सिगरेट पीने वालों से ज्यादा इससे दूर रहने वालों को फेफड़ों के कैंसर का खतरा, हैरान कर देगी ये रिपोर्ट
punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 07:04 PM (IST)
नारी डेस्क: एक स्टडी में पहली बार सीधे सबूत मिले हैं कि कैसे किसी व्यक्ति का जेनेटिक मेकअप (आनुवंशिक बनावट) सिगरेट के धुएं या सूरज की रोशनी जैसी चीज़ों के संपर्क में आने पर DNA को नुकसान पहुंचा सकता है और म्यूटेशन (बदलाव) की संख्या को बदल सकता है। 'नेचर' जर्नल में छपी इन जानकारियों से कई बातें समझी जा सकती हैं, जैसे कि ज़्यादातर धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर क्यों नहीं होता, जबकि कुछ धूम्रपान न करने वालों को यह कैंसर हो जाता है।
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कैंसर को प्रभावित करता है जेनेटिक अंतर
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स समेत कई लोगों का कहना है कि इसकी वजह लगभग निश्चित रूप से हमारे विरासत में मिले जेनेटिक मेकअप से जुड़ी है, लेकिन मरीजों के ग्रुप पर की गई स्टडीज़ में इसके सीधे सबूत मिलना मुश्किल रहा है। उन्होंने कहा कि भले ही कई स्टडीज़ में यह संकेत मिला है कि विरासत में मिले जेनेटिक अंतर कैंसर के जोखिम को प्रभावित करते हैं। सीनियर लेखक डंकन ओडोम, जिन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के कैंसर रिसर्च UK (CRUK) कैम्ब्रिज इंस्टीट्यूट में रहते हुए इस रिसर्च का नेतृत्व किया, ने कहा- "कैंसर पूरी तरह से संयोग से नहीं होता है। हालांकि ट्यूमर अक्सर एक ही बायोलॉजिकल नतीजे तक पहुंचते हैं, लेकिन उस नतीजे तक पहुंचने का रास्ता व्यक्ति की जेनेटिक पृष्ठभूमि से तय होता है।"
चूहों पर किया गया रिसर्च
ओडोम ने कहा, "हम पहली बार यह दिखाने में कामयाब रहे हैं कि जेनेटिक पृष्ठभूमि किस हद तक म्यूटेशन की प्रक्रियाओं और ट्यूमर के विकास की प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है।" रिसर्चर्स ने कहा कि इन जानकारियों का कैंसर स्क्रीनिंग और प्रिसिजन मेडिसिन (व्यक्ति-विशेष के लिए सटीक इलाज) पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि रोकथाम और स्क्रीनिंग की रणनीतियों में विरासत में मिले जेनेटिक्स और आबादी की विविधता का ज़्यादा ध्यान रखना पड़ सकता है। रिसर्चर्स ने चूहों की चार ऐसी नस्लें तैयार कीं जिनमें लिवर कैंसर के प्रति अलग-अलग संवेदनशीलता थी। इनमें जेनेटिक विविधता का स्तर वैसा ही था जैसा इंसानी आबादी में देखा जाता है।
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क्या मिला रिसर्च में
सर्चर्स ने डेटा का इस्तेमाल करके यह पता लगाया कि हर ट्यूमर, कैंसर पैदा करने वाले अपने शुरुआती म्यूटेशन से कैसे विकसित हुआ। सभी तरह के चूहों में, कैंसर में लगभग हमेशा एक ऐसा म्यूटेशन हुआ जिसने कैंसर को बढ़ावा देने वाले सिग्नलिंग सिस्टम (जिसे MAPK पाथवे कहते हैं) को एक्टिवेट कर दिया। यह मॉलिक्यूलर सिग्नल्स की एक कई चरणों वाली प्रक्रिया है जो सेल की ग्रोथ समेत जीवन की जरूरी प्रक्रियाओं को कंट्रोल करती है और कई तरह के कैंसर में अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, चूहे के जेनेटिक्स के आधार पर, हुए म्यूटेशन ने कैंसर से जुड़े दूसरे सिग्नलिंग पाथवे की एक्टिविटी को बदल दिया और पूरे जीनोम के डुप्लीकेशन (कॉपी बनने) की एक खास प्रवृत्ति भी पैदा की जिसमें जीव को अपने सभी क्रोमोसोम का एक अतिरिक्त सेट मिल जाता है और अतिरिक्त जीन कॉपी म्यूटेट होने और नए काम करने के लिए आज़ाद हो जाती हैं।

