साल में सिर्फ एक दिन खुलता है ये मंदिर, दर्शन मात्र से दूर होता है कालसर्प दोष!

punjabkesari.in Monday, Aug 17, 2026 - 12:23 PM (IST)

नारी डेस्क : उज्जैन स्थित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यह मंदिर साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। मंदिर में भगवान शिव माता पार्वती के साथ नागराज की शैय्या पर विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां दर्शन और पूजा करने से कालसर्प दोष से राहत मिलती है।

साल में सिर्फ एक दिन खुलता है मंदिर

श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। आमतौर पर मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और नाग पंचमी के अवसर पर केवल 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। नाग पंचमी के दिन विशेष पूजा और त्रिकाल पूजन के बाद मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इसके बाद श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकते हैं। 24 घंटे बाद कपाट दोबारा बंद कर दिए जाते हैं और अगले नाग पंचमी तक श्रद्धालुओं को इसके लिए इंतजार करना पड़ता है।

PunjabKesari

कब मनाई जा रही है नाग पंचमी?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम 4:52 बजे से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम 5 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जा रही है। नाग पंचमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर भगवान नागचंद्रेश्वर और महाकाल के दर्शन करते हैं। परंपरा के अनुसार, नाग पंचमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना के बाद रात 12 बजे श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इसके बाद मंदिर अगले 24 घंटे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है। 24 घंटे पूरे होने के बाद मंदिर के कपाट फिर बंद कर दिए जाते हैं। यही वजह है कि इस मंदिर के दर्शन के लिए नाग पंचमी के दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

यें भी पढ़ें : सोने की कलम से लिखी होती है इस मूलांक वालों की किस्मत, धन-वैभव खुद आता है इनके पास

नागराज की शैय्या पर विराजमान हैं शिव-पार्वती

श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित भगवान शिव की प्राचीन प्रतिमा है। इसमें भगवान शिव माता पार्वती के साथ नागराज की शैय्या पर विराजमान दिखाई देते हैं। साथ में भगवान गणेश भी विराजमान हैं। मान्यता है कि नागराज के 10 फनों के नीचे भगवान शिव और माता पार्वती विराजमान हैं। धार्मिक परंपरा में इसे भगवान शिव के नागराज के साथ विराजमान होने वाली बेहद दुर्लभ प्रतिमाओं में से एक माना जाता है।

PunjabKesari

कालसर्प दोष से जुड़ी है खास मान्यता

ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंडली में राहु और केतु की विशेष स्थिति को कालसर्प दोष से जोड़ा जाता है। इस दोष से राहत पाने के लिए भगवान शिव और नाग देवता की पूजा को महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन और विधि-विधान से पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति या उसके प्रभाव में कमी मिल सकती है। हालांकि, यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है, जिसका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

यें भी पढ़ें : ब्रेस्ट कैंसर के छिपे संकेत: सिर्फ गांठ नहीं, इन शुरुआती लक्षणों को भी न करें नजरअंदाज

क्या है नागचंद्रेश्वर मंदिर की पौराणिक कथा?

श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा का वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार, नागराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। इसके बाद नागराज तक्षक ने भगवान शिव से उनके सान्निध्य में रहने की इच्छा व्यक्त की। मान्यता है कि भगवान शिव ने उनकी इच्छा स्वीकार की और तभी से नागराज तक्षक महाकाल की नगरी उज्जैन में निवास करने लगे। इसी मान्यता के कारण श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन खोलने की परंपरा चली आ रही है। श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। नाग पंचमी के अवसर पर यहां दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Monika

Related News

static