50 की उम्र में भी क्यों सिंगल हैं सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी? शादी को लेकर कही ये बात
punjabkesari.in Tuesday, Aug 11, 2026 - 10:40 AM (IST)
नारी डेस्क: क्या शादी के लिए एक तय उम्र होती है या फिर जिंदगी में सही इंसान का मिलना ज्यादा मायने रखता है? समाज में अक्सर लोगों से उनकी उम्र के हिसाब से शादी को लेकर सवाल किए जाते हैं। खासकर जब कोई महिला 40 या 50 की उम्र पार कर चुकी हो और उसने शादी न की हो, तो उसके फैसले पर तरह-तरह की बातें होने लगती हैं। लेकिन सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी की सोच इस आम धारणा से बिल्कुल अलग नजर आती है। 50 साल की उम्र में भी सबा पटौदी सिंगल हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में शादी को लेकर कभी जल्दबाजी नहीं की। उनके मुताबिक, शादी सिर्फ इसलिए नहीं की जा सकती क्योंकि उम्र हो गई है या परिवार और समाज की तरफ से दबाव बनाया जा रहा है। उनके लिए किसी रिश्ते में भरोसा, सम्मान, समझ और आपसी तालमेल ज्यादा जरूरी रहा है।
शादी के खिलाफ कभी नहीं थीं सबा
नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो में बातचीत के दौरान सबा पटौदी ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़े कई सवालों पर खुलकर बात की थी। इसी दौरान उनसे पूछा गया कि आखिर उन्होंने शादी क्यों नहीं की। सबा ने साफ किया कि वह कभी शादी के खिलाफ नहीं थीं। उनके परिवार की भी इच्छा थी कि वह शादी करें। परिवार की तरफ से उनके लिए रिश्ते भी देखे गए और कई लड़कों से उनकी मुलाकात करवाई गई। लेकिन किसी के साथ उन्हें वह जुड़ाव महसूस नहीं हुआ, जिसकी वह अपने जीवनसाथी में तलाश कर रही थीं। उनका मानना है कि शादी सिर्फ दो लोगों का साथ आना नहीं है। यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें दोनों के बीच समझ और भरोसा होना जरूरी है। अगर ये चीजें ही न हों तो सिर्फ शादी कर लेना रिश्ते को सफल नहीं बना सकता।

18-19 साल की उम्र में लगभग तय हो गई थी शादी
सबा ने बातचीत में अपनी जिंदगी का एक पुराना किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह करीब 18-19 साल की थीं, तब कोलकाता के एक व्यक्ति के साथ उनकी शादी लगभग तय हो गई थी। परिवार भी इस रिश्ते को लेकर तैयार था और उस समय शादी होने की पूरी संभावना थी। लेकिन आखिर में यह रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच पाया। सबा ने बताया कि उस वक्त वह खुद शादी के लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं थीं। यही वजह थी कि उन्होंने केवल इसलिए शादी का फैसला नहीं लिया क्योंकि परिवार या परिस्थितियां उस दिशा में जा रही थीं। उनके लिए खुद का तैयार होना भी उतना ही जरूरी था।
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सही इंसान के साथ तालमेल को दिया सबसे ज्यादा महत्व
सबा पटौदी की बातों से यह साफ होता है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में शादी को किसी लक्ष्य की तरह नहीं देखा। वह ऐसा साथी चाहती थीं, जिसके साथ उन्हें सहज महसूस हो और जिसके साथ रिश्ते में भरोसा और सम्मान बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा कोई इंसान नहीं मिला, जिसके साथ उनका तालमेल सही बैठता। यही वजह रही कि उन्होंने केवल शादी करने के लिए किसी रिश्ते में समझौता नहीं किया। उनकी सोच के मुताबिक, किसी रिश्ते में होना तभी मायने रखता है जब उसमें दोनों लोग एक-दूसरे को समझें और एक-दूसरे के साथ खुश रह सकें।

पिता मंसूर अली खान पटौदी का भी किया जिक्र
बातचीत के दौरान सबा ने अपने पिता और पूर्व भारतीय क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी का भी जिक्र किया। उन्होंने उन्हें एक शानदार इंसान बताया। हालांकि सबा अपने पिता जैसा जीवनसाथी तलाशने की बात नहीं करतीं, लेकिन वह यह जरूर चाहती थीं कि उनके जीवन में आने वाला व्यक्ति ऐसा हो जिसके साथ एक मजबूत और सम्मानजनक रिश्ता बनाया जा सके। उनके लिए रिश्ते में किसी तरह का दिखावा या सिर्फ सामाजिक तौर पर शादी कर लेना जरूरी नहीं था। वह चाहती थीं कि साथ ऐसा हो जिसमें दोनों लोगों को एक-दूसरे के साथ रहने में खुशी मिले।
समाज के दबाव में शादी करना जरूरी नहीं
सबा पटौदी की कहानी उस सोच पर भी सवाल खड़ा करती है, जिसमें शादी के लिए एक निश्चित उम्र तय कर दी जाती है। अक्सर परिवार और समाज की तरफ से यह दबाव बनाया जाता है कि एक उम्र के बाद शादी कर लेनी चाहिए। लेकिन हर व्यक्ति के लिए परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। किसी को कम उम्र में अपना साथी मिल जाता है तो किसी को सही इंसान मिलने में ज्यादा वक्त लग सकता है। ऐसे में सिर्फ उम्र देखकर शादी का फैसला लेना हमेशा सही नहीं होता। सबा ने अपनी जिंदगी में भी यही रास्ता चुना। उन्होंने किसी रिश्ते में सिर्फ इसलिए कदम नहीं रखा कि अब शादी की उम्र निकल रही है या लोग सवाल कर रहे हैं।

गलत रिश्ते में रहने से बेहतर है अकेले रहना
सबा की बातों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अकेले रहना कोई कमी नहीं है। अगर किसी रिश्ते में खुशी, सम्मान और भरोसा नहीं है तो सिर्फ समाज की उम्मीदों को पूरा करने के लिए उस रिश्ते को निभाना जरूरी नहीं। कई बार सही व्यक्ति के आने में समय लगता है। ऐसे में जल्दबाजी में लिया गया फैसला जिंदगी को आसान बनाने के बजाय और मुश्किल कर सकता है। उनकी सोच को आज के दौर के रिश्तों से जोड़कर देखें तो यह बात काफी अहम लगती है। शादी जिंदगी का एक बड़ा फैसला है और इसे केवल उम्र, परिवार के दबाव या समाज की बातों के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए।

रिश्ते में सुकून और अपनापन सबसे जरूरी
आखिरकार किसी भी रिश्ते की खूबसूरती इस बात से तय होती है कि उसमें रहने वाले दो लोग एक-दूसरे के साथ कैसा महसूस करते हैं। ऐसा रिश्ता ज्यादा मजबूत होता है, जिसमें हर वक्त खुद को बदलने या दूसरे की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव न हो। सबा पटौदी ने शादी को लेकर अपनी जिंदगी में जो रास्ता चुना, वह हर किसी के लिए एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं। लेकिन उनकी बात एक बात जरूर याद दिलाती है शादी सिर्फ इसलिए नहीं करनी चाहिए क्योंकि उम्र हो गई है। सही इंसान, सही समझ और रिश्ते में मिलने वाला सम्मान उससे कहीं ज्यादा जरूरी है।

