सावधान! डायबिटीज को कंट्रोल करने की दवा ही बढ़ा रही है ये बीमारी, नई रिसर्च में बड़ा खुलासा

punjabkesari.in Thursday, Jan 08, 2026 - 12:10 PM (IST)

नारी डेस्क : डायबिटीज (Diabetes) दुनियाभर में तेज़ी से फैल रही है और भारत को अक्सर “डायबिटीज की राजधानी” कहा जाता है। बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान और जेनेटिक कारणों की वजह से देश में टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए लोग डाइट के साथ-साथ दवाओं पर भी निर्भर रहते हैं, लेकिन अब डायबिटीज की एक आम दवा को लेकर चौंकाने वाली रिसर्च सामने आई है। नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि टाइप-2 डायबिटीज में लंबे समय से इस्तेमाल हो रही सल्फोनिल्यूरिया (Sulphonylureas) कैटेगरी की दवाएं मरीजों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। रिसर्च के मुताबिक ये दवाएं बीमारी को कंट्रोल करने के बजाय समय के साथ उसे और गंभीर बना सकती हैं।

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क्या कहती है नई रिसर्च?

स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि सल्फोनिल्यूरिया ग्रुप की दवाएं, खासतौर पर ग्लाइबेनक्लामाइड (Glibenclamide), अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं पर नकारात्मक असर डालती हैं। यह रिसर्च प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Diabetes, Obesity and Metabolism में प्रकाशित हुई है। प्रो. एडुआर्ड मोंटान्या के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में बताया गया कि ये दवाएं बीटा कोशिकाओं को जबरदस्ती अधिक इंसुलिन रिलीज करने के लिए प्रेरित करती हैं।

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लंबे समय तक ऐसा होने से बीटा कोशिकाएं थकने लगती हैं और उनकी इंसुलिन बनाने की क्षमता कमजोर हो जाती है। रिसर्च में यह भी सामने आया कि इन दवाओं के लगातार इस्तेमाल से उन जीनों की एक्टिविटी कम हो जाती है, जो इंसुलिन उत्पादन के लिए जरूरी होते हैं। समय के साथ यह असर और भी गंभीर हो सकता है।

कब से किया जा रहा है सल्फोनिल्यूरिया दवाओं का इस्तेमाल?

सल्फोनिल्यूरिया (Sulfonylurea) कैटेगरी की दवाओं का इस्तेमाल 1950 के दशक से टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में किया जा रहा है। ये दवाएं अग्न्याशय को अधिक इंसुलिन बनाने और छोड़ने के लिए स्टिम्युलेट करती हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है।

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इस कैटेगरी में शामिल प्रमुख दवाएं हैं

ग्लिमेपिराइड (Glimepiride)
ग्लिपिज़ाइड (Glipizide)
ग्लाइब्यूराइड / ग्लाइबेनक्लामाइड (Glyburide / Glibenclamide)
शुरुआत में ये दवाएं ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में प्रभावी होती हैं, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल से इनका असर घट सकता है और हाइपोग्लाइसीमिया, वजन बढ़ना और बीटा सेल डैमेज जैसे साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ जाता है।

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डायबिटीज मरीजों के लिए क्या है सीख?

विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज का इलाज केवल दवाओं पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज करना।
वजन कंट्रोल, समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच करना।
ये सभी चीजें इलाज में उतनी ही जरूरी हैं। दवाओं में किसी भी तरह का बदलाव डॉक्टर की सलाह के बिना बिल्कुल न करें।

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इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी दवा को शुरू करने, बंद करने या बदलने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। 


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Content Editor

Monika

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