता है। इससे खून का बहाव प्रभावित होता है और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।

दिल की बीमारियां: दिल की कुछ समस्याएं, खासकर एट्रियल फिब्रिलेशन यानी अनियमित दिल की धड़कन, खून का थक्का बनने का खतरा बढ़ा सकती हैं। यह थक्का दिमाग तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है।

धूम्रपान: सिगरेट और तंबाकू का सेवन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इन आदतों से दूरी बनाना जरूरी है।

शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना भी स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। रोजाना टहलना और सक्रिय रहना सेहत के लिए फायदेमंद है।

गलत खानपान: ज्यादा नमक, तली-भुनी चीजें, ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को प्रभावित कर सकता है। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?

स्ट्रोक के हर मामले को रोका नहीं जा सकता, लेकिन अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके इसका खतरा कम किया जा सकता है। सबसे पहले समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं। अगर डॉक्टर ने कोई दवा दी है, तो उसे नियमित रूप से लें और अपनी मर्जी से बंद न करें। रोजाना पैदल चलने या किसी दूसरी शारीरिक गतिविधि के लिए समय निकालें। खाने में नमक और ज्यादा तली-भुनी चीजों की मात्रा कम रखें। फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और पौष्टिक भोजन को डाइट में शामिल करें। इसके साथ ही धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं, पर्याप्त नींद लें और वजन को संतुलित रखने की कोशिश करें।

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स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करें?

अगर सुबह उठने पर किसी व्यक्ति में चेहरे का टेढ़ापन, हाथ-पैर में कमजोरी या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में पहुंचें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें।लक्षण पहली बार कब दिखाई दिए, इसका समय नोट करें। अगर व्यक्ति सो रहा था और सुबह लक्षण नजर आए, तो डॉक्टर को यह भी बताएं कि वह आखिरी बार कब बिल्कुल सामान्य था। व्यक्ति को अपनी मर्जी से खाना, पानी या दवा न दें, क्योंकि स्ट्रोक में निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। समय पर इलाज मिलने से दिमाग को होने वाले नुकसान को कम करने की संभावना बढ़ सकती है।

डिस्क्लेमर: स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसके किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है, इसे डॉक्टर की सलाह या इलाज का विकल्प न समझें।  


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Content Editor

Priya Yadav

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