फेफड़ों से पहले बचा लाे अपनी आंखों को, स्मोकिंग आपकी Eyesight कर सकती है Damage !

punjabkesari.in Tuesday, Jun 23, 2026 - 01:51 PM (IST)

नारी डेस्क: यह बात किसी से छिपी नहीं है कि धूम्रपान सेहत का दुश्मन है। इसका जिक्र होते ही  सबसे पहले फेफड़ों या दिल से जुड़ी समस्याओं का ख्याल आता है चाहे वे फेफड़ों का कैंसर, स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थितियां हों या क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी पुरानी बीमारियां हो। लेकिन बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि  स्मोकिंग से सिर्फ़ फेफड़े ही नहीं, बल्कि पूरा शरीर प्रभावित होता है, क्योंकि शरीर के सभी सिस्टम आपस में गहराई से जुड़े होते हैं। इससे आपकी आंखों की रोशनी को भी खतरा हो सकता है। 


क्या है सेंट्रल विजन

सर्जन बताते हैं कि-  स्मोकिंग सेंट्रल विज़न (सीधे सामने देखने की क्षमता) को प्रभावित कर सकती है, जो पढ़ने, गाड़ी चलाने और चेहरों को पहचानने के लिए बहुत जरूरी है और चूंकि यह रोजमर्रा के कामों के लिए बहुत ज़रूरी है, इसलिए व्यक्ति की आज़ादी पर भी बुरा असर पड़ता है। सेंट्रल विजन आंखों की रोशनी का वह हिस्सा है जिस पर लोग रोज़मर्रा के कुछ सबसे आम कामों के लिए निर्भर रहते हैं, इसलिए यह बहुत जरूरी है।  इसकी ज़रूरत अखबार पढ़ने, फ़ोन देखने, खाना पकाने, गाड़ी चलाने, सुई में धागा डालने या दूर से किसी को पहचानने जैसे आसान कामों के लिए होती है। 


स्मोकिंग आंखों को पहुंचाती है ऐसे नुकसान

स्मोकिंग आंख के एक हिस्से पर असर डालती है, जिसे डॉक्टर 'मैकुला' कहते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि आंखों, खासकर रेटिना को ठीक से काम करने के लिए ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की अच्छी सप्लाई की जरूरत होती है। समय के साथ, स्मोकिंग इस सप्लाई को कम कर सकती है और उम्र से जुड़ी मैकुलर डिजनरेशन (जिसे AMD भी कहते हैं) का खतरा बढ़ा सकती है। सर्जन ने कुछ ऐसे चेतावनी वाले संकेत बताए हैं जो आंखों की बिगड़ती सेहत का संकेत हो सकते हैं। जैसे धुंधला दिखना, छोटे अक्षरों को पढ़ने में परेशानी होना, सीधी रेखाओं का टेढ़ा-मेढ़ा दिखना, पहले की तुलना में पढ़ने के लिए ज़्यादा तेज रोशनी की जरूरत पड़ना, चेहरे साफ़ न दिखना, देखने के बीचों-बीच काला धब्बा दिखना। 
 

धूम्रपान करने वालों को नियमित जांच की जरुरत

क्योंकि स्मोकिंग से बहुत बड़ा रिस्क होता है, इसलिए डॉक्टर ने सलाह दी कि जो लोग स्मोकिंग करते हैं, खासकर 40 साल से ज़्यादा उम्र के लोग, उन्हें रेगुलर आंखों की जाँच करवानी चाहिए। लेकिन आंखों की एक सिंपल जांच से रेटिना में होने वाले शुरुआती बदलावों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।  स्मोकिंग से आंखों की गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं, जैसे मोतियाबिंद, नज़र कम होना और अंधापन, खासकर मैक्युलर डिजनरेशन से जुड़े मामलों में। सर्जन के अनुसार, स्मोकिंग करने वाला सबसे अच्छा कदम पूरी तरह से छोड़ना है, क्योंकि इससे आँखों और दिल से लेकर फेफड़ों और ब्लड वेसल तक पूरे शरीर को फायदा होता है।


 नोट: यह आर्टिकल सिर्फ़ जानकारी के लिए है और प्रोफेशनल मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।


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Content Writer

vasudha

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