Til Chaturthi Vrat: कैसे एक गरीब महिला बनी धनवान? जानिए भगवान गणेश की यह प्रेरक कथा
punjabkesari.in Tuesday, Jan 06, 2026 - 10:18 AM (IST)
नारी डेस्क: तिल चतुर्थी साल में आने वाली चार प्रमुख चतुर्थियों में से एक मानी जाती है। इस दिन भगवान श्रीगणेश की विशेष पूजा की जाती है। इस वर्ष तिल चतुर्थी का व्रत 6 जनवरी, मंगलवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन तिल से बने प्रसाद जैसे तिल के लड्डू, गजक और रेवड़ी भगवान गणेश को अर्पित करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तिल चतुर्थी के दिन यदि व्रत के साथ इसकी कथा भी श्रद्धा से सुनी जाए, तो व्रत का पूरा फल मिलता है। आइए जानते हैं तिल चतुर्थी से जुड़ी यह प्रसिद्ध और रोचक कथा।
तिल चतुर्थी की कथा
बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में दो महिलाएं रहती थीं एक जेठानी और दूसरी देवरानी। जेठानी बहुत अमीर थी, जबकि देवरानी बेहद गरीब थी। देवरानी भगवान श्रीगणेश की सच्ची भक्त थी और हर चतुर्थी को नियम से व्रत रखती थी। अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए वह अपनी जेठानी के घर काम भी करती थी। एक बार सकट चौथ (तिल चतुर्थी) के दिन देवरानी के घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था। उसने मदद के लिए अपनी जेठानी से भोजन माँगा, लेकिन जेठानी ने उसे कुछ भी देने से मना कर दिया। जब देवरानी का पति घर लौटा और उसे खाना नहीं मिला, तो वह गुस्से में आ गया और अपनी पत्नी को मार दिया। दुखी देवरानी बिना खाए ही सो गई। उसी रात भगवान श्रीगणेश देवरानी के घर आए और दरवाजा खटखटाया। नींद में देवरानी को लगा कि यह सपना है। उसने कहा,
“दरवाजा खुला है, आप अंदर आ जाइए।”
भगवान गणेश घर में आए और भोजन मांगा। देवरानी ने विनम्रता से कहा, “सुबह जो बथुआ बनाया था, वही चूल्हे पर रखा है। आप वही ग्रहण कर लीजिए।” भगवान गणेश ने वह भोजन खा लिया। इसके बाद उन्होंने शौच के लिए स्थान पूछा। देवरानी ने कहा,
“घर के चारों कोने आपके लिए खुले हैं।” फिर भगवान गणेश ने पोंछने के लिए कुछ मांगा। भूख, दुख और थकान से परेशान देवरानी ने कहा, “आप मेरे मस्तक (सिर) का ही उपयोग कर लीजिए।”
देवरानी को यह सब सपना ही लग रहा था।

चमत्कार का प्रकट होना
अगली सुबह जब देवरानी जागी, तो उसने देखा कि उसका मस्तक और घर के चारों कोने सोने, चांदी, हीरे और मोतियों से भरे हुए हैं। तब उसे समझ आया कि रात में स्वयं भगवान श्रीगणेश उसके घर आए थे। खुशी-खुशी वह भगवान को धन्यवाद देने लगी। फिर धन तौलने के लिए वह अपनी जेठानी से तराजू माँगने गई। चालाक जेठानी ने तराजू के नीचे गोंद लगा दी थी। जब देवरानी ने तराजू वापस किया, तो नीचे सोने के सिक्के चिपके हुए थे। जब जेठानी ने देवरानी से इस चमत्कार के बारे में पूछा, तो देवरानी ने सारी बात सच-सच बता दी।
जेठानी को मिला सबक
यह सुनकर जेठानी भी लालच में आकर चतुर्थी का व्रत करने लगी। कुछ दिनों बाद भगवान श्रीगणेश उसके घर भी आए और वही सब हुआ जो देवरानी के साथ हुआ था। लेकिन अगली सुबह जब जेठानी उठी, तो उसने देखा कि उसके पूरे घर में सोने-चाँदी की जगह गंदगी फैली हुई है, और बदबू के कारण घर में रहना मुश्किल हो गया। डरकर जेठानी ने विद्वानों से सलाह ली। विद्वानों ने कहा कि यदि वह अपनी संपत्ति को देवरानी के साथ समान रूप से बाँट दे, तो भगवान गणेश प्रसन्न हो सकते हैं। जेठानी ने ऐसा ही किया। जैसे ही उसने धन बाँटा, उसका घर फिर से साफ़ और स्वच्छ हो गया।

कथा से मिलने वाली सीख
इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि- सच्ची भक्ति और विनम्रता से भगवान प्रसन्न होते हैं। लालच और अहंकार से कभी सुख नहीं मिलता तिल चतुर्थी की कथा श्रद्धा से सुनने और व्रत रखने से भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है।

