Karwa Chauth 2026: सोलह श्रृंगार में कौन-कौन सी चीजें होती हैं शामिल?

punjabkesari.in Monday, Oct 26, 2026 - 05:15 PM (IST)

नारी डेस्क:  करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं व्रत रखने के साथ-साथ सजने-संवरने और सोलह श्रृंगार करने का भी विशेष ध्यान रखती हैं। लाल जोड़ा, हाथों में मेहंदी, मांग में सिंदूर, चूड़ियां और माथे पर बिंदी उनके पारंपरिक लुक को खास बनाते हैं।हिंदू परंपराओं में सोलह श्रृंगार को सुंदरता, सौभाग्य और वैवाहिक जीवन से जोड़कर देखा जाता है। कई महिलाएं करवा चौथ की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने से पहले सोलह श्रृंगार करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोलह श्रृंगार में कौन-कौन सी चीजें शामिल होती हैं और इनका क्या महत्व है? आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या होता है सोलह श्रृंगार और क्यों माना जाता है खास?

सोलह श्रृंगार का मतलब है सजने-संवरने की 16 पारंपरिक वस्तुएं, जिनमें मेकअप, कपड़े, आभूषण और बालों को सजाने वाली चीजें शामिल होती हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार इनकी सूची में थोड़ा अंतर हो सकता है।धार्मिक मान्यताओं में सोलह श्रृंगार को माता पार्वती से भी जोड़ा जाता है। माता पार्वती को प्रेम, सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से कई सुहागिन महिलाएं त्योहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर सोलह श्रृंगार करना शुभ मानती हैं। करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार केवल सुंदर दिखने का तरीका नहीं, बल्कि कई महिलाओं के लिए आस्था, परंपरा और अपने वैवाहिक रिश्ते के प्रति प्रेम जताने का एक खास माध्यम भी है।

सोलह श्रृंगार में शामिल हैं ये 16 चीजें

 सिंदूर

सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपनी मांग में सिंदूर लगाती हैं। करवा चौथ पर भी कई महिलाएं पूजा से पहले सिंदूर लगाकर अपना श्रृंगार पूरा करती हैं। हिंदू परंपराओं में इसे वैवाहिक जीवन और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है।

बिंदी

माथे पर लगाई जाने वाली बिंदी महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का अहम हिस्सा है। लाल बिंदी को कई परंपराओं में शुभता का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं अपनी साड़ी, सूट या लहंगे के रंग के हिसाब से बिंदी चुनती हैं। छोटी हो या बड़ी, बिंदी चेहरे के लुक को अलग अंदाज देती है।

काजल

काजल आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाया जाता है। इससे आंखें अधिक उभरी हुई और आकर्षक दिखाई देती हैं। पारंपरिक मान्यताओं में काजल को बुरी नजर से बचाने से भी जोड़ा जाता रहा है। पहले घरों में काजल बनाने के पारंपरिक तरीके प्रचलित थे, लेकिन आंखों की सुरक्षा के लिए आज साफ-सुथरे और आंखों के लिए सुरक्षित उत्पादों का इस्तेमाल करना जरूरी है।

 मेहंदी

करवा चौथ पर मेहंदी लगाने का खास महत्व माना जाता है। महिलाएं हाथों और कभी-कभी पैरों पर भी खूबसूरत डिजाइन बनवाती हैं। किसी को बारीक बेल-बूटे पसंद आते हैं, तो कोई भरे हुए डिजाइन बनवाना पसंद करती है। मेहंदी को प्रेम, खुशी और शुभ अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। त्योहार से पहले मेहंदी लगवाना महिलाओं की तैयारियों का खास हिस्सा होता है।

  चूड़ियां

चूड़ियां सुहागिन महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार में खास जगह रखती हैं। लाल, हरी, सुनहरी और रंग-बिरंगी चूड़ियां त्योहारों पर खूब पसंद की जाती हैं। कई समुदायों में चूड़ियों को सुहाग और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं अपने कपड़ों के रंग और डिजाइन के अनुसार चूड़ियां पहनकर हाथों का श्रृंगार करती हैं।

 मंगलसूत्र

मंगलसूत्र विवाहित महिलाओं के लिए विवाह के बंधन का प्रतीक माना जाता है। इसे आमतौर पर काले मोतियों और सोने से तैयार किया जाता है, हालांकि इसके डिजाइन अलग-अलग हो सकते हैं। कई महिलाएं रोजाना मंगलसूत्र पहनती हैं, जबकि कुछ इसे विशेष अवसरों पर पहनना पसंद करती हैं। करवा चौथ पर भी मंगलसूत्र पारंपरिक श्रृंगार का अहम हिस्सा होता है।

 मांग टीका

मांग टीका बालों की मांग में पहना जाता है और इसका लटकने वाला हिस्सा माथे पर रहता है। यह खासतौर पर दुल्हन के श्रृंगार और पारंपरिक त्योहारों के लुक में पसंद किया जाता है। सोने, कुंदन, मोती और पोल्की डिजाइन वाले मांग टीके पारंपरिक कपड़ों के साथ खूबसूरत लगते हैं। इसे पहनने से पूरे चेहरे का लुक निखरकर आता है।

  नथ

नाक में पहनी जाने वाली नथ महिलाओं के पारंपरिक आभूषणों में से एक है। कहीं बड़ी गोल नथ पसंद की जाती है, तो कहीं छोटी और हल्की नोज रिंग पहनी जाती है। इसका डिजाइन अलग-अलग राज्यों और समुदायों में बदलता रहता है। खासतौर पर दुल्हन के श्रृंगार में नथ का अपना अलग महत्व है। करवा चौथ पर भी महिलाएं अपने पहनावे के अनुसार इसे चुन सकती हैं।

 झुमके

झुमके कानों की खूबसूरती बढ़ाने वाले आभूषण हैं। सोने, चांदी, कुंदन, पोल्की और मोतियों से बने झुमके पारंपरिक कपड़ों के साथ खूब जंचते हैं। अगर आपने भारी लहंगा या साड़ी पहनी है, तो बड़े झुमके आपके लुक को खास बना सकते हैं। वहीं, हल्के कपड़ों के साथ छोटे और सिंपल ईयररिंग्स भी अच्छे लगते हैं।

 हार

हार सोलह श्रृंगार में शामिल प्रमुख आभूषणों में से एक है। महिलाएं अपनी पसंद और कपड़ों के हिसाब से सोने, मोती, कुंदन या पोल्की का हार पहनती हैं। कोई हैवी नेकलेस पसंद करता है, तो किसी को हल्का और सादा डिजाइन अच्छा लगता है। करवा चौथ पर हार पहनने से पारंपरिक लुक और आकर्षक बन सकता है।

 बाजूबंद

बाजूबंद बांह के ऊपरी हिस्से में पहना जाने वाला आभूषण है। पुराने समय से ही इसे पारंपरिक और दुल्हन के श्रृंगार में जगह मिलती रही है। सोने, कुंदन और दूसरे सजावटी डिजाइनों में मिलने वाला बाजूबंद खासतौर पर लहंगे या पारंपरिक साड़ी के साथ अच्छा लगता है। हालांकि, आजकल इसे पहनना हर महिला के लिए जरूरी नहीं है।

 कमरबंद

कमरबंद कमर पर पहना जाने वाला पारंपरिक आभूषण है। इसे साड़ी या लहंगे के साथ पहनने से पारंपरिक लुक और निखर जाता है। पहले सोने और चांदी के कमरबंद का चलन था, जबकि आजकल हल्के और फैशनेबल डिजाइन भी पसंद किए जाते हैं। दुल्हन के श्रृंगार में इसका इस्तेमाल खासतौर पर देखने को मिलता है।

  पायल

पायल पैरों में पहनी जाती है और आमतौर पर चांदी से बनाई जाती है। इसमें छोटी-छोटी घंटियां भी लगी हो सकती हैं, जिनसे चलने पर मधुर आवाज आती है। कई भारतीय परंपराओं में पायल को महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का जरूरी हिस्सा माना जाता है। करवा चौथ पर साड़ी या लहंगे के साथ पायल पहनने से पैरों का श्रृंगार भी पूरा हो जाता है।

 बिछिया

बिछिया पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली अंगूठी है। कई भारतीय समुदायों में इसे विवाहित महिलाओं के सुहाग से जोड़कर देखा जाता है। आमतौर पर चांदी की बिछिया पहनी जाती है और इसके डिजाइन भी अलग-अलग होते हैं। कुछ महिलाएं इसे रोजाना पहनती हैं, जबकि कुछ खास अवसरों पर अपने पारंपरिक श्रृंगार के साथ शामिल करती हैं।

 गजरा

गजरा ताजे फूलों, खासकर चमेली के फूलों से बनाया जाता है। महिलाएं इसे जूड़े या बालों में लगाती हैं। फूलों की खुशबू और खूबसूरती पारंपरिक लुक को खास बना देती है। करवा चौथ पर साड़ी या लहंगे के साथ गजरा लगाने से श्रृंगार में एक अलग ही नजाकत आ जाती है।

 आलता

आलता लाल रंग का तरल पदार्थ होता है, जिसे कुछ क्षेत्रों में हाथों और पैरों पर सजावट के लिए लगाया जाता है। खासतौर पर पूर्वी भारत की कई परंपराओं में इसका इस्तेमाल देखने को मिलता है। पैरों पर आलता लगाने से पारंपरिक श्रृंगार में लाल रंग की खूबसूरत झलक आती है। त्योहारों और शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर महिलाएं इसे लगाना पसंद करती हैं।

करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार करने का क्या है महत्व?

करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार करने की परंपरा को कई महिलाएं सौभाग्य, प्रेम और वैवाहिक जीवन की खुशहाली से जोड़कर देखती हैं। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। पूजा के समय पारंपरिक कपड़े पहनना और सजना-संवरना उनके लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव भी रखता है। हालांकि, सोलह श्रृंगार की सभी 16 चीजें पहनना हर महिला के लिए जरूरी नहीं है। यह व्यक्तिगत पसंद, परिवार की परंपरा और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों पर निर्भर करता है। कोई महिला पूरे सोलह श्रृंगार करती है, तो कोई सिंदूर, बिंदी, चूड़ियों और मंगलसूत्र जैसे कुछ पारंपरिक आभूषणों के साथ अपना श्रृंगार पूरा करती है।

इसलिए करवा चौथ पर सबसे जरूरी है कि आप अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार तैयार हों और त्योहार को खुशी और श्रद्धा के साथ मनाएं।  


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Content Editor

Priya Yadav

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