इस उम्र में कराएंगी IVF तो गुड न्यूज पक्की, डॉक्टरों ने खोजा सफल प्रेग्नेंसी का नया तरीका
punjabkesari.in Wednesday, Aug 27, 2025 - 09:53 AM (IST)

नारी डेस्क: मां बनने की चाह रखने वाली उन महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है, जो 35 साल की उम्र के बाद IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के जरिए संतान प्राप्ति की सोच रही हैं। लंदन के किंग्स कॉलेज (King’s College London) के वैज्ञानिकों ने अपनी नई रिसर्च में बताया है कि एक खास जेनेटिक टेस्ट – PGT-A (Preimplantation Genetic Testing for Aneuploidy) – IVF से पहले कराया जाए, तो सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
IVF में दिक्कत क्यों आती है?
IVF यानी टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया के तहत महिला के एग और पुरुष के स्पर्म को लैब में मिलाकर भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है और फिर उसे महिला के गर्भाशय (Uterus) में डाला जाता है।
लेकिन कई बार यह प्रक्रिया सफल नहीं हो पाती, क्योंकि भ्रूण में क्रोमोसोम्स की गड़बड़ी (genetic abnormality) होती है। यह गड़बड़ी विशेषकर 35 साल की उम्र के बाद ज्यादा देखने को मिलती है, जिससे कंसीव (गर्भ ठहरने) में परेशानी होती है या बार-बार मिसकैरेज (गर्भपात) हो सकता है।
PGT-A टेस्ट क्या है और कैसे काम करता है?
PGT-A (Preimplantation Genetic Testing for Aneuploidy) एक खास जेनेटिक टेस्ट है, जिसमें भ्रूण को महिला के गर्भ में डालने से पहले उसकी जांच की जाती है। यह टेस्ट यह सुनिश्चित करता है कि भ्रूण में क्रोमोसोम्स की संख्या और बनावट ठीक है या नहीं। अगर भ्रूण स्वस्थ होता है, तभी उसे गर्भाशय में डाला जाता है, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है और मिसकैरेज का खतरा कम होता है।
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रिसर्च में क्या सामने आया?
किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च में 100 महिलाओं को शामिल किया 50 महिलाओं ने IVF से पहले PGT-A टेस्ट करवाया बाकी 50 महिलाओं ने बिना किसी जेनेटिक जांच के सामान्य IVF कराया। रिजल्ट: जिन महिलाओं ने PGT-A टेस्ट करवाया, उनमें से 72% ने हेल्दी बच्चे को जन्म दिया वहीं सामान्य IVF वाली महिलाओं में यह आंकड़ा सिर्फ 52% रहा। इसके अलावा, जिन महिलाओं ने PGT-A टेस्ट कराया उन्हें बार-बार भ्रूण ट्रांसफर कराने की जरूरत नहीं पड़ी, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक थकान से राहत मिली।
35 की उम्र के बाद क्यों जरूरी है ये टेस्ट?
डॉक्टरों का कहना है कि आजकल कई महिलाएं अपने करियर या अन्य कारणों से देर से मां बनना चाहती हैं। लेकिन 35 की उम्र के बाद भ्रूण में क्रोमोसोम्स की गड़बड़ी की संभावना बढ़ जाती है, जिससे IVF की सफलता दर घट जाती है। “PGT-A टेस्ट का सही समय पर इस्तेमाल करने से IVF के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है और महिलाएं जल्दी मां बन सकती हैं।”
अगर आप 35 से 42 साल की उम्र में हैं और IVF का विचार कर रही हैं। तो PGT-A टेस्ट करवाकर IVF कराने से आपके सफल गर्भधारण की संभावना काफी बढ़ सकती है। यह टेस्ट भ्रूण की गुणवत्ता की जांच करता है, जिससे बार-बार फेल IVF से बचा जा सकता है। यह टेस्ट IVF के साथ ही किया जाता है। इसकी सलाह डॉक्टर भ्रूण बनने के बाद देते हैं। यह थोड़ा महंगा हो सकता है, लेकिन लंबी प्रक्रिया और बार-बार IVF कराने की तुलना में फायदेमंद है।
तो अगर आप 35 साल के बाद IVF कराने की सोच रही हैं, तो डॉक्टर से PGT-A टेस्ट के बारे में जरूर बात करें – यह आपके ‘गुड न्यूज’ पाने का रास्ता आसान बना सकता है।