Mahashivratri पर चार प्रहर पूजा नहीं कर पा रहे हैं तो एक समय में जरूर करें पूजा
punjabkesari.in Sunday, Feb 15, 2026 - 05:49 PM (IST)
नारी डेस्क : भगवान भगवान शिव की आराधना के लिए महाशिवरात्रि का पर्व सबसे पावन और फलदायी माना जाता है। आज 15 फरवरी 2026 को पूरे देश में शिवभक्ति का विशेष माहौल है। मंदिरों में हर-हर महादेव के जयकारों के बीच भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। महाशिवरात्रि पर रात्रि में चार प्रहर पूजा का विशेष विधान बताया गया है। मान्यता है कि जो भक्त पूरे विधि-विधान से चारों प्रहर शिव पूजन करता है, उसे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन आज की व्यस्त जीवनशैली में कई लोग समय के अभाव के कारण चारों प्रहर की पूजा नहीं कर पाते। ऐसे भक्तों के लिए भी शास्त्रों में एक अत्यंत शुभ समय बताया गया है, जिसमें पूजा करने से पूर्ण फल प्राप्त होता है।
निशिता काल: महाशिवरात्रि का सबसे शुभ समय
महाशिवरात्रि की पूजा के लिए निशिता काल को सबसे श्रेष्ठ और प्रभावशाली माना गया है।
2026 में निशिता काल का समय:
रात 12:09 बजे से 01:01 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह पावन समय है जब भगवान शिव निराकार से साकार रूप में प्रकट हुए थे।
इसी कारण इस समय की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है।

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पौराणिक मान्यता क्या कहती है?
पुराणों के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात्रि में निशिता काल के दौरान भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था।
इस समय शिव आराधना करने से:
मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
जीवन के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं
मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है
यही कारण है कि जो भक्त चार प्रहर पूजा नहीं कर पाते, उनके लिए निशिता काल की पूजा ही पर्याप्त मानी गई है।

महाशिवरात्रि 2026: चार प्रहर पूजा का समय
जो भक्त चार प्रहर पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए समय इस प्रकार है।
पहला प्रहर: शाम 06:11 से 09:23
दूसरा प्रहर: रात 09:35 से 12:35
तीसरा प्रहर: रात 12:35 से सुबह 03:47
चौथा प्रहर: 16 फरवरी, सुबह 03:47 से 06:59
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अगर आप महाशिवरात्रि पर पूरे चार प्रहर पूजा नहीं कर पा रहे हैं, तो निराश न हों।
निशिता काल में सच्चे मन से की गई शिव पूजा भी आपको संपूर्ण फल प्रदान कर सकती है।
बस श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ भगवान शिव का स्मरण करें भोलेनाथ अवश्य प्रसन्न होंगे।

