क्या 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन होने की तैयारी?

punjabkesari.in Thursday, Jan 22, 2026 - 06:22 PM (IST)

नारी डेस्क : दुनियाभर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब भारत में भी सोशल मीडिया को लेकर बड़ा कदम उठाए जाने के संकेत मिले हैं। आंध्र प्रदेश सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त नियम लागू करने की दिशा में विचार कर रही है। यह जानकारी आंध्र प्रदेश के आईटी और मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान दी। उनके इस बयान के बाद देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।

ऑस्ट्रेलिया का फैसला बना वैश्विक मिसाल

ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बन चुका है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इस कानून के तहत टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर नाबालिगों का अकाउंट बनाना या इस्तेमाल करना प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह नियम 10 दिसंबर 2025 से लागू हो चुका है। नियमों का उल्लंघन करने पर सोशल मीडिया कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और नियम तोड़ने वाले अकाउंट्स को बंद किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर इस फैसले को बच्चों को हानिकारक कंटेंट, साइबर बुलिंग और मानसिक दबाव से बचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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आंध्र प्रदेश क्या करने की तैयारी में है?

एक इंटरव्यू में नारा लोकेश ने बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया मॉडल का गंभीरता से अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद कंटेंट को पूरी तरह समझ नहीं पाते, जिसका उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मंत्री ने यह भी साफ किया कि अगर ऐसा कोई कानून लाया जाता है, तो उसके लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा और स्पष्ट गाइडलाइंस तैयार करना बेहद जरूरी होगा।

भारत में पहली बार राज्य स्तर पर सख्ती?

यदि आंध्र प्रदेश इस तरह का कानून लागू करता है, तो वह भारत का पहला राज्य होगा जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सीधा प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह कदम अन्य राज्यों और केंद्र सरकार के लिए भी नीतिगत उदाहरण बन सकता है। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल खासतौर पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ा है और बच्चों की भावनात्मक परिपक्वता को ध्यान में रखते हुए वैश्विक स्तर की नीतियों को अपनाना जरूरी हो गया है।

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भारत में फिलहाल क्या हैं नियम?

फिलहाल भारत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिबंधात्मक कानून लागू नहीं है। न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारों ने इस पर कोई सख्त नियम बनाए हैं। अधिकतर मामलों में यह जिम्मेदारी माता-पिता पर ही छोड़ी गई है। ऐसे में आंध्र प्रदेश का यह प्रस्ताव न केवल बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि आने वाले समय में भारत की डिजिटल नीति की दिशा भी तय कर सकता है।
 


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Monika

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