20–30 की उम्र में ही क्यों होने लगा जोड़ों का दर्द? जानिए वजह

punjabkesari.in Thursday, Feb 19, 2026 - 10:01 AM (IST)

नारी डेस्क:  पहले ऐसा माना जाता था कि जोड़ों का दर्द सिर्फ बढ़ती उम्र की समस्या है। 60–70 साल के बाद घुटनों का दर्द, कमर झुकना या सीढ़ियां चढ़ते समय तकलीफ होना आम बात मानी जाती थी। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। आज 20–30 साल के युवा भी घुटने, कमर, गर्दन और कंधों के दर्द से परेशान नजर आ रहे हैं। कई लोग सुबह उठते ही शरीर में अकड़न महसूस करते हैं। कुछ देर बैठने के बाद खड़े होने में दर्द होता है या हल्की एक्सरसाइज के बाद भी जोड़ों में खिंचाव और सूजन बनी रहती है। यह समस्या अचानक नहीं आई है, बल्कि हमारी बदलती जीवनशैली इसका बड़ा कारण है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही हल्का दर्द आगे चलकर गंभीर बीमारी बन सकता है।

युवाओं में जॉइंट पेन बढ़ने के मुख्य कारण

ज्यादा बैठने वाली लाइफस्टाइल

आजकल ज्यादातर काम लैपटॉप और मोबाइल पर होता है। घंटों कुर्सी पर बैठे रहना, कम चलना-फिरना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। जब मांसपेशियां शरीर को सही सहारा नहीं दे पातीं, तो सारा दबाव जोड़ों पर पड़ता है, जिससे दर्द शुरू हो जाता है।

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गलत बैठने और खड़े होने का तरीका (बॉडी पोस्चर)

मोबाइल देखते समय गर्दन नीचे झुकाना, पीठ झुका कर बैठना या लंबे समय तक एक ही पोजीशन में रहना गर्दन, कंधे और कमर पर बुरा असर डालता है। धीरे-धीरे यह आदतें सर्वाइकल और बैक पेन का कारण बन सकती हैं।

गलत या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज

व्यायाम सेहत के लिए जरूरी है, लेकिन गलत तरीके से की गई एक्सरसाइज नुकसान पहुंचा सकती है। बिना वार्म-अप के भारी वजन उठाना। अचानक बहुत ज्यादा वर्कआउट शुरू कर देना।बिना ट्रेनर के कठिन एक्सरसाइज करना। इन सब से मांसपेशियों और जोड़ों में चोट लग सकती है।

कमजोर कोर मसल्स

पेट और पीठ की मांसपेशियों को कोर मसल्स कहा जाता है। ये शरीर को संतुलन और मजबूती देती हैं। अगर ये कमजोर हों, तो घुटनों और कमर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ता है।

बढ़ता वजन

ज्यादा वजन का सीधा असर घुटनों पर पड़ता है। शरीर का भार जितना ज्यादा होगा, जोड़ों को उतनी ही मेहनत करनी पड़ेगी।

दर्द को नजरअंदाज करना

कई युवा सोचते हैं कि अभी उम्र ही क्या है, दर्द अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन बार-बार होने वाला दर्द शरीर का संकेत है कि कुछ गड़बड़ है। इसे अनदेखा करना आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकता है।

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किन लक्षणों को हल्के में न लें?

अगर ये लक्षण बार-बार दिखें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें

सुबह उठते समय जोड़ों में अकड़न। सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय घुटनों में दर्द। कंधे या घुटने घुमाने पर चटकने की आवाज। लंबे समय तक बैठने के बाद कमर दर्द। हल्की एक्सरसाइज के बाद भी सूजन या दर्द। समय पर जांच कराने से समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। देर करने पर इलाज लंबा चल सकता है।

जॉइंट पेन से बचाव के आसान और असरदार उपाय

रोजाना हल्की एक्सरसाइज करें: हर दिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलें। योग, स्ट्रेचिंग या हल्का वर्कआउट करें।

स्ट्रेचिंग को न भूलें: वर्कआउट से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग जरूर करें। इससे मांसपेशियां लचीली रहती हैं और चोट का खतरा कम होता है।

सही पोस्चर अपनाएं

सीधे बैठें

स्क्रीन आंखों के सामने रखें

हर 30–40 मिनट में ब्रेक लें

गर्दन और कंधों को रिलैक्स रखें

 वजन कंट्रोल में रखें: संतुलित आहार लें और जंक फूड कम करें। वजन नियंत्रित रहेगा तो जोड़ों पर दबाव कम पड़ेगा।

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शरीर को आराम दें: लगातार काम या वर्कआउट के बाद शरीर को रिकवरी का समय दें। नींद पूरी लें।

जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से मिलें: अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे, तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच करवाएं। समय पर इलाज से स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है।

जोड़ों का दर्द अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गया है। बदलती जीवनशैली, गलत पोस्चर और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अच्छी बात यह है कि समय रहते सावधानी बरतकर और सही आदतें अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। इसे डॉक्टर की सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई एक्सरसाइज या इलाज से पहले विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।  


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Content Editor

Priya Yadav

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