क्या प्रेग्नेंसी में पेट के बल सोने से बच्चे को खतरा होता है? जानें सोने की सही पोजीशन
punjabkesari.in Sunday, Oct 18, 2026 - 05:01 PM (IST)
नारी डेस्क: प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अपने खानपान से लेकर सोने और उठने तक हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखना पड़ता है। इस दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिसके कारण सोने का तरीका भी बदल सकता है। खासकर जब पेट बढ़ने लगता है, तो आराम से सोना कई महिलाओं के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मन में सवाल आता है कि क्या पेट के बल सोने से गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है? क्या पीठ के बल सोना सुरक्षित है और गर्भावस्था के किस महीने से करवट लेकर सोना चाहिए
आमतौर पर गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में पेट के बल सोना नुकसानदायक नहीं माना जाता, अगर महिला को इस पोजीशन में आराम महसूस हो। लेकिन जैसे-जैसे गर्भाशय और पेट का आकार बढ़ता है, इस तरह सोना असहज हो सकता है। वहीं, गर्भावस्था के 28वें सप्ताह के बाद सोने की शुरुआत करवट लेकर करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। NHS और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह भी यही है कि इस समय बाईं या दाईं, किसी भी करवट से सोया जा सकता है।
क्या प्रेग्नेंसी में पेट के बल सोने से बच्चे को खतरा होता है
गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में गर्भाशय का आकार छोटा होता है और बच्चा गर्भाशय के अंदर सुरक्षित रहता है। इसलिए अगर महिला को पेट के बल सोने में आराम महसूस होता है, तो आमतौर पर इससे बच्चे को नुकसान होने की आशंका नहीं होती। हालांकि, हर गर्भावस्था अलग होती है और महिला को अपनी सुविधा का ध्यान रखना चाहिए। जैसे-जैसे गर्भावस्था आगे बढ़ती है, पेट का आकार बढ़ने लगता है। ऐसे में पेट के बल लेटना मुश्किल और असहज हो सकता है। अगर इस पोजीशन में दर्द या दबाव महसूस हो, तो जबरदस्ती इसी तरह सोने की कोशिश न करें। करवट लेकर सोना ज्यादा आरामदायक हो सकता है। यह भी समझना जरूरी है कि पेट के बल सोने और पीठ के बल सोने में अंतर होता है। पेट के बल सोने में पेट बिस्तर की तरफ रहता है, जबकि पीठ के बल सोने में पीठ बिस्तर पर होती है और चेहरा ऊपर की तरफ रहता है।

गर्भावस्था के किस महीने तक पेट के बल सो सकते हैं
इसका कोई एक तय जवाब नहीं है, क्योंकि हर महिला का शरीर और गर्भावस्था अलग होती है।
पहले तीन महीने: इस दौरान पेट का आकार आमतौर पर ज्यादा नहीं बढ़ता। अगर पेट के बल सोने में आराम महसूस होता है, तो आमतौर पर ऐसा करना ठीक माना जाता है।
चौथे से छठे महीने तक: इस समय पेट बढ़ने लगता है। पेट के बल सोने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में करवट लेकर सोने की आदत डालना बेहतर रहेगा।
सातवें महीने से डिलीवरी तक: इस दौरान, खासकर 28वें सप्ताह के बाद, सोने की शुरुआत बाईं या दाईं करवट से करना बेहतर माना जाता है। पीठ के बल सोने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे कुछ महिलाओं में खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
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प्रेग्नेंसी में पीठ के बल सोने से क्यों बचना चाहिए
गर्भावस्था के आगे के महीनों में जब महिला पीठ के बल सीधा लेटती है, तो बढ़ते गर्भाशय का दबाव शरीर की एक बड़ी रक्त वाहिका पर पड़ सकता है। इससे दिल तक लौटने वाले खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और बच्चे तक खून तथा ऑक्सीजन पहुंचने पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में कुछ महिलाओं को चक्कर आना या घबराहट महसूस हो सकती है। इसलिए 28वें सप्ताह के बाद सोने की शुरुआत पीठ के बल करने के बजाय करवट लेकर करना बेहतर है। अगर रात में नींद खुलने पर आप पीठ के बल लेटी हुई मिलें, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बस आराम से करवट बदलकर दोबारा सो जाएं। जरूरी यह है कि सोने की शुरुआत करवट लेकर करें।

प्रेग्नेंसी में बाईं करवट सोना बेहतर है या दाईं
कई महिलाओं को गर्भावस्था में बाईं करवट सोने की सलाह दी जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दाईं करवट सोना गलत है। NHS के अनुसार, गर्भावस्था के 28वें सप्ताह के बाद बाईं या दाईं, दोनों करवट लेकर सोना बेहतर माना जाता है। अगर बाईं करवट सोने से कमर, कूल्हे या पेट में दर्द होने लगे, तो आप दाईं करवट ले सकती हैं। सोते समय आराम महसूस करना भी जरूरी है। पेट के नीचे, घुटनों के बीच या पीठ के पीछे तकिया रखने से शरीर को सहारा मिल सकता है और सोने में आसानी हो सकती है।

क्या रात में करवट बदलने से बच्चे को नुकसान होता है
नहीं, सोते समय एक करवट से दूसरी करवट बदलना आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होता। रातभर एक ही पोजीशन में रहना जरूरी नहीं है। शरीर में अकड़न या परेशानी महसूस होने पर आराम से करवट बदल सकती हैं। अगर नींद के दौरान गलती से पीठ के बल आ जाएं, तो परेशान न हों। जागने पर करवट लेकर दोबारा सो जाएं। NHS भी यही सलाह देता है।
प्रेग्नेंसी में अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आसान तरीके
सोने की शुरुआत बाईं या दाईं करवट लेकर करें, खासकर 28वें सप्ताह के बाद। पेट के नीचे और दोनों घुटनों के बीच तकिया रखें, ताकि शरीर को सहारा मिल सके। सोने से पहले ऐसा तरीका अपनाएं जिससे मन शांत रहे और शरीर को आराम मिले। अगर किसी पोजीशन में दर्द या परेशानी हो, तो उसे बदल लें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करवाएं और अपनी परेशानी उनके साथ साझा करें।

