पेट खराब  तो दिमाग भी खराब…  Mood  बिगड़ने पर क्यों शुरु हो जाती है Stomach Problems ?

punjabkesari.in Monday, Sep 21, 2026 - 05:13 PM (IST)

नारी डेस्क: क्या आपने कभी घबराहट या उत्साह के समय पेट में अजीब सी हलचल या मरोड़ महसूस की है? जब आप सोचते हैं कि इन भावनाओं की वजह क्या थी, तो यह बात समझ में आती है कि आपका दिमाग और आपका पेट किसी न किसी तरह से जुड़े हुए हैं। इस बात से बहुत लोग अनजान हैं कि हमारा दिमाग और पेट हर समय एक-दूसरे से संपर्क में रहते हैं और इसी वजह से तनाव, एंग्जायटी (बेचैनी) और दूसरी तेज़ भावनाओं के कारण पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:दस्त , पेट फूलना, पेट में ऐंठन और जी मिचलाना। 

जी मिचलाना (Nausea)

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दिमाग और आंतों के बीच क्या है कनेक्शन

एक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने समझाया कि हर किसी को यह पता होना चाहिए कि एक हेल्दी लाइफस्टाइल कैसे दिमाग और आंतों के कनेक्शन को बेहतर बना सकती है। दिमाग और आंतें नसों, हार्मोन और आंतों के बैक्टीरिया के ज़रिए जुड़े होते हैं। आपके पाचन तंत्र में करोड़ों नर्व सेल्स (न्यूरॉन्स) होते हैं। यह एंटरिक नर्वस सिस्टम (ENS), जो पाचन के कामों को कंट्रोल करता है, वेगस नर्व (vagus nerve) नाम की एक बड़ी नस के ज़रिए आपके दिमाग से बातचीत कर सकता है। दिमाग की तरह ही, आंतें भी सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर बनाती हैं। ये केमिकल मैसेंजर नर्व सेल्स को एक-दूसरे से बातचीत करने और पाचन को रेगुलेट करने में मदद करते हैं। ये आपके मूड पर भी असर डाल सकते हैं। आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया  जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहा जाता है  सिर्फ़ पाचन में ही मदद नहीं करते; वे इन न्यूरोट्रांसमीटर को बनाने और आपके मूड को रेगुलेट करने में भी भूमिका निभाते हैं।


आंतों को कैसे परेशान करता है तनाव? 

आपके दिमाग और आंतों के बीच का कनेक्शन कुछ ज़रूरी काम करता है, जैसे आपके दिमाग को यह बताना कि आपको भूख लगी है या पेट भर गया है। लेकिन यह आपके मूड और तनाव के लेवल को आपके पाचन पर असर डालने की भी इजाज़त देता है। तनाव और एंग्जायटी दिमाग के 'फाइट-ऑर-फ्लाइट' (लड़ो या भागो) रिस्पॉन्स को ट्रिगर करते हैं। यह रिस्पॉन्स आपके पूरे शरीर को किसी खतरे का सामना करने के लिए तैयार करता है, जिससे सिस्टम में ऐसे हार्मोन भर जाते हैं जिनकी वजह से खाना पाचन तंत्र से बहुत तेज़ी से या बहुत धीरे-धीरे गुज़र सकता है। इससे  दस्त या कब्ज़, या जी मिचलाना या दर्द भी हो सकता है। यह प्रोसेस मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन पैदा कर सकता है और आपकी आंतों के लिए खाने से न्यूट्रिएंट्स को पचाना और सोखना मुश्किल बना सकता है। और तनाव गट माइक्रोबायोम को भी बिगाड़ सकता है।


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पेट भी दिमाग पर डालता है असर

क्योंकि आपका दिमाग और पेट एक-दूसरे को सिग्नल भेजते रहते हैं, इसलिए आपका पेट भी आपके दिमाग पर असर डाल सकता है। अगर आपका पेट स्वस्थ नहीं है, तो यह दिमाग को जो सिग्नल भेजता है, उससे आपका मूड खराब हो सकता है और तनाव हो सकता है। और यह तनाव आपकी पाचन संबंधी समस्याओं को और बढ़ा सकता है। तनाव पेट में बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे डिप्रेशन, एंग्जायटी और पाचन संबंधी लक्षण शुरू हो सकते हैं। इस चक्र से बाहर निकलने के लिए, फल, सब्ज़ियां और साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार लें। फाइबर और प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ, जैसे दही, को शामिल करने से पेट के बैक्टीरिया का स्वस्थ संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।


तनाव को मैनेज करने के तरीके

- व्यायाम से आपका मूड अच्छा होता है और तनाव कम होता है। ऐसी गतिविधियां चुनें जिनमें आपको मज़ा आता हो।
-हर रात 7 से 9 घंटे सोने की कोशिश करें। अपने बेडरूम को आरामदायक और शांत रखें।
-गहरी सांस लेना आराम करने का एक तरीका है। अपनी आखें बंद करें और कई बार गहरी सांस लें - नाक से अंदर और मुंह से बाहर।
- हर दिन कुछ ऐसा करें जिससे आपको खुशी मिले, चाहे वह किसी हॉबी में समय बिताना हो या संगीत सुनना हो।
- ताज़ी हवा और प्रकृति मूड को बेहतर बना सकते हैं और आपके माइक्रोबायोम (पेट के बैक्टीरिया) में विविधता ला सकते हैं।
 


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vasudha

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