Negative News सुन कर कहीं आपका बच्चा तो नहीं हो रहा Upset ? उसके मूड पर रखें नजर
punjabkesari.in Monday, May 04, 2026 - 03:23 PM (IST)
नारी डेस्क: जब हर तरफ से आतंकवादी हमले और हिंसा की खबरें समाचारों की सुर्खियों, सोशल मीडिया और चिंतित वयस्कों की बातचीत के जरिए तेजी से फैलती है तो बच्चे बच्चे माहौल में आए इस बदलाव को महसूस कर लेते हैं। चाहे वे टीवी बुलेटिन का कोई हिस्सा सुन लें, माता-पिता को फोन पर बात करते सुन लें या घर के माहौल में आया बदलाव महसूस कर लें, खबरें उन तक किसी न किसी तरह अक्सर तभी पहुंच जाती हैं, जब वे इसके लिए तैयार नहीं होते। सवाल यह नहीं है कि बच्चों से हिंसा और डर के बारे में बात की जाए या नहीं, असली सवाल यह है कि उनसे कैसे बात की जाए।
बच्चे को सुरक्षित महौल दें
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बच्चों में कठिन विषयों को समझने और उनसे उबरने की क्षमता होती है, लेकिन यह सब सहायक और सुरक्षित माहौल में होना चाहिए। बातचीत की शुरुआत सुरक्षा के भाव से करें। सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा सहज और सुरक्षित महसूस करे। अगर आप खुद बहुत परेशान या बेचैन महसूस कर रहे हैं तो बच्चों से इस विषय पर तब तक बात नहीं करें जब तक आप शांत और स्थिर महसूस नहीं करते या ऐसी बातचीत में मदद के लिए किसी और का सहयोग लें।
खुद डरना बंद करें
सबसे जरूरी है कि आप ईमानदार और स्पष्ट रहें। सीधे और साफ बात करें। बच्चे की उम्र के हिसाब से भाषा का इस्तेमाल करें लेकिन इसे लेकर जरूरत से ज्यादा न सोचें। बीच-बीच में रुकें, सवाल पूछें और उसके चेहरे पर आने वाले उलझन के भावों को ध्यान से देखें। बच्चे लंबे समय तक डरे नहीं रहते। वे इस प्रकार की भावनाओं से जल्दी प्रभावित होते हैं और जल्दी ही इनसे उबर भी जाते हैं इसलिए बड़ी और गंभीर बातचीत के बजाय छोटी-छोटी और बार-बार बातचीत करना बेहतर रहता है। उनसे पूछें कि क्या उनके मन में कोई सवाल है। अगर बच्चा ऊबा हुआ या रुचि न लेता हुआ दिखाई दे, तो हैरान न हों। बच्चों को वयस्कों की गंभीर बातचीत की तुलना में आनंद, खुशी और खेल ज्यादा पसंद होते हैं। इसका यह मतलब नहीं कि वे सुन नहीं रहे या बात को समझ नहीं रहे, बल्कि इसका मतलब है कि उनकी प्राथमिकताएं कुछ और हैं और यह अच्छी बात है।
डर के बीच बच्चों को स्थिर रखना
मीडिया के संपर्क को सीमित करें और बच्चों के सामने डरावनी घटनाओं पर बातचीत करने से बचने की कोशिश करें। वे हमेशा सुन रहे होते हैं और जब वे बातचीत में शामिल होने के बजाय केवल सुनते हैं तो गलतफहमी की गुंजाइश बहुत ज्यादा होती है। अनुसंधान बताते हैं कि अगर बच्चे मीडिया के संपर्क में आते हैं और डर पैदा करने वाली घटनाओं के बारे में सुनते हैं तो यह जरूरी है कि वे जो सुनें, उसे कोई वयस्क सही तरीके से समझाए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने और अपने बच्चे के सुरक्षा घेरे को देखें। बच्चे को याद दिलाएं कि वह यहां आपके साथ सुरक्षित है तथा वह ऐसे समुदाय का हिस्सा है जो आपका साथ देने और आपको सुरक्षित रखने के लिए मौजूद है।

