तो हो जाए- एक कप चाय: चांदनी रात में ही तोड़ी जाती है सबसे महंगी चाय की पत्तियां

2021-10-19T12:26:44.7

दुनिया भर में दार्जिलिंग की चाय को एक ख़ास मुकाम हासिल है। यहां आपको 150 रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये प्रति किलो वाली चाय मिल जाएगी। जेब और स्वाद आपका अपना। दार्जिलिंग में चाय के 87 बागान हैं। हर एक बागान में अपने तरह की अनूठी, शानदार ख़ुशबू वाली चाय तैयार की जाती है, दुनिया भर में दार्जिलिंग टी मशहूर है। दार्जिलिंग के मुख्य शहर से आधे घंटे की दूरी तय करके आप दुनिया की सबसे पुरानी चाय फै़क्ट्रियों में शुमार मकाईबाड़ी चाय फैक्टरी पहुंच सकते हैं। यहां पर आप को दुर्लभ क़िस्म की चाय की पत्ती मिलेगी जिसे सिल्वर टिप्स इम्पीरियल के नाम से जाना जाता है। कीमत है डेढ़ लाख रुपये प्रति किलो। देश में इससे महंगी चाय का उत्पादन अन्यत्र कहीं नहीं होता। इस चाय की पत्तियों को तोड़ने के लिए भी ख़ास लोगों का दल रखा गया है। और यह काम भी सिर्फ और सिर्फ पूर्णिमा के दिन यानी कि आज होगा।  सीजन के लिहाज़ से देखा जाए तो साल में चार या पांच बार ही यहां से चाय पत्ती निकली जाती है।

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सामान्यत: चाय का सीजन मार्च से अक्टूबर के बीच होता है। मकाईबाड़ी में चाय तुड़ान के दौरान के वक्त विशेष किस्म के गीत गाये जाते हैं और वैदिक मंत्रोच्चारण होता है। यही नहीं चाय बनाने का सारा काम भी रात को ही होता है। यानी दिन की रौशनी इसपर नहीं पड़ने दी जाती। मकाईबाड़ी बागान में सालाना महज पचास से सत्तर किलो के आस-पास चाय का ही उत्पादन होता है। जबकि पूरे दार्जिलिंग के सभी 87 बागानों का उत्पादन औसत प्रतिवर्ष 90 लाख किलो के करीब है। ऐसे में आप मकाईबाड़ी चाय की मांग का अंदाज़ा सहज लगा सकते हैं। 

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इसका पहला ग्राहक (बरसों से) ब्रिटेन का शाही परिवार है। बता दें कि पीएम मोदी ने भी ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ को इस चाय का एक पैकेट गिफ्ट किया था। शाही परिवार के आर्डर के बाद बची हुई चाय जापान और अमेरिका के खरबपतियों के हिस्से आती है जो एडवांस में आर्डर देकर रखते हैं। चाय सिल्वर टिप्स इम्पीरियल टी के नाम से विख्यात है। वैसे इसी नाम से दार्जिलिंग में दर्जन भर और चायबागान भी चाय तैयार करते हैं लेकिन मकाईबाड़ी बागान की चाय सबसे अलग मानी जाती है। मकाईबाड़ी चाय बागान दार्जिलिंग का सबसे पुराना टी एस्टेट है जिसकी स्थापना 1859 में जीसी बनर्जी नामक शख्स ने की थी। बागान का स्वामित्व आज भी उनके परिवार के पास है। चाय की प्रोसेसिंग के दौरान इसमें स्थानीय आम और एक ख़ास तरह के फूल का कुछ एसेंस मिलाया जाता है। शेष फार्मूला दुनिया से छिपा हुआ है। (मकाईबाड़ी चाय बागान से सम्बंधित लेखों पर आधारित ।

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ऐसे लगा दुनिया को चस्का 


चाय की खोज लगभग 4700 साल पहले हुई।  उपलब्ध जानकारी के अनुसार यूनान के दूसरे राजा शेन नूंग ने  चाय की खोज की थी। राजा शेन को गर्म पानी पीने की आदत थी, लेकिन उनका सेवक एक बार जब उनके लिए  गर्म पानी कर रहा था तो गलती से पास उगी झाड़ियों की  टूट कर गिरी हुई कुछ पत्तियां  पानी में  आकर गिर गई। राजा ने पानी पिया तो उसे एक अलग सी ताजगी महसूस हुई। बस तभी से वह चाय का पानी पीने लगा। कहानियां भी हैं। बता दें कि भारत में भी चाय किसी जड़ी-बूटी से कम नहीं माना जाता है। सिर दर्द है तो कड़क चाय, सर्दी खांसी है तो अदरक की चाय, यहां तक कि सुस्ती दूर करनी हो तो भी चाय ही काम आती है। चाय यहां की रोजमर्रा की जिंदगी में रच और बस चुकी है। तो हो जाए। .. एक कप चाय।
 


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Content Writer

vasudha

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