Navratri के चौथे दिन मां कूष्मांडा को ऐसे करें प्रसन्न, जानें पूजा विधि और मंत्र
punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2026 - 02:49 PM (IST)
नारी डेस्क : चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत हो चुकी है। 22 मार्च को नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप, देवी कूष्मांडा की पूजा की जाएगी। मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से सृष्टि की रचना की थी और इनके आशीर्वाद से सेहत, ऊर्जा और समृद्धि प्राप्त होती है। आइए जानते हैं इस दिन मां कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती, रंग महत्व और व्रत कथा के बारे में।
मां कूष्मांडा व्रत पूजा विधि (Maa Kushmanda Puja Vidhi)
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को समर्पित पूजन करने के लिए सुबह उठकर स्नान करें और हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम करें। इसके बाद व्रत और पूजन का संकल्प लें और मां कूष्मांडा सहित सभी देवियों की पूजा करें। पूजा के दौरान माता रानी की कथा सुनें, मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती उतारकर माता के प्रिय भोग का प्रसाद वितरित करें।

कूष्मांडा देवी के मंत्र (Maa Kushmanda Mantra)
मुख्य मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः
बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः
स्तुति मंत्र
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्मांडा यशस्वनीम्॥
मंत्र का 108 बार जाप करने से अधिक लाभकारी माना जाता है।

कूष्मांडा देवी का प्रिय भोग (Maa Kushmanda Bhog)
मां कूष्मांडा को हरे रंग के फल बहुत प्रिय हैं। जैसे हरे केले, अंगूर और शरीफ फल। इसके अलावा माता को मालपूए का भोग भी अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि माता को उनके पसंद का भोग लगाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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मां कूष्मांडा का प्रिय रंग
मां कूष्मांडा को पीला, नारंगी और हरा रंग प्रिय हैं। यह रंग ऊर्जा, प्रसन्नता और गति के प्रतीक माने जाते हैं। नवरात्रि के चौथे दिन इन रंगों के वस्त्र पहनना शुभ होता है।

मां कूष्मांडा व्रत कथा
देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा अपनी मंद, हल्की मुस्कान के द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने की वजह से इस देवी को कूष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, हर ओर अंधकार ही अंधकार था, तब देवी कूष्मांडा ने अपने मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसी वजह से इन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा के नाम से भी जाना जाता है। मां कूष्मांडा देवी की 8 भुजाएं हैं, जिस वजह से उन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है. माता के सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। मां का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े (कद्दू) की बलि प्रिय है। मां कूष्मांडा का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की असीम शक्ति और क्षमता मां कूष्मांडा में ही है। इसी वजह से इनके शरीर में कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यामन है।

