Periods में Clotting क्यों होती है? महिलाओं के लिए जरूरी जानकारी!

punjabkesari.in Saturday, Jan 17, 2026 - 02:54 PM (IST)

नारी डेस्क:  महिलाओं के लिए पीरियड्स (Periods) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और यह कोई बीमारी नहीं होती। सामान्य पीरियड्स में हल्की ब्लीडिंग, थोड़ी दर्द और 3-5 दिन तक खून आना सामान्य माना जाता है। लेकिन कभी-कभी पीरियड्स में खून के थक्के (Blood Clots) बनना महिलाओं के लिए चिंता का कारण बन सकता है। यह तब होता है जब ब्लीडिंग असामान्य रूप से ज्यादा हो या खून के थक्के बड़े और जल्दी-जल्दी बनने लगें।

पीरियड्स में खून के थक्कों का आकार आमतौर पर एक चौथाई इंच से बड़ा होता है और यह हर बार कुछ अंतराल में बनता है। अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो हर 2 घंटे में पैड या टैम्पोन बदलना पड़ सकता है। अगर इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह एमरजेंसी की स्थिति भी पैदा कर सकता है।

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पीरियड्स में खून के थक्के आने के मुख्य कारण

यूटेरस में रूकावट (Uterine Obstruction): अगर यूटेरस की दीवार पर किसी वजह से अतिरिक्त दबाव पड़ता है तो ब्लीडिंग ज्यादा होने लगती है और खून के थक्के बनने लगते हैं।

फाइब्रॉइड (Fibroid): यूटेरस में नॉन-कैंसर ट्यूमर या हार्मोनल बदलाव के कारण भी खून की मात्रा बढ़ जाती है और थक्के बनते हैं। छोटे फाइब्रॉइड कम दिक्कत देते हैं, लेकिन बड़े फाइब्रॉइड से ब्लीडिंग और दर्द दोनों बढ़ सकते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis): इस स्थिति में यूटेरस की लाइन (Endometrium) यूटेरस के बाहर बनने लगती है। इससे पीरियड्स के दौरान खून के थक्के बनने लगते हैं और दर्द भी ज्यादा होता है।

एडिनोमायोसिस (Adenomyosis): जब यूटेरस लाइन खुद यूटेरस के अंदर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो पीरियड्स के दौरान खून के थक्के बनते हैं। यह स्थिति खासकर उन महिलाओं में आम है जो प्रेग्नेंसी कर चुकी हैं।

 हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance): एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का असंतुलन यूटेरस लाइन को चौड़ा कर देता है। इसके कारण ब्लीडिंग ज्यादा होती है और खून के थक्के बनते हैं।

मिसकैरिज (Miscarriage): प्रेग्नेंसी के दौरान किसी वजह से मिसकैरिज होने पर भी खून के थक्के बनते हैं।

वॉन विलेब्रांड डिसऑर्डर (Von Willebrand Disorder): यह रक्त विकार भी पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग और खून के थक्के आने का कारण बन सकता है।

पीरियड्स में खून के थक्के आने की जांच

खून के थक्के आने पर डॉक्टर सबसे पहले मेडिकल हिस्ट्री लेते हैं। इसमें वह पेल्विक सर्जरी, बर्थ कंट्रोल और प्रेग्नेंसी से जुड़ी जानकारी पूछते हैं। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर इमेजिंग टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या MRI किए जाते हैं ताकि ब्लीडिंग और थक्कों के सही कारण का पता लगाया जा सके।

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पीरियड्स में खून के थक्कों का इलाज

 हैवी ब्लीडिंग को कंट्रोल करना: सबसे पहले खून के थक्के रोकने के लिए ब्लीडिंग कम करने की दिशा में इलाज किया जाता है।

 हार्मोनल थैरेपी (Hormonal Therapy): बर्थ कंट्रोल पिल्स, IUD (Intrauterine Device) और दूसरी दवाइयों के जरिए यूटेरस लाइन की ग्रोथ कम की जाती है। यह थक्कों को रोकने और ब्लीडिंग नियंत्रित करने में मदद करता है।

 सर्जरी (Surgery): कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

Dilation and Curettage (D&C): मिसकैरिज या थक्कों को हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

Myomectomy: फाइब्रॉइड को हटाने के लिए।

Laparoscopic Surgery: छोटे फाइब्रॉइड या ब्लॉक हटाने के लिए।

Hysterectomy: गंभीर मामलों में पूरे यूटेरस को निकालना पड़ सकता है।

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कब डॉक्टर से तुरंत मिलें?

अगर खून के थक्के एक चौथाई इंच से बड़े हों। अगर पैड या टैम्पोन हर 2 घंटे में बदलना पड़े। अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो या तेज दर्द हो। समय रहते पीरियड्स में खून के थक्कों की समस्या को पहचानना और डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। इससे गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है और जीवन सामान्य रूप से चलता रहता है।  


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Content Editor

Priya Yadav

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