राधाष्टमी पर जरूर करें ये 2 काम, राधारानी की कृपा से पूरी होगी मनोकामना
punjabkesari.in Friday, Sep 18, 2026 - 01:11 PM (IST)
नारी डेस्क : राधाष्टमी के पर्व को लेकर इस बार तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। कुछ लोग 18 सितंबर को राधाष्टमी मान रहे हैं, जबकि पंचांग के अनुसार इस साल यह पर्व 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधारानी का प्राकट्य हुआ था, इसलिए यह दिन उनकी पूजा और भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से राधारानी का स्मरण और पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने भी राधारानी को प्रसन्न करने के लिए उनकी आराधना की थी। ऐसे में जानिए राधाष्टमी पर कौन-से काम करना शुभ माना जाता है।
राधाष्टमी पर रखें व्रत
धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधाष्टमी के दिन राधारानी के लिए व्रत रखना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रख सकते हैं और दिनभर राधारानी का स्मरण, भजन-कीर्तन और पूजा कर सकते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई भक्ति मन को शांति देती है और भक्त को राधारानी के करीब महसूस कराती है।

राधारानी के 27 नामों का करें जाप
राधाष्टमी के दिन राधारानी के पवित्र नामों का जाप करने की भी विशेष धार्मिक मान्यता है। इस दिन श्रद्धालु राधारानी के 27 नामों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण कर सकते हैं। मान्यता है कि नाम स्मरण से मन में सकारात्मकता आती है और भक्त का ध्यान भगवान की भक्ति में केंद्रित होता है।
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सुनें 'राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र'
राधाष्टमी के दिन 'राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र' का पाठ या श्रवण भी श्रद्धा से किया जाता है। आप चाहें तो पूजा के बाद इसका कम से कम एक पाठ कर सकते हैं या श्रद्धापूर्वक इसका श्रवण कर सकते हैं। धार्मिक विश्वास है कि राधारानी की भक्ति और स्तोत्र का पाठ भक्त के जीवन में आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक भाव बढ़ाने में सहायक होता है।

मनोकामना के लिए करें सच्चे मन से प्रार्थना
राधाष्टमी पर पूजा के बाद राधारानी के सामने अपनी मनोकामना रखें और सच्चे मन से प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता में राधारानी को प्रेम, करुणा और भक्ति का स्वरूप माना गया है। हालांकि किसी विशेष इच्छा के निश्चित रूप से पूरा होने की गारंटी नहीं दी जा सकती, लेकिन इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा भक्त के लिए आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

