‘मुझे स्कूल नहीं जाना, दोस्त बात नहीं करते…, बच्ची की बात सुन डॉक्टर भी रह गए हैरान

punjabkesari.in Sunday, Jun 28, 2026 - 02:42 PM (IST)

नारी डेस्क : बच्चों की छोटी-छोटी बातें कई बार उनके मन में चल रही बड़ी परेशानियों का संकेत होती हैं। अक्सर माता-पिता बच्चों के डर, उदासी या तनाव को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही छोटी बातें आगे चलकर बच्चे की मानसिक सेहत पर गहरा असर डाल सकती हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया, जब एक 9 साल की बच्ची ने डॉक्टर से कहा कि वह स्कूल नहीं जाना चाहती, क्योंकि उसके दोस्त उससे बात नहीं करते।

स्कूल जाने से डरने लगी थी बच्ची

डॉक्टर ने अपने एक अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उनके क्लीनिक में एक 9 साल की बच्ची आई, जिसने हाल ही में परीक्षा में 79 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। अंक अच्छे होने के बावजूद बच्ची बेहद परेशान थी और स्कूल जाने से डर रही थी। जब डॉक्टर ने उससे बात की, तो उसने बताया कि उसके दो करीबी दोस्तों के नंबर उससे ज्यादा आए हैं और अब वे उससे बात नहीं कर रहे हैं। इस वजह से उसे लगने लगा कि वह उनसे कमतर है और स्कूल जाना उसके लिए तनाव का कारण बन गया है।

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मां के एक सवाल ने बढ़ा दिया तनाव

डॉक्टर ने बताया कि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। घर पहुंचने पर बच्ची की मां ने उससे पूछा कि उसके नंबर और ज्यादा क्यों नहीं आए और उसे और मेहनत करनी चाहिए थी। यह बात बच्ची के मन पर गहरा असर छोड़ गई। धीरे-धीरे उसकी परेशानी बढ़ने लगी और वह स्कूल के नाम से ही तनाव महसूस करने लगी। उसे सिर दर्द, पेट दर्द, उदासी और लो फील जैसी समस्याएं होने लगीं।

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बच्चों के नंबर नहीं, उनकी मेहनत की तारीफ करें

डॉक्टर का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के रिजल्ट से ज्यादा उनकी मेहनत और कोशिशों की सराहना करनी चाहिए। 79 प्रतिशत अंक किसी भी मायने में खराब नहीं हैं, लेकिन अगर बच्चे को सिर्फ नंबरों के आधार पर आंका जाएगा, तो उसके आत्मविश्वास पर बुरा असर पड़ सकता है। बच्चे चाहते हैं कि उनके माता-पिता उनकी मेहनत को समझें और उनका हौसला बढ़ाएं, न कि केवल उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करें।

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बढ़ सकता है मानसिक तनाव

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब बच्चा स्कूल में पहले से ही प्रतिस्पर्धा और दबाव का सामना कर रहा हो और घर पर भी उससे केवल रिजल्ट की बात की जाए, तो उसका तनाव कई गुना बढ़ सकता है। लगातार दबाव और तुलना बच्चों को मानसिक रूप से कमजोर बना सकती है। कई बार यही तनाव आगे चलकर किशोरावस्था में गंभीर मानसिक समस्याओं और गलत कदम उठाने की वजह भी बन सकता है।

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पेरेंट्स के लिए जरूरी सीख

बच्चों की तुलना दूसरों से न करें।
केवल नंबरों पर ध्यान देने के बजाय उनकी मेहनत की तारीफ करें।
बच्चे की भावनाओं को समझने की कोशिश करें।
अगर बच्चा उदास, चिड़चिड़ा या तनाव में दिखे, तो उससे खुलकर बात करें।
बच्चे को यह महसूस कराएं कि उसकी कीमत सिर्फ उसके अंकों से तय नहीं होती।

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याद रखें…

हर बच्चा अलग होता है और उसकी अपनी क्षमताएं होती हैं। माता-पिता का एक छोटा-सा प्रोत्साहन बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ा सकता है, जबकि लगातार दबाव और तुलना उसे अंदर से तोड़ सकती है। इसलिए बच्चों के रिजल्ट नहीं, बल्कि उनके एफर्ट की तारीफ करें, क्योंकि यही उनके बेहतर भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य की असली कुंजी है।


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Content Editor

Monika

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