जितिया व्रत का पारण कब और कैसे करें, नोट कर लें शुभ समय और पूजा विधि
punjabkesari.in Saturday, Oct 03, 2026 - 06:18 PM (IST)
नारी डेस्क : जितिया व्रत का पारण कब और कैसे करें? यह सवाल उन महिलाओं के मन में है, जिन्होंने अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से निर्जला व्रत रखा है। जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत को कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। 2026 में मुख्य जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जा रहा है और इसका पारण 4 अक्टूबर, रविवार को किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत में माताएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा कर अपनी संतान की लंबी आयु और मंगल की कामना करती हैं। आइए जानते हैं जितिया व्रत के पारण का समय, विधि और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
जितिया व्रत का पारण कब होगा?
2026 में जितिया का मुख्य निर्जला व्रत 3 अक्टूबर को रखा जा रहा है। अगले दिन यानी 4 अक्टूबर को व्रत का पारण होगा। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार अष्टमी तिथि 4 अक्टूबर की सुबह तक रहती है और इसके बाद पारण का समय आता है। कई पंचांग आधारित रिपोर्टों में सुबह 7:28 बजे के बाद पारण का समय बताया गया है।

जितिया व्रत का पारण कैसे करें?
पारण के दिन सुबह उठकर स्नान करें और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद भगवान जीमूतवाहन और अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं और पूजा-अर्चना करें। इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान को फल, फूल और प्रसाद अर्पित करें। कई स्थानों पर पारण से पहले सूर्यदेव को अर्घ्य देने की भी परंपरा है। पूजा पूरी करने के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है।
पारण के समय इन बातों का रखें ध्यान
सबसे पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए पारण समय का ध्यान रखें।
पूजा और इष्टदेव का स्मरण करने के बाद ही व्रत खोलें।
कई परिवारों में पहले जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है।
लंबे निर्जला व्रत के बाद अचानक बहुत ज्यादा या भारी भोजन करने से बचें।
शुरुआत में पानी, फल या हल्के और सात्विक भोजन से व्रत खोलना बेहतर माना जाता है।
भोजन को लेकर अपने परिवार की पारंपरिक मान्यताओं का पालन कर सकती हैं।

पारण के दिन सात्विकता का रखें ध्यान
जितिया व्रत का पारण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस दिन घर की साफ-सफाई, पूजा-पाठ और सात्विक भोजन का विशेष ध्यान रखा जाता है। कई क्षेत्रों में पारण के भोजन को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं। कुछ जगहों पर नोनी का साग और अन्य पारंपरिक व्यंजन खाने की परंपरा भी देखने को मिलती है।
जितिया व्रत का क्या है महत्व?
जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान जीमूतवाहन की पूजा और व्रत कथा का श्रवण किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत कुछ अन्य क्षेत्रों में प्रचलित है। ध्यान रखें कि व्रत और पारण की विधियां अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ भिन्न हो सकती हैं। इसलिए किसी विशेष परंपरा का पालन करने वाली महिलाएं अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक रीति के अनुसार पारण करें।

