थोड़ा सा खाने से भी हो जाती है तबीयत खराब ? तो अपने सेंसिटिव पेट पर जरूर दें ध्यान

punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 06:46 PM (IST)

नारी डेस्क: क्या आपका पेट थोड़ा-सा भी गलत खाने पर तुरंत खराब हो जाता है? अगर आपका पेट थोड़ी-सी भी गड़बड़ी पर फूल जाता है, गैस बनती है, दस्त-कब्ज बदलते रहते हैं या खट्टी डकारें आती हैं, तो इसे  “सेंसिटिव स्टमक” कहकर नजरअंदाज ना करें। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट के अनुसार कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। जानिए कब समझें कि मामला सिर्फ सेंसिटिव स्टमक नहीं है और पेट की समस्या का रामबाण इलाज 


बार-बार तेज पेट दर्द

अगर पेट में बार-बार तेज, चुभने वाला या ऐंठन जैसा दर्द हो रहा है और दर्द कई दिनों तक बना रहता है, तो यह सामान्य गैस नहीं भी हो सकता। यह अल्सर, इंफेक्शन या आंतों की सूजन का संकेत हो सकता है। स्टूल में खून दिखना या काला, चिपचिपा मल आना तुरंत डॉक्टर से मिलने का संकेत है। यह बवासीर से लेकर आंतों की गंभीर बीमारी तक का लक्षण हो सकता है।

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अचानक वजन कम होना

बिना डाइटिंग या एक्सरसाइज के वजन कम होना शरीर का अलार्म सिग्नल है। यह पोषक तत्वों के सही से न पचने या किसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकता है। खाना खाते ही उल्टी होना, या कई दिनों तक जी मिचलाना, पेट के इंफेक्शन, अल्सर या लिवर संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।


लंबे समय तक दस्त या कब्ज

अगर दस्त या कब्ज 2–3 हफ्तों से ज्यादा समय तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम), इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज या थायरॉयड जैसी समस्या से जुड़ा हो सकता है।  तेज बुखार के साथ पेट की समस्या। पेट दर्द के साथ बुखार आना किसी बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।

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पेट की समस्या का रामबाण इलाज

7-दिन का “पेट रीसेट” प्लान: हल्का, घर का बना खाना जैसे खिचड़ी, दलिया, मूंग दाल, दही-चावल, सादी रोटी-सब्जी खाएं। तला-भुना, बहुत मसालेदार, जंक फूड बंद कम करें । हर 3–4 घंटे में थोड़ा-थोड़ा छोटे-छोटे मील लें। रात का खाना हल्का और सोने से 2–3 घंटे पहले लें।

प्रोबायोटिक + फाइबर का संतुलन: दही, छाछ, किण्वित आहार (जैसे कांजी) से अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं। फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाएं जैसे ओट्स, इसबगोल की भूसी (डॉक्टर की सलाह से), हरी सब्जियां। एकदम ज्यादा फाइबर लेने से गैस बढ़ सकती है इसे धीरे-धीरे बढ़ाएं।

ट्रिगर फूड पहचानें (Low-FODMAP सोच): कई लोगों को प्याज, लहसुन, राजमा, छोले, बहुत मीठा या दूध से समस्या बढ़ती है। 2–3 हफ्ते “ट्रायल-एंड-ऑब्जर्व” करें—जो चीज खाने के 6–24 घंटे में लक्षण बढ़ाए, उसे कुछ समय टालें।

 तनाव कम करना = आधा इलाज: पेट और दिमाग का सीधा कनेक्शन है। इसलिए रोज 20–30 मिनट वॉक करें।  7–8 घंटे नींद लें, कई बार सिर्फ स्ट्रेस कंट्रोल से ही IBS के लक्षण काफी घट जाते हैं।


कब दवा जरूरी?

अगर बार-बार एसिडिटी, दस्त-कब्ज का चक्र, या तेज दर्द हो तो गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट से मिलें। जरूरत पड़ने पर एंटासिड, एंटीस्पास्मोडिक, या खास IBS-दवाएं दी जाती हैं। खुद से लंबे समय तक दवा न लें। अगर दर्द इतना तेज हो कि सीधा खड़ा होना मुश्किल हो, खून की उल्टी हो, डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें (चक्कर, कमजोरी, पेशाब कम आना) हो तो डॉक्टर के पास जाएं।

नोट: सही डाइट + ट्रिगर पहचान + स्ट्रेस कंट्रोल ही असली चाबी है। 3–4 हफ्ते नियम से अपनाएं, ज्यादातर लोगों को स्पष्ट फर्क दिखता है। 


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Content Writer

vasudha

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