मिड-डे मील खाते ही बिगड़ी 60 से ज्यादा बच्चों की तबीयत, खाने में मिली थी मरी हुई छिपकली!

punjabkesari.in Sunday, Aug 09, 2026 - 12:47 PM (IST)

 नारी डेस्क:  बिहार के मधेपुरा जिले से मिड-डे मील को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। गम्हरिया प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय दाहा में शनिवार को मिड-डे मील खाने के बाद 60 से ज्यादा बच्चों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। बच्चों ने पेट में तेज दर्द और चक्कर आने की शिकायत की, जिसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गम्हरिया लेकर पहुंचे। मामले की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मच गया। बच्चों की ओर से खाने में मरी हुई छिपकली मिलने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।

खिचड़ी खाने के कुछ देर बाद बच्चों की बिगड़ी तबीयत

जानकारी के मुताबिक, शनिवार को स्कूल में बच्चों को रोज की तरह मिड-डे मील में खिचड़ी परोसी गई थी। बच्चों ने खाना खाया, लेकिन कुछ देर बाद कई छात्रों ने पेट में दर्द और चक्कर आने की शिकायत शुरू कर दी। बच्चों की हालत देखकर अभिभावकों को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद परिजन अपने बच्चों को लेकर गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों के अस्पताल पहुंचने से वहां भी स्थिति को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई। बताया जा रहा है कि इलाज के बाद बच्चों की हालत अब ठीक है और फिलहाल किसी बच्चे की स्थिति गंभीर होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

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बच्चों ने लगाया खिचड़ी में मरी छिपकली मिलने का आरोप

इस घटना को लेकर स्कूल के कुछ बच्चों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस खिचड़ी को उन्हें खाने के लिए दिया गया था, उसमें मरी हुई छिपकली दिखाई दी थी। बच्चों के मुताबिक, उन्होंने इसकी जानकारी स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका और रसोइया को भी दी। आरोप है कि खाने में छिपकली मिलने की बात सामने आने के बाद बची हुई खिचड़ी को फेंक दिया गया और स्कूल में छुट्टी कर दी गई। घटना के बाद बच्चों और उनके अभिभावकों में मिड-डे मील की गुणवत्ता और स्कूल में भोजन तैयार करने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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शिक्षा विभाग ने लिया मामले का संज्ञान

मामले की जानकारी शिक्षा विभाग तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डीपीओ एमडीएम रवि शास्त्री ने कहा है कि विद्यालय में हुई घटना की जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर विभागीय जांच पर है, जिससे यह पता चल सकेगा कि आखिर बच्चों को परोसे गए भोजन में क्या गड़बड़ी हुई थी और बच्चों की तबीयत बिगड़ने की वजह क्या रही।

मिड-डे मील की व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मिड-डे मील योजना चलाई जाती है। लेकिन समय-समय पर भोजन की गुणवत्ता और उसे तैयार करने के तरीके को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बिहार ही नहीं, देश के दूसरे राज्यों से भी कई बार मिड-डे मील में लापरवाही की शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं खाने में कीड़े-मकौड़े मिलने की बात सामने आती है तो कहीं बच्चों को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिलने के आरोप लगते हैं। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें बच्चों की थाली में सब्जी के नाम पर महज एक-दो टुकड़े आलू और काफी मात्रा में पानी जैसा पदार्थ दिखाई देता है। हालांकि, ऐसे वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में नहीं हो पाती है।

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बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

मधेपुरा की इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच आखिर कितनी गंभीरता से की जाती है। अगर खाने में वास्तव में मरी हुई छिपकली मिली थी, तो यह बच्चों की सुरक्षा और भोजन तैयार करने की व्यवस्था में बेहद गंभीर चूक मानी जाएगी।

फिलहाल बच्चों की तबीयत में सुधार बताया जा रहा है, लेकिन घटना के बाद अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि मिड-डे मील तैयार करने और बच्चों तक पहुंचाने के दौरान आखिर ऐसी लापरवाही कैसे हुई। विभागीय जांच के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।  


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Content Editor

Priya Yadav

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