कभी नहीं होगी किडनी की बीमारी, बस पेशाब करते वक्त भूलकर भी न करें ये गलती

punjabkesari.in Saturday, Jan 10, 2026 - 10:24 AM (IST)

नारी डेस्क: आज के समय में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। बदलती जीवनशैली, गलत खानपान, तनाव और पर्याप्त पानी न पीने की आदत इसकी बड़ी वजह हैं। किडनी हमारे शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने, शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने और पानी व नमक का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। किडनी के कमजोर होने से पूरे शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है।

किडनी का मुख्य काम क्या होता है

किडनी शरीर के फिल्टर की तरह काम करती है। यह खून में मौजूद गंदगी, टॉक्सिन और अतिरिक्त तरल पदार्थ को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने, हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और शरीर के अन्य अंगों को सही ढंग से काम करने में मदद करती है। किडनी सही से काम न करे तो पेशाब से जुड़ी कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

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स्वर विज्ञान क्या है

स्वर विज्ञान एक प्राचीन भारतीय विद्या है, जिसमें बताया गया है कि हमारी सांस किस नाक से चल रही है, इसका सीधा असर शरीर के अलग-अलग अंगों पर पड़ता है। स्वर विज्ञान के अनुसार नाक से चलने वाली सांस को “स्वर” कहा जाता है और यही स्वर शरीर की ऊर्जा को नियंत्रित करता है। सही स्वर के प्रयोग से शरीर को संतुलन में रखा जा सकता है।

चंद्र नाड़ी और सूर्य नाड़ी का महत्व

स्वर विज्ञान में दो प्रमुख नाड़ियों का वर्णन मिलता है। बाईं नाक से चलने वाली सांस को चंद्र नाड़ी कहा जाता है, जो ठंडी और शांत ऊर्जा से जुड़ी होती है। वहीं दाईं नाक से चलने वाली सांस को सूर्य नाड़ी कहा जाता है, जो गर्म और तेज ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। दोनों नाड़ियों का शरीर के अलग-अलग अंगों पर अलग प्रभाव पड़ता है।

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किडनी और चंद्र नाड़ी का संबंध

स्वर विज्ञान के अनुसार किडनी का संबंध पानी और खून से होता है। चंद्र नाड़ी भी शीतल यानी ठंडी ऊर्जा से जुड़ी होती है, इसलिए इसे किडनी के लिए लाभकारी माना गया है। माना जाता है कि चंद्र नाड़ी के सक्रिय रहने से किडनी को ठंडक मिलती है और उस पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।

पेशाब करते समय क्या करना चाहिए

स्वर विज्ञान के अनुसार जब भी व्यक्ति पेशाब करने जाए, तो उसे बाईं नाक यानी चंद्र नाड़ी से सांस लेने की कोशिश करनी चाहिए। इस दौरान दाईं नाक से सांस लेने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पेशाब के समय चंद्र नाड़ी से सांस लेने से पेशाब में होने वाली जलन कम हो सकती है और किडनी को आराम मिलता है।

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कैसे पहचानें चंद्र नाड़ी सक्रिय है या नहीं

चंद्र नाड़ी की पहचान करना बहुत आसान है। इसके लिए दाईं नाक को उंगली से हल्का बंद करें और देखें कि बाईं नाक से सांस आराम से आ-जा रही है या नहीं। अगर सांस आसानी से आ रही है, तो इसका मतलब है कि चंद्र नाड़ी सक्रिय है। अगर ऐसा नहीं हो रहा, तो कुछ देर दाईं करवट लेटकर दोबारा सांस चेक करें।

किडनी खराब होने पर दिखने वाले लक्षण

जब किडनी सही से काम नहीं करती, तो सबसे पहले इसके लक्षण पेशाब में नजर आते हैं। इसमें पेशाब कम मात्रा में आना, पेशाब से बदबू आना, पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना और बार-बार पेशाब आने की समस्या शामिल है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।

जरूरी सावधानी और डॉक्टर की सलाह

यह जानकारी आयुर्वेद और स्वर विज्ञान की मान्यताओं पर आधारित है। यह किसी भी तरह से मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से किडनी से जुड़ी समस्या है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से किडनी की गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

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किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए रोज पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, संतुलित आहार लेना, ज्यादा नमक और जंक फूड से बचना और तनाव को कम करना बहुत जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी से जुड़ी कई समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।  


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Content Editor

Priya Yadav

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