15 अगस्त को ही क्यों मिली भारत को आजादी? क्या पहले कोई और तारीख तय थी
punjabkesari.in Wednesday, Aug 12, 2026 - 11:30 AM (IST)
नारी डेस्क: 15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए बेहद खास है। इसी दिन 1947 में देश ने करीब दो सदियों की ब्रिटिश हुकूमत से आजादी हासिल की थी। इस साल भारत अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई? दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में अंग्रेजों की योजना भारत को 15 अगस्त 1947 को आजाद करने की नहीं थी। इसके लिए पहले एक दूसरी तारीख तय की गई थी।
पहले 30 जून 1948 तक आजादी देने की थी योजना
भारत को सत्ता सौंपने की पहली समयसीमा 1948 की थी। 20 फरवरी 1947 को ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में घोषणा की थी कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 तक भारत में सत्ता भारतीयों को सौंप देगी। यानी शुरुआती योजना के मुताबिक अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए करीब एक साल से ज्यादा का समय मिलना था। लेकिन देश के राजनीतिक और सामाजिक हालात तेजी से बिगड़ने लगे। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच मतभेद गहरे होते जा रहे थे और कई इलाकों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा था। ऐसे में अंग्रेजों ने अपनी योजना को जल्दी लागू करने का फैसला किया।

आजादी की लड़ाई ने अंग्रेजों को किया कमजोर
भारत को आजादी अचानक नहीं मिली थी। इसके पीछे दशकों तक चले आंदोलन, संघर्ष और अनगिनत लोगों का बलिदान था। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने अलग-अलग दौर में स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया।
1942 का भारत छोड़ो आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसके बाद द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म होने पर भारतीय नौसैनिकों के विद्रोह, श्रमिक आंदोलनों और भारतीय सैनिकों में बढ़ते असंतोष ने भी अंग्रेजों को यह एहसास करा दिया कि भारत पर लंबे समय तक शासन करना अब आसान नहीं रहेगा।
मार्च 1947 में भारत आए माउंटबेटन
मार्च 1947 में लॉर्ड लुई माउंटबेटन भारत के आखिरी वायसराय बनकर पहुंचे। उन्हें सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस समय ब्रिटिश सरकार की तय समयसीमा जून 1948 तक की थी, लेकिन माउंटबेटन ने देश के हालात को देखते हुए इतना लंबा इंतजार करना उचित नहीं समझा। हिंदू-मुस्लिम तनाव लगातार बढ़ रहा था और कई जगहों पर हिंसा भड़क चुकी थी। दूसरी ओर, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सत्ता के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। माउंटबेटन को डर था कि अगर सत्ता हस्तांतरण में और देरी हुई तो स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है।
3 जून 1947 की योजना ने बदली तस्वीर
इन हालात के बीच 3 जून 1947 को सत्ता हस्तांतरण की योजना सामने आई, जिसे माउंटबेटन प्लान या 3 जून योजना के नाम से जाना जाता है। इसी योजना के तहत ब्रिटिश भारत को दो अलग-अलग देशों भारत और पाकिस्तान में बांटने का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद जुलाई 1947 में ब्रिटिश संसद ने Indian Independence Act, 1947 पारित किया। कानून के मुताबिक 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन बनने वाले थे।

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आखिर 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई
15 अगस्त की तारीख चुनने के पीछे सबसे दिलचस्प कहानी खुद माउंटबेटन से जुड़ी है। दरअसल, 15 अगस्त 1945 को जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण करने की घोषणा की थी। उस समय माउंटबेटन दक्षिण-पूर्व एशिया में मित्र राष्ट्रों की सेनाओं के प्रमुख कमांडर थे। जापान के आत्मसमर्पण को उनके सैन्य करियर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता था। यही वजह थी कि 15 अगस्त की तारीख उनके लिए खास महत्व रखती थी।
माउंटबेटन ने इसी तारीख को भारत को सत्ता सौंपने के लिए चुना। यानी भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त का चयन किसी भारतीय परंपरा या ज्योतिषीय कारण से नहीं, बल्कि माउंटबेटन के लिए इस तारीख के व्यक्तिगत और सैन्य महत्व से भी जुड़ा हुआ था।
क्या 15 अगस्त से पहले कोई और तारीख थी
हां। ब्रिटिश सरकार की शुरुआती घोषणा के मुताबिक सत्ता हस्तांतरण की अंतिम समयसीमा 30 जून 1948 थी। लेकिन माउंटबेटन ने परिस्थितियों को देखते हुए इसे काफी पहले करने का फैसला किया। इस तरह भारत को तय समय से करीब 10 महीने पहले ही आजादी मिल गई। हालांकि, इतनी जल्दी सत्ता हस्तांतरण और विभाजन की प्रक्रिया पूरी करने के फैसले के अपने गंभीर परिणाम भी सामने आए।
आजादी के साथ आया विभाजन का दर्द
1947 की आजादी खुशी के साथ-साथ एक गहरा दर्द भी लेकर आई। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा तय करने की प्रक्रिया बहुत कम समय में पूरी की गई। रैडक्लिफ लाइन के ऐलान में देरी हुई और जब तक लोगों को नई सीमा की पूरी जानकारी मिली, तब तक लाखों लोग अपने घरों से निकलने को मजबूर हो चुके थे। विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। लाखों लोगों को पलायन करना पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई। इसलिए 15 अगस्त 1947 भारत के लिए एक तरफ आजादी की ऐतिहासिक सुबह थी, तो दूसरी तरफ विभाजन की त्रासदी से जुड़ा बेहद भावुक अध्याय भी।

आधी रात को शुरू हुई आजादी की नई सुबह
भारत की स्वतंत्रता का ऐतिहासिक समारोह 14 और 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को संविधान सभा में हुआ। जैसे ही रात के 12 बजे, भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हो गया। इसी ऐतिहासिक मौके पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध ‘Tryst with Destiny’ यानी ‘नियति से साक्षात्कार’ भाषण दिया। यह वह पल था जब सदियों के संघर्ष के बाद भारत ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी नई यात्रा शुरू की। इसलिए 15 अगस्त सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। इसके पीछे स्वतंत्रता आंदोलन का लंबा संघर्ष, माउंटबेटन का जल्द सत्ता हस्तांतरण का फैसला, विभाजन का दर्द और एक नए भारत की शुरुआत इन सबकी कहानी जुड़ी हुई है।

