CJP प्रोटेस्ट में लड़कियों की पिटाई के आरोपों पर भड़कीं कुनिका ,कहा- ‘ऐसे पढ़ेंगी बेटियां?’

punjabkesari.in Wednesday, Oct 14, 2026 - 01:33 PM (IST)

नारी डेस्क:  बॉलीवुड एक्ट्रेस और ‘बिग बॉस 19’ फेम कुनिका सदानंद एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने CJP प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं के साथ कथित मारपीट और हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर सरकार से सवाल किए हैं। कुनिका ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर बीजेपी सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बेटियों की सुरक्षा, युवाओं की आवाज और वोट से जुड़े सवालों को उठाते हुए पूछा कि जब लोग अपने अधिकारों को लेकर सवाल करते हैं, तो उन्हें हिरासत में क्यों लिया जाता है?

कुनिका सदानंद ने वीडियो शेयर कर उठाए सवाल

कुनिका सदानंद ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें वह CJP प्रोटेस्ट से जुड़े घटनाक्रम पर अपनी बात रखती नजर आ रही हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। वीडियो में कुनिका कहती हैं कि जब लोग वोट और इलेक्टोरल रोल्स यानी मतदाता सूची को लेकर सवाल पूछते हैं, तो उन्हें जवाब देने के बजाय हिरासत में क्यों लिया जाता है? उन्होंने प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं के साथ मारपीट के आरोपों पर भी नाराजगी जताई और पूछा कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। कुनिका ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को हिरासत में लेते समय उनके साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है, इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने अभिजीत, सौरभ और आशुतोष को विमान से हिरासत में लिए जाने का जिक्र करते हुए सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या स्थिति थी, जिसके कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया।

‘भरोसा मांगने वालों को डराकर भरोसा कैसे बनेगा?’

कुनिका ने अपने वीडियो में बीजेपी सरकार को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों से भरोसा मांगने के साथ उनकी बात सुनना भी जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि अगर नागरिकों को डराया जाएगा और उनकी आवाज दबाई जाएगी, तो सरकार पर उनका भरोसा कैसे कायम रहेगा? एक्ट्रेस ने जंतर-मंतर से जुड़े घटनाक्रम के साथ सड़कों और मेट्रो सेवाओं पर लगी पाबंदियों का भी जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या उतनी ही तत्परता दिखाई जाती है, जितनी प्रदर्शन रोकने के लिए दिखाई गई? कुनिका ने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सवाल पूछना गलत नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है, तो उसे अपने सवालों के जवाब मांगने का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए? अपने बयान में उन्होंने देश में मौजूदा हालात की तुलना इमरजेंसी से भी की और कहा कि उन्हें मौजूदा स्थिति इमरजेंसी से भी बदतर लग रही है।

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‘बेटियों के सम्मान की बात करते हैं, लेकिन हो क्या रहा है?’

कुनिका सदानंद ने अपने वीडियो में बेटियों की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा भी उठाया। नवरात्रि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ बेटियों का सम्मान करने और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की बात की जाती है, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान लड़कियों के साथ कथित मारपीट की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सवाल किया कि क्या उन्होंने इस घटना से जुड़े वीडियो देखे हैं? कुनिका ने कहा कि केवल लड़कियां ही नहीं, बल्कि लड़कों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार हो रहा है। उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर बिना पुलिस की वर्दी में पहुंचे लोगों की मौजूदगी और हंगामे का जिक्र करते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। एक्ट्रेस ने कहा कि बेटियों के सम्मान की बात तभी सार्थक होगी, जब उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। वीडियो के आखिर में उन्होंने कहा कि जनता जागरूक हो रही है और जब युवा अपने अधिकारों को लेकर जागते हैं, तो सत्ता पर भी इसका असर पड़ता है। उन्होंने ‘जय हिंद’ और ‘जय संविधान’ के नारे के साथ अपनी बात खत्म की।

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सोशल मीडिया पोस्ट में भी सरकार से पूछे सवाल

कुनिका सदानंद ने वीडियो के साथ लिखे कैप्शन में भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वोट मांगने की बात आती है, तब जनता को मालिक कहा जाता है, लेकिन वही जनता सवाल पूछे तो उसे मुजरिम की तरह क्यों देखा जाता है? उन्होंने लिखा कि हर नागरिक का वोट गिना जाए, इस मांग से डरने की क्या वजह है? शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को हिरासत में क्यों लिया जा रहा है? कुनिका ने कहा कि जब सवाल वोट से जुड़ा है, तो उसका जवाब भी वोट के मुद्दे पर दिया जाना चाहिए, न कि लोगों की आवाज दबाकर।

कुनिका सदानंद का यह वीडियो अब उनके बयान और सरकार पर उठाए गए सवालों को लेकर चर्चा में है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान मारपीट और पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना उन्हें आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
 

 

 


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Content Editor

Priya Yadav

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