Health Alert! इस डिब्बे में आप खाना नहीं बीमारी खा रहे हैं? इसे आज ही बंद करें

punjabkesari.in Saturday, Mar 28, 2026 - 08:04 PM (IST)

नारी डेस्क : आजकल बाहर से खाना मंगाना हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऑफिस हो या घर, ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना आसान और सुविधाजनक लगता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस काले प्लास्टिक डिब्बे में आपका खाना आता है, वह आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकता है? दरअसल, हाल के दिनों में इस मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ गई है। ढाबों, होटलों और फूड पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले काले प्लास्टिक कंटेनर्स को लेकर एक्सपर्ट्स भी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। 25 मार्च 2026 को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए Ghanshyam Tiwari ने कहा कि ये सामान्य प्लास्टिक नहीं होते, बल्कि अक्सर इलेक्ट्रॉनिक कचरे और इंडस्ट्रियल वेस्ट से बनाए जाते हैं, जो सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।

कैसे बनते हैं काले प्लास्टिक डिब्बे?

रिपोर्ट्स के अनुसार, काले प्लास्टिक में अक्सर ई-वेस्ट और अन्य रीसाइक्ल्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें आग से बचाने के लिए डेकाबीडीई (DecaBDE) जैसे फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल मिलाए जाते हैं। समस्या यह है कि ये केमिकल पूरी तरह प्लास्टिक में बंधे नहीं रहते, गर्म या तैलीय खाने के संपर्क में आकर खाने में मिल सकते हैं | इनमें BPA और फ्थेलेट्स जैसे हानिकारक तत्व भी पाए जाते हैं।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

हालिया स्टडीज के अनुसार कई ब्लैक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स में टॉक्सिक केमिकल्स पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। 2024 की एक स्टडी में करीब 85% प्रोडक्ट्स में खतरनाक फ्लेम रिटार्डेंट पाए गए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, BPA और फ्थेलेट्स जैसे केमिकल्स हार्मोनल गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं और दिल की बीमारी व डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ाते हैं। इसके अलावा, माइक्रोप्लास्टिक शरीर में पहुंचकर टॉक्सिक लोड बढ़ा सकते हैं, जिससे लंबे समय में कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

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किन लोगों को ज्यादा खतरा?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, काले प्लास्टिक के डिब्बों का असर कुछ लोगों पर ज्यादा गंभीर हो सकता है, खासकर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों पर। इन समूहों की इम्यूनिटी और शरीर की संवेदनशीलता अधिक होने के कारण हानिकारक केमिकल्स का प्रभाव जल्दी और ज्यादा पड़ सकता है। हालांकि अभी तक इसका सीधा संबंध कैंसर से पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन संभावित जोखिमों को देखते हुए सावधानी बरतना बेहद जरूरी माना जाता है।

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कैसे करें बचाव?

काले प्लास्टिक के डिब्बों में खाना पैक कराने से बचें।
खाने को गर्म करने के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें या गर्म खाना उसमें सर्व ना करें। 
ग्लास, स्टील या लकड़ी के बर्तनों का उपयोग करें।
बार-बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक कंटेनर से दूरी रखें।

काले प्लास्टिक के डिब्बे देखने में सस्ते और सुविधाजनक जरूर होते हैं, लेकिन इनमें छिपे केमिकल्स सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए थोड़ा सावधान रहकर सही विकल्प चुनना ही समझदारी है।
 


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Content Editor

Monika

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