लड़कियों के पीरियड साइकिल क्यों छोटे होते जा रहे हैं! जानिए डॉक्टर की राय
punjabkesari.in Wednesday, Apr 29, 2026 - 01:25 PM (IST)
नारी डेस्क: हाल के समय में कई स्त्री रोग विशेषज्ञ यह बात नोट कर रहे हैं कि कुछ महिलाओं में मेन्स्ट्रुअल (पीरियड) साइकिल सामान्य से छोटा होता जा रहा है। यह समस्या खासकर शहरी आबादी में अधिक देखने को मिल रही है, जहां लाइफस्टाइल, तनाव और खानपान में तेजी से बदलाव आए हैं। हालांकि हर महिला में यह स्थिति चिंता का विषय नहीं होती, लेकिन अगर साइकिल लगातार छोटा बना रहे तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है।
सामान्य मेन्स्ट्रुअल साइकिल क्या होता है
डॉक्टरों के अनुसार एक स्वस्थ मेन्स्ट्रुअल साइकिल आमतौर पर 21 से 35 दिनों के बीच होता है। यानी दो पीरियड्स के बीच का अंतर अगर इस दायरे में है तो उसे सामान्य माना जाता है। लेकिन सिर्फ दिनों की गिनती ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ कुछ और चीजें भी देखना जरूरी होता है, जैसे ब्लीडिंग बहुत ज्यादा या बहुत कम तो नहीं हो रही, या फिर पीरियड्स अचानक अनियमित तो नहीं हो गए, दर्द असामान्य रूप से ज्यादा तो नहीं ब्लीडिंग में थक्के (clots) तो नहीं आ रहे। अगर इनमें से कोई भी बदलाव लगातार दिखाई दे, तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर में हार्मोनल या अन्य कोई गड़बड़ी चल रही है।

“शॉर्ट मेन्स्ट्रुअल साइकिल” क्या होता है
जब दो पीरियड्स के बीच का अंतर लगातार 21 दिनों से कम होने लगे, तो इसे शॉर्ट या छोटा मेन्स्ट्रुअल साइकिल कहा जाता है। यह स्थिति बार-बार होने पर सामान्य नहीं मानी जाती। इसमें शरीर जल्दी-जल्दी पीरियड्स के फेज में चला जाता है, जिससे कई बार हार्मोनल संतुलन बिगड़ने लगता है। छोटे पीरियड साइकिल के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? डॉक्टरों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें जीवनशैली और शरीर से जुड़े दोनों प्रकार के फैक्टर शामिल हैं। लगातार तनाव, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या शरीर के हार्मोन कंट्रोल सिस्टम को प्रभावित करती है। इससे दिमाग और अंडाशय के बीच संतुलन बिगड़ सकता है, जिसका असर सीधे पीरियड साइकिल पर पड़ता है। बहुत तेजी से वजन बढ़ना या घटना, दोनों ही स्थिति में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन प्रभावित होते हैं। इसका सीधा असर साइकिल पर पड़ता है।
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थायरॉइड की समस्या
थायरॉइड हार्मोन में हल्का सा असंतुलन भी पीरियड साइकिल को छोटा या अनियमित कर सकता है। हार्मोनल बदलाव और उम्र से जुड़े कारण पेरिमेनोपॉज (मेनोपॉज से पहले का चरण) या ओवेरियन रिजर्व में कमी आने पर भी साइकिल छोटा हो सकता है। छोटा मेन्स्ट्रुअल साइकिल सिर्फ एक शारीरिक बदलाव नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे शरीर और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है। बार-बार पीरियड्स आने से शरीर में आयरन की कमी हो सकती है, जिससे एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण लगातार थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है।

कैसे रखें मेन्स्ट्रुअल साइकिल को संतुलित
डॉक्टरों की सलाह है कि कुछ सामान्य जीवनशैली सुधार करके काफी हद तक इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित और पोषक आहार लें (आयरन, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर भोजन) पर्याप्त नींद लें, नियमित व्यायाम करें, तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें, ऐसे मे क्या नही करना चाहिए बहुत ज्यादा डाइटिंग या क्रैश डाइट से बचें, बहुत अधिक या बहुत कम एक्सरसाइज न करें ,पीरियड से जुड़ी अनियमितताओं को नजरअंदाज न करें, बिना डॉक्टर की सलाह हार्मोनल दवाएं न लें।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
साइकिल लगातार 21 दिन से कम हो जाए। पीरियड पैटर्न अचानक बदल जाए, बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग हो। लगातार थकान या चक्कर महसूस हों गर्भधारण में परेशानी आए। समय पर जांच कराने से थायरॉइड, हार्मोन या प्रजनन प्रणाली से जुड़ी समस्याओं का सही इलाज संभव हो सकता है।

