जहां से भारत पहुंची ज्वालामुखी की राख, वहां अभी चल रहा 2018, सूर्योदय होता है 12 बजे
punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 07:16 PM (IST)
नारी डेस्क : भारत तक पहुंची ज्वालामुखी की राख ने सबका ध्यान उस देश की ओर खींचा है, जहां यह विस्फोट हुआ इथियोपिया। दुनिया के ज्यादातर देशों में जहां अभी 2025 चल रहा है, वहीं इथियोपिया आज भी साल 2018 में जी रहा है। यहां सूर्योदय सुबह 6 नहीं, बल्कि 12 बजे माना जाता है, और साल में 13 महीने होते हैं। यही नहीं, 12 हजार साल बाद सक्रिय हुए ज्वालामुखी हेयली गुब्बी ने देश और पड़ोसी क्षेत्रों में भारी संकट खड़ा कर दिया है।
12 हजार साल बाद सक्रिय हुआ हेयली गुब्बी ज्वालामुखी
इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित हेयली गुब्बी ज्वालामुखी 12,000 वर्ष बाद सक्रिय हुआ है। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि राख और धुएं के बादल 14 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच गए। इन राख के बादलों का प्रभाव अफ्रीका से लेकर एशिया तक कई देशों में महसूस किया गया इसी का असर भारत में भी देखने को मिला।
इथियोपिया: अफ्रीका का सबसे प्राचीन और अनोखा देश
पूर्वी अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित इथियोपिया महाद्वीप का सबसे प्राचीन और अनोखा देश माना जाता है। यह दुनिया के उन बेहद कम देशों में शामिल है, जिसे कभी किसी यूरोपीय शक्ति ने उपनिवेश नहीं बनाया। लगभग 3,000 वर्ष पुरानी सभ्यता वाला यह देश अपनी सांस्कृतिक और जातीय विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां 80 से अधिक जातीय समूह, कई भाषाएं और अनूठी परंपराएं देखने को मिलती हैं। इथियोपिया की लगभग 60% आबादी इथियोपियन ऑर्थोडॉक्स चर्च से जुड़ी है, जो दुनिया के सबसे पुराने ईसाई समुदायों में से एक माना जाता है।
कैलेंडर का अनोखा रहस्य: 2025 नहीं, 2018 चल रहा है
इथियोपिया का कैलेंडर पूरी तरह अद्वितीय है। यहां लोग दुनिया से अलग Ge’ez Calendar (गीज कैलेंडर) का पालन करते हैं, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 7–8 साल पीछे चलता है। यही वजह है कि जब दुनिया में साल 2025 है, इथियोपिया में अब भी 2018 चल रहा है। इस कैलेंडर की खासियतें भी अन्य देशों से बिल्कुल अलग हैं। इथियोपियन साल में कुल 13 महीने होते हैं, जिनमें से 12 महीने 30 दिन के होते हैं और 13वां महीना Pagume नाम का होता है, जिसमें सामान्य वर्ष में 5 दिन और लीप वर्ष में 6 दिन होते हैं। नया साल यहां 1 जनवरी नहीं, बल्कि 11 सितंबर को मनाया जाता है। इसके अलावा समय की गिनती आधी रात से नहीं, बल्कि सूर्योदय से शुरू होती है, जिसे इथियोपियन टाइम कहा जाता है।
इथियोपियन टाइम: सुबह 12 बजे होता है सूर्योदय
इथियोपिया में समय का तरीका भी दुनिया से बिल्कुल अलग है।
सूर्योदय = सुबह 12 बजे
यानी दुनिया का 6 AM = इथियोपिया का 12 AM
समय की गिनती रात 12 बजे नहीं, बल्कि सूरज उगने के पल से शुरू
इसे ही Ethiopian Time कहा जाता है।
गीज और ग्रेगोरियन कैलेंडर का अंतर: 1582 में दुनिया ने ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाया, लेकिन इथियोपिया ने पुराने जूलियन कैलेंडर (और उसके आधार पर गीज संस्करण) को ही बनाए रखा।
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क्यों पीछे है 7–8 साल?
इथियोपिया का कैलेंडर दुनिया के बाकी हिस्सों से 7–8 साल पीछे है। इसका कारण यह है कि इथियोपिया मानता है कि ईसा मसीह का जन्म 7 बीसी में हुआ, जबकि बाकी दुनिया इसे AD 1 मानती है। इसी अंतर के कारण यहां के कैलेंडर में 7–8 वर्षों का फ़र्क बना हुआ है। इसके साथ ही इथियोपिया सांस्कृतिक धरोहर में भी समृद्ध है और यहां यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है, जो इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाती
इथियोपिया सांस्कृतिक धरोहर के मामले में भी समृद्ध है। यह अफ्रीका का वह देश है जिसके सबसे ज्यादा यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स सूची में दर्ज हैं इसी वजह से हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

