फेफड़ों में खून का थक्का जमने से क्याें चली जाती है जान?  समझे इस खतरनाक बीमारी के बारे में

punjabkesari.in Friday, May 15, 2026 - 11:30 AM (IST)

नारी डेस्क:  पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) फेफड़ों की धमनी में खून का थक्का जमने एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है।  यह सबसे चुपचाप और जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी में से एक है, जिसे लोग आज भी समय पर पहचान नहीं पाते हैं। इसकी शुरुआत थकान, थोड़ी-बहुत सांस फूलने या सीने में अजीब से भारीपन से हो सकती है। फिर अचानक, फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं।  फेफड़ों में खून का थक्का जमने पर हमेशा कोई भारी उथल-पुथल नहीं होती।

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पल्मोनरी थ्रोम्बोम्बोलिज्म के शुरुआती लक्षण

 कोई सीढ़ियां चढ़ता है और उसकी सांसें अचानक से फूलने लगती हैं और दिल बेवजह ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता है। आपको सीने में दर्द होता है आप थका हुआ महसूस करते हैं, बेचैन रहते हैं और शायद आपके ऑक्सीजन लेवल में थोड़ी गिरावट भी आ जाती है। ज़्यादातर लोग इसके लिए तनाव, चिंता, प्रदूषण, थकान या एसिडिटी को ज़िम्मेदार ठहराते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ये पल्मोनरी थ्रोम्बोम्बोलिज्म नामक एक घातक स्थिति के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं, जिसे आमतौर पर पल्मोनरी एम्बोलिज्म के नाम से जाना जाता है, जिसमें फेफड़ों के अंदर रक्त का थक्का अचानक रक्त प्रवाह को अवरुद्ध कर देता है।


इस बीमारी की चपेट में थे   प्रतीक यादव

हाल ही में प्रतीक यादव की "गंभीर पल्मोनरी थ्रोम्बोम्बोलिज्म के कारण कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स" से हुई मृत्यु ने एक बार फिर इस स्थिति को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है। उनकी मृत्यु से कुछ सप्ताह पहले डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी), सांस लेने में तकलीफ, उच्च रक्तचाप और फेफड़ों से संबंधित जटिलताओं के इतिहास की भी खबरें थीं। ब्लड क्लॉट्स (खून के थक्के) के बारे में आम धारणा यह है कि वे पैरों में बनते हैं या स्ट्रोक का कारण बनते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि जब यह थक्का फेफड़ों तक पहुंचता है, तो यह अचानक शरीर में ऑक्सीजन के सर्कुलेशन को रोक सकता है।

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जानलेवा है ये बीमारी

डॉक्टरों का कहना है कि "  ज़्यादातर यह थक्का पैरों की गहरी नसों में बनता है, जिसे DVT (डीप वेन थ्रोम्बोसिस) कहा जाता है। अगर थक्के का कोई हिस्सा टूटकर अलग हो जाता है, तो वह खून के बहाव के साथ बहता हुआ पल्मोनरी धमनियों (फेफड़ों की नसों) में जाकर फस जाता है। इसके बाद जो होता है, वह जानलेवा हो सकता है।"  दिल पर अचानक बहुत ज़्यादा दबाव पड़ जाता है, क्योंकि खून फेफड़ों से ठीक से गुज़र नहीं पाता। ऑक्सीजन का स्तर तेज़ी से गिरने लगता है। पल्मोनरी एम्बोलिज़्म के गंभीर मामलों में, मरीज़ की कुछ ही मिनटों में जान जा सकती है।" दुनिया भर के मेडिकल साहित्य में पल्मोनरी एम्बोलिज़्म को अस्पताल में होने वाली अचानक मौतों के मुख्य रोके जा सकने वाले कारणों में से एक माना जाता है।


पल्मोनरी एम्बोलिज़्म के ये हैं आम कारण

डॉक्टरों का कहना है कि सबसे डरावनी बात यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण कितने सामान्य लग सकते हैं। कुछ मरीज़ों को अचानक सांस लेने में तकलीफ़ की ही शिकायत होती है। कुछ को सांस लेते समय सीने में दर्द होता है। कुछ को चक्कर आते हैं, बिना किसी वजह के पसीना आता है, खांसी होती है, दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है वे बेहोश हो जाते हैं या इमरजेंसी आने से कुछ दिन पहले उन्हें अपने एक पैर में सूजन दिखाई देती है। डॉक्टर कहते हैं- "आमतौर पर इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है क्योंकि शुरुआत में ये बहुत गंभीर नहीं लगते। पल्मोनरी एम्बोलिज़्म इसलिए खतरनाक है क्योंकि यह आम लक्षणों के पीछे छिपा रहता है।"  ज़्यादा देर तक बैठे रहना, मोटापा, धूम्रपान, लंबी दूरी की यात्रा, हाल ही में हुई सर्जरी, कैंसर, हार्मोनल दवाए, खून जमने से जुड़ी बीमारियाँ और सुस्त जीवनशैली शरीर में खतरनाक थक्के बनने का कारण बन सकते हैं।


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Content Writer

vasudha

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