कोविड-19 ठीक होने के बाद भी क्यों फूलती है सांस? डॉक्टर ने बताई वजह

punjabkesari.in Sunday, Jan 25, 2026 - 10:14 AM (IST)

नारी डेस्क:  कोविड-19, फ्लू और निमोनिया जैसे सांस से जुड़े इंफेक्शन अक्सर ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई लोगों को बीमारी खत्म होने के बाद भी सांस फूलने, खांसी या थकान जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। खासतौर पर कोविड के बाद यह परेशानी आज भी बहुत से लोगों में देखी जा रही है। आखिर ऐसा क्यों होता है, इस बारे में पल्मोनोलॉजी के सीनियर डॉक्टर ने जरूरी जानकारी दी है।

पोस्ट इंफेक्शन लंग प्रॉब्लम क्या है?

आमतौर पर किसी भी वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के ठीक होने के बाद फेफड़े धीरे-धीरे सामान्य हो जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों में ऐसा नहीं होता। उन्हें खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी या जल्दी थकान महसूस होती रहती है। इस स्थिति को पोस्ट इंफेक्शन लंग प्रॉब्लम कहा जाता है, जो अब भारत में काफी आम होती जा रही है।

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डॉक्टर ने बताई मुख्य वजह

आईएसआईसी मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डॉ. के अनुसार, इन समस्याओं की एक बड़ी वजह पोस्ट वायरल ब्रोंकियल हाइपररिस्पॉन्सिवनेस (PVBHR) होती है।

इस स्थिति में इंफेक्शन ठीक होने के बाद भी फेफड़ों की नलियां बहुत ज्यादा संवेदनशील बनी रहती हैं। इसकी वजह से मरीज को:

बार-बार खांसी

सांस फूलना

सीने में भारीपन

घरघराहट

जैसे लक्षण महसूस होते हैं। ये लक्षण अस्थमा जैसे लगते हैं, लेकिन यह अस्थमा नहीं होता।

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कितने समय में ठीक होती है यह समस्या?

डॉक्टर के मुताबिक यह समस्या आमतौर पर 3 हफ्ते से लेकर 3 महीने के भीतर अपने आप ठीक हो जाती है। यह अस्थायी होती है, लेकिन इस दौरान मरीज को रोजमर्रा के काम करने में काफी परेशानी हो सकती है।

कुछ मामलों में हो सकता है स्थायी नुकसान

कुछ गंभीर मरीजों में कोविड या निमोनिया के बाद फेफड़ों में सूजन लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे फेफड़ों के टिश्यू सख्त हो जाते हैं। इसे पल्मोनरी फाइब्रोसिस कहा जाता है। इस स्थिति में फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचना मुश्किल हो जाता है और सांस फूलने की समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है। इसके अलावा कुछ लोगों में लॉन्ग कोविड के कारण भी सांस की दिक्कत महीनों तक बनी रहती है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?

डॉक्टर बताते हैं कि इन लोगों में स्थायी नुकसान का खतरा ज्यादा होता है। जिन्हें कोविड या निमोनिया में अस्पताल में भर्ती होना पड़ा हो। जिन्हें ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी हो।

बुजुर्ग लोग

अस्थमा, डायबिटीज या सीओपीडी के मरीज

स्मोकिंग करने वाले लोग

जांच को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

अगर आपको लंबे समय से सांस फूलने की शिकायत है, तो इसे हल्के में न लें। पल्मोनोलॉजिस्ट से सलाह लेकर

फेफड़ों की जांच (स्पाइरोमेट्री)

छाती का एक्स-रे

सीटी स्कैन

करवाया जा सकता है। सही इलाज में पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, हल्की एक्सरसाइज और इनहेलर दवाएं काफी मददगार होती हैं।

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जरूरी सलाह

समय पर जांच और इलाज से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी समस्या के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।  


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Content Editor

Priya Yadav

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