ग्रहण में सूरज देखने से सिर्फ आंखें ही नहीं, सेहत के इन हिस्सों पर भी पड़ता है असर

punjabkesari.in Monday, Jan 19, 2026 - 05:58 PM (IST)

नारी डेस्क:  सूर्य ग्रहण को लेकर हमारे समाज में कई तरह की मान्यताएं और नियम चलते आ रहे हैं। कहा जाता है कि ग्रहण के समय यह न करें, वह न करें, वरना सेहत को नुकसान हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सूर्य ग्रहण का हमारी सेहत पर असल असर क्या होता है।

इस साल का सूर्य ग्रहण कब है?

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, मंगलवार को फाल्गुन अमावस्या के दिन होगा। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसे दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी अर्जेंटीना और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।

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क्या सूर्य ग्रहण से सेहत को नुकसान होता है?

वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सूर्य ग्रहण खुद से कोई बीमारी नहीं फैलाता। असली खतरा तब होता है, जब लोग बिना किसी सुरक्षा के सूर्य को सीधे देखने की कोशिश करते हैं।

आंखों को सबसे ज्यादा खतरा

ग्रहण के दौरान भी सूरज की किरणें उतनी ही खतरनाक होती हैं। अगर कोई व्यक्ति बिना इक्लिप्स ग्लास बिना फिल्टर सीधे सूरज को देखता है, तो आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंच सकता है। इससे सोलर रेटिनोपैथी नाम की समस्या हो सकती है, जिसमें नजर हमेशा के लिए कमजोर हो सकती है। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि सूर्य ग्रहण को सिर्फ सुरक्षित चश्मे या सही तरीकों से ही देखें।

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नींद और बॉडी क्लॉक पर असर

कुछ रिसर्च के मुताबिक, सूर्य ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाएं कुछ लोगों की नींद बॉडी क्लॉक (जैविक घड़ी) पर हल्का असर डाल सकती हैं। अचानक रोशनी कम होने से शरीर थोड़ी देर के लिए भ्रमित हो सकता है, जिससे थकान बेचैनी सुस्ती महसूस हो सकती है। हालांकि यह असर अस्थायी होता है। मूड और मानसिक स्थिति पर असर मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सूर्य ग्रहण जैसे दुर्लभ मौके कुछ लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। अचानक अंधेरा, माहौल में बदलाव और लोगों की धारणाएं कुछ व्यक्तियों को उदास, बेचैन असहज
महसूस करा सकती हैं। जो लोग पहले से ही तनाव या एंग्जायटी से जूझ रहे होते हैं, उनमें इस समय तनाव बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोगों को यह समय शांति और आत्ममंथन का मौका भी देता है।

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खाने-पीने से जुड़े नियमों की सच्चाई

भारतीय परंपराओं में सूर्य ग्रहण के दौरान खाना बनाने और खाने से मना किया जाता है। मान्यता है कि इस समय भोजन खराब हो जाता है। विज्ञान की बात करें तो इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि पुराने समय में खाना लंबे समय तक खुले में रखा रहता था। साफ-सफाई के साधन सीमित थे।  ऐसे में भोजन के खराब होने का खतरा ज्यादा रहता था। संभव है कि इसी वजह से ये नियम बनाए गए हों। आज भी कई लोग ग्रहण के बाद नया भोजन बनाना पसंद करते हैं।

गर्भवती महिलाओं को क्यों सावधान रहने की सलाह दी जाती है?

परंपरा के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को सूर्य ग्रहण के दौरान बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है। विज्ञान इस बात की पुष्टि नहीं करता कि ग्रहण से गर्भस्थ शिशु को नुकसान होता है। लेकिन यह जरूर सच है कि गर्भावस्था में तनाव डर मानसिक बेचैनी से बचना बहुत जरूरी होता है। ग्रहण को लेकर बनने वाले डर के माहौल से बचाने के लिए शायद ये नियम बनाए गए हों। सूर्य ग्रहण से सीधा नुकसान नहीं होता, लेकिन बिना सुरक्षा सूरज को देखना डर और तनाव में रहना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।

अगर आप वैज्ञानिक तरीके अपनाएं और अफवाहों से दूर रहें, तो सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना की तरह ही है।
 


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Content Editor

Priya Yadav

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