पैदा होते ही जा रही लाखों बच्चों की जान, डिलीवरी के समय एक गलती और हो जाता जानलेवा इंफेक्शन

punjabkesari.in Thursday, Aug 28, 2025 - 08:31 PM (IST)

नारी डेस्क : नवजात शिशुओं में निमोनिया एक गंभीर और जीवन-घातक बीमारी मानी जाती है। यह समस्या जन्म के समय या जन्म के कुछ दिनों बाद ही हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल लाखों बच्चों की मौत निमोनिया से होती है, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या नवजात और 5 साल से कम उम्र के बच्चों की होती है। भारत सहित विकासशील देशों में इसकी दर और भी ज्यादा है। आइए जानते हैं जन्म के समय बच्चों को निमोनिया होने के कारण, लक्षण और इससे बचाव के तरीके।

जन्म के समय क्यों होता है निमोनिया?

नवजात शिशुओं में निमोनिया की सबसे बड़ी वजह उनका कमजोर इम्यून सिस्टम और अधूरे विकसित फेफड़े होते हैं। जन्म के शुरुआती दिनों में अगर बच्चा किसी संक्रमण के संपर्क में आ जाए, तो यह सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर सांस लेने में दिक्कत और गंभीर निमोनिया का कारण बन सकता है।

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संक्रमण का खतरा प्रसव के दौरान

अक्सर नवजात शिशुओं में निमोनिया का खतरा प्रसव के दौरान मां से संक्रमण के कारण भी बढ़ जाता है। अगर गर्भवती महिला को डिलीवरी से पहले किसी तरह का संक्रमण हो, जैसे कि योनि संक्रमण, मूत्र संक्रमण या गर्भाशय से जुड़ी कोई समस्या, तो जन्म के समय यह संक्रमण बच्चे तक पहुंच सकता है। कई बार यह बैक्टीरिया या वायरस सीधे शिशु के फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और जन्म के तुरंत बाद बच्चे को सांस लेने में कठिनाई या निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान मां की नियमित जांच और समय पर इलाज बेहद जरूरी माना जाता है।

अस्वच्छ डिलीवरी (Unhygienic Delivery)

यदि बच्चे का जन्म अस्वच्छ वातावरण में हो, जैसे अस्पताल या घर में साफ-सफाई का सही ध्यान न रखा गया हो, तो नवजात शिशु आसानी से संक्रमण का शिकार हो सकता है। जन्म के समय इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण या हाथों की गंदगी भी बैक्टीरिया और वायरस फैलाने का कारण बन सकती है। यह संक्रमण शिशु के फेफड़ों तक पहुंचकर निमोनिया का रूप ले सकता है। इसलिए डिलीवरी हमेशा स्वच्छ माहौल और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख में कराना चाहिए।

समय से पहले जन्म (Premature baby)

जो बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं, उनके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते। ऐसे बच्चों में सांस लेने की क्षमता सामान्य बच्चों की तुलना में कम होती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर रहती है। यही कारण है कि प्रीमैच्योर शिशु में सांस की तकलीफ और निमोनिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इन बच्चों को जन्म के बाद विशेष देखभाल और डॉक्टर की लगातार निगरानी की जरूरत होती है।

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कमजोर इम्यूनिटी (Weak immunity)

नवजात शिशु का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) जन्म के शुरुआती दिनों में बहुत कमजोर होता है। अगर बच्चे को जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) नहीं मिलता, तो उसकी रोग प्रतिरोधक शक्ति और भी कम हो जाती है। ऐसे में बच्चा बाहरी वातावरण से आने वाले बैक्टीरिया और वायरस का सामना नहीं कर पाता और निमोनिया जैसी बीमारियों की चपेट में आ जाता है।

नवजात में निमोनिया के लक्षण (Symptoms of Pneumonia)

नवजात शिशुओं में निमोनिया की पहचान करना कई बार मुश्किल हो जाता है, क्योंकि वे अपने दर्द या परेशानी को बोलकर नहीं बता सकते। लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें देखकर माता-पिता को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। यदि बच्चे को बार-बार या लगातार तेज बुखार आता है, बार-बार खांसी होती है या सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, तो यह निमोनिया का संकेत हो सकता है। कई बार बच्चे की सांस बहुत तेज हो जाती है और छाती धंसने लगती है। इसके अलावा, बच्चा दूध पीने से इंकार कर देता है या बहुत कम खाता है। गंभीर स्थिति में शरीर ठंडा पड़ने लगता है या नीला पड़ने लगता है, जो इस बात का संकेत है कि शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो रही है। इन लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि देर होने पर यह स्थिति बच्चे की जान तक ले सकती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।

बचाव के तरीके

मां का पहला दूध (Colostrum) : जन्म के तुरंत बाद बच्चे को मां का पहला दूध जरूर पिलाएं, यह बच्चे की इम्यूनिटी मजबूत करता है।

गर्भवती महिला की नियमित जांच : गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराना जरूरी है।

साफ-सुथरा माहौल : बच्चे के जन्म के समय डिलीवरी रूम और आसपास का माहौल पूरी तरह स्वच्छ होना चाहिए।

समय पर टीकाकरण : नवजात और छोटे बच्चों को BCG, Hib और Pneumococcal जैसी वैक्सीन समय पर दिलवाना चाहिए।

घर और आसपास सफाई : बच्चे को धूल, धुएं और प्रदूषण से बचाकर रखें।

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डॉक्टर की सलाह पर उपचार : अगर बच्चा बार-बार बीमार हो या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

नवजात शिशुओं में निमोनिया एक खतरनाक बीमारी है जो अगर समय पर पहचान और इलाज न मिले तो जानलेवा बन सकती है। हर साल लाखों मासूम इस संक्रमण से अपनी जान गंवा देते हैं। लेकिन गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म और उसके बाद तक सही देखभाल, साफ-सफाई, स्तनपान और समय पर टीकाकरण से इस बीमारी से बचाव संभव है।
 


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Content Writer

Vandana

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