Ganesh Chaturthi: मिट्टी की प्रतिमा से लेकर मंडप तक, प्रकृति के करीब रखें इस बार की सजावट
punjabkesari.in Saturday, Sep 12, 2026 - 07:02 PM (IST)
नारी डेस्क : गणेश उत्सव आते ही घर का एक कोना अचानक सबसे खास बन जाता है। वहां गणपति की स्थापना होती है, फूलों की खुशबू होती है, दीपक जलते हैं और पूरा परिवार उस जगह के आसपास एक साथ आता है। ऐसे में सजावट केवल सुंदर दिखने के लिए नहीं, बल्कि उस पवित्र वातावरण को सहज और आत्मीय बनाने के लिए भी होती है। मेरे अनुभव में अच्छी गणपति सजावट वह नहीं जिसमें बहुत सारी चीजें लगा दी जाएं, बल्कि वह है जिसमें प्रतिमा, बैकग्राउंड, रोशनी और सजावटी सामग्री एक-दूसरे के साथ संतुलित दिखाई दें। इस बार इसी सोच के साथ पर्यावरण-अनुकूल सामग्री को सजावट का हिस्सा बनाया जा सकता है। पर्यावरण-अनुकूल सजावट का अर्थ केवल फूल और मिट्टी के दीपक लगाना नहीं है। मिट्टी, कपड़ा, बांस, लकड़ी, कागज, जूट, प्राकृतिक रेशे, पत्तियां, नारियल के खोल और घर में पहले से मौजूद वस्तुओं से भी बहुत सुंदर गणपति मंडप तैयार किया जा सकता है।
शुरुआत प्रतिमा से करें
अगर सजावट को वास्तव में पर्यावरण के करीब रखना है तो शुरुआत गणेश प्रतिमा से ही होनी चाहिए। प्राकृतिक मिट्टी या शाडू मिट्टी से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता दें और प्रतिमा में इस्तेमाल किए गए रंगों व दूसरी सामग्रियों के बारे में जानकारी जरूर लें। आज मिट्टी के साथ हल्दी और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करके प्रतिमा को अलग रूप देने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। हल्दी के प्राकृतिक पीले रंग वाली प्रतिमा या हल्के प्राकृतिक रंगों से सजी गणेश प्रतिमा बहुत शांत और सुंदर दिखाई दे सकती है। ऐसी प्रतिमा के साथ सजावट में भी मिट्टी का रंग, पीला, हरा, सफेद और हल्का लाल जैसे प्राकृतिक रंग रखें। इससे पूरी सजावट एक ही भाव में दिखाई देगी।
बांस की जाली को बनाएं आकर्षक सजावट
बांस की पतली जाली या चटाई गणपति की बैकग्राउंड के लिए बहुत अच्छा विकल्प है। इसके ऊपर फूलों की छोटी मालाएं, कपड़े की पट्टियां या हरे पत्ते लगाए जा सकते हैं।
सुझाव: बांस की जाली के कुछ हिस्से खुले रखें और उसके पीछे हल्की रोशनी लगाएं। रोशनी जाली से छनकर आएगी और दीवार पर सुंदर छाया बनाएगी।
सामग्री: बांस की जाली, सूती कपड़ा, ताजे फूल और सजावटी लाइट।

केले के पत्तों से बनाएं पारंपरिक मंडप
केले के पत्ते गणपति सजावट को तुरंत पारंपरिक रूप दे देते हैं। इन्हें मंडप के दोनों किनारों पर या पीछे लगाया जा सकता है। बीच में हल्के रंग का कपड़ा, ऊपर गेंदे का तोरण और नीचे मिट्टी के दीपक रखें। यह संयोजन कम सामान में भी बहुत सुंदर दिखाई देता है। उत्सव के बाद पत्तियों को अलग करके स्थानीय गीले कचरे की व्यवस्था के अनुसार निपटाने की कोशिश करें।
नारियल की पत्तियां और प्राकृतिक रेशे
नारियल की पत्तियां, सूखे पत्ते और प्राकृतिक रेशों से बनी रस्सियां मंडप को बहुत सुंदर बनाती हैं। इनसे तोरण, लटकन या मंडप की किनारी तैयार की जा सकती है। जूट या सूती धागे के साथ इन्हें जोड़कर हाथ से तैयार सजावट बनाई जा सकती है।
सामग्री: नारियल की पत्तियां, प्राकृतिक रेशे और जूट की रस्सी।
जूट से पाएं सादगी का आकर्षण
जूट का कपड़ा या रस्सी कम खर्च में मंडप को प्राकृतिक रूप दे सकती है। जूट की पट्टियों को दीवार पर लटकाकर उनके बीच छोटे फूल लगाए जा सकते हैं। जूट की टोकरियों में छोटे पौधे या फूल रखें।
रंग संयोजन: प्राकृतिक जूट + सफेद फूल + हरी पत्तियां + पीतल के दीपक। यह संयोजन आधुनिक घरों में भी बहुत सहज दिखाई देता है।
मिट्टी के बर्तनों को बनाएं सजावट का हिस्सा
मिट्टी के छोटे घड़े, कुल्हड़, कटोरियां और दीये केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि सजावट का हिस्सा भी बन सकते हैं। गणपति की चौकी के दोनों ओर अलग-अलग ऊंचाई के तीन मिट्टी के पात्र रखें और उनमें फूल या हरी टहनियां सजाएं। इससे सजावट में ऊंचाई और गहराई दोनों आएंगी।

सूखे फूल, पत्तियां और प्राकृतिक टहनियां
हर दिन ताजे फूल बदलना संभव न हो तो सूखे फूलों, पत्तियों और स्वाभाविक रूप से गिरी हुई सूखी टहनियों से सजावट की जा सकती है। इनसे छोटी माला या लटकन की रचना तैयार हो सकती है। यहां एक जरूरी बात है सजावट के लिए जीवित पेड़ की शाखाएं या जड़ें काटकर न लें। यदि प्राकृतिक लकड़ी या जड़ जैसी आकृति का इस्तेमाल करना हो तो पहले से गिरी हुई, सुरक्षित और साफ की गई सामग्री का उपयोग करें।

लकड़ी की पट्टियों से बनाएं स्थायी मंडप
बांस के साथ लकड़ी की पतली पट्टियों से एक हल्का चौखटा बनाया जा सकता है। इसे हर साल अलग तरीके से सजाया जा सकता है। एक वर्ष कपड़े और फूलों से, अगले वर्ष कागज की सजावट से और फिर किसी वर्ष हरे पौधों के साथ। एक बार ढांचा तैयार करें और हर वर्ष केवल सजावट बदलें। यही टिकाऊ सजावट की सबसे व्यावहारिक सोच है।
नारियल के खोल को दें नया रूप
नारियल के आधे खोल को साफ करके छोटे सजावटी पात्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें फूल, पत्तियां या छोटी प्राकृतिक सजावटी वस्तुएं रखी जा सकती हैं। एक साधारण नारियल का खोल भी जब फूलों और जूट की रस्सी के साथ सजाया जाता है तो बहुत सुंदर दिखाई देता है।
कागज से बनाएं फूल और पत्तियां
प्लास्टिक के फूलों की जगह हाथ से बने कागज के फूल इस्तेमाल करें। अलग-अलग आकार की पंखुड़ियां बनाकर उन्हें परतों में लगाएं।
सुझाव: पुराने अखबार, बेकार कागज या इस्तेमाल किए गए गत्ते को फेंकने के बजाय उससे सजावटी आकृतियां, पंखे, फूल और पत्तियां बनाएं। बच्चों को इसमें शामिल किया जाए तो सजावट परिवार की अपनी रचना बन जाती है।

कपड़े की रंगीन पताकाएं
पुरानी साड़ी, दुपट्टे या कपड़ों के बचे हुए टुकड़ों से छोटी-छोटी पताकाएं बनाई जा सकती हैं।
इन्हें गणपति की पृष्ठभूमि या मंडप के ऊपर लगाया जा सकता है।
सुझाव: बहुत सारे रंग मिलाने के बजाय दो या तीन रंगों का चयन करें। इससे सजावट अधिक सधी हुई दिखाई देगी।

लकड़ी के मोती और प्राकृतिक रेशों की लटकन
लकड़ी के मोती, जूट और सूती धागे से हल्की लटकन तैयार की जा सकती है।
इसे मंडप के दोनों किनारों पर लगाया जा सकता है। ऐसी सजावट को उत्सव के बाद सुरक्षित रखकर अगले वर्ष फिर इस्तेमाल किया जा सकता है।
फूल, चावल और दालों से बनाएं रंगोली
रासायनिक रंगों की जगह फूलों की पंखुड़ियां, चावल, दालें और उपलब्ध प्राकृतिक रंगों से रंगोली बनाई जा सकती है।
गेंदे की पीली पंखुड़ियां, गुलाब की पंखुड़ियां और हरी पत्तियां मिलकर बहुत सुंदर रंगोली बना सकती हैं।
सुझाव: गणपति की चौकी के चारों ओर गोल फूलों की रंगोली बनाएं, ताकि सजावट मूर्ति को ढकने के बजाय उसका आकर्षण बढ़ाए।

पुराने कांच के जार को न फेंकें
घर में पड़े पुराने कांच के जार को फूल रखने के पात्र या सुरक्षित छोटी रोशनी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
उसे जूट या सूती धागे से हल्का सजाएं। अलग-अलग आकार के जार रखने से सजावट में ऊंचाई का अच्छा संतुलन बन सकता है।
मिट्टी की घंटियां और छोटी आकृतियां
मिट्टी की घंटियां, छोटे पक्षी, पत्तियां और पारंपरिक आकृतियां मंडप में लटकाई जा सकती हैं।
इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि उत्सव के बाद भी इन्हें घर की दूसरी सजावट में इस्तेमाल किया जा सकता है।

बीज वाले कागज से सजावट
बीज वाले कागज से फूल, पत्तियां और छोटी शुभ आकृतियां बनाई जा सकती हैं। उत्सव के बाद इन्हें मिट्टी में लगाया जा सकता है, बशर्ते वह कागज और उसमें इस्तेमाल सामग्री वास्तव में पौध लगाने योग्य हो। यह सजावट बच्चों के लिए भी बहुत रोचक हो सकती है।

पौधों से बनाएं हरियाली की पृष्ठभूमि
गणपति के पीछे छोटे-छोटे गमले एक कतार में रखकर हरियाली की पृष्ठभूमि बनाई जा सकती है।
यदि घर में पहले से पौधे हैं तो उन्हीं को कुछ दिनों के लिए गणपति के आसपास व्यवस्थित करें। उत्सव खत्म होने पर वे फिर अपने सामान्य स्थान पर जा सकते हैं।
पीतल और तांबे को दें खास जगह
पीतल और तांबे के दीपक, घंटियां, थालियां और छोटे पात्र सजावट को पारंपरिक सुंदरता देते हैं।
इनका लाभ यह है कि ये केवल गणपति उत्सव तक सीमित नहीं रहते। पूजा, त्योहार और घर की सजावट में पूरे साल इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
सुझाव: पीतल के दीपक + मिट्टी की गणेश प्रतिमा + सूती कपड़ा + फूल + बांस।

छोटे घर के लिए मेरी पसंद
अगर घर में जगह कम है तो बड़े मंडप की जरूरत नहीं। एक लकड़ी की छोटी चौकी, सूती कपड़े की सजावट, ऊपर फूलों का तोरण, दोनों तरफ छोटे पौधे और दो दीपक पर्याप्त हैं।
सजावट को ऊपर की ओर ले जाएं। दीवार पर कपड़े की लंबी पट्टी, फूलों की लटकन या कागज की सजावट लगाने से बिना फर्श घेरे जगह उत्सवी दिखाई देगी।
ध्यान रखें कि पूजा के सामने आने-जाने की जगह बाधित न हो।
हल्की रोशनी से बनाएं शांत माहौल
गणपति की सजावट में बहुत तेज रोशनी लगाने के बजाय हल्की रोशनी का इस्तेमाल करें। इससे पूजा की जगह ज्यादा शांत और सुंदर लगती है।
मूर्ति पर हल्की रोशनी, पीछे की ओर थोड़ी रोशनी और नीचे कुछ दीपक लगाना पर्याप्त हो सकता है। इससे सजावट भी खूबसूरत दिखेगी और माहौल भी सुकून भरा रहेगा।
कपड़े, कागज, सूखे पत्ते और फूलों को खुले दीपक या गर्म होने वाली लाइट से सुरक्षित दूरी पर रखें। बिजली के तारों को अच्छी तरह व्यवस्थित रखें और उन्हें पानी से दूर रखें।
वास्तु के नजरिए से पूजा का स्थान
वास्तु में गणपति की स्थापना को लेकर अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं हैं। इसलिए किसी एक दिशा को हर घर के लिए निश्चित नियम मानना उचित नहीं होगा।
मैं पूजा स्थान तय करते समय दिशा के साथ घर की बनावट, प्राकृतिक रोशनी, हवा, आने-जाने की जगह और परिवार की दैनिक जरूरतों को भी महत्व देती हूं।
पूजा का स्थान साफ, शांत और व्यवस्थित हो। उसके आसपास अनावश्यक सामान जमा न हो और रोज की पूजा आसानी से की जा सके।
मेरे अनुसार पूजा का कोना घर में बची हुई जगह नहीं होना चाहिए। उसे शुरुआत से ही एक सम्मानजनक और शांत स्थान के रूप में सोचना बेहतर है।
प्राकृतिक सामग्री का मतलब केवल नई चीजें खरीदना नहीं
यह भी समझना जरूरी है कि पर्यावरण-अनुकूल सजावट का अर्थ हर चीज बाजार से प्राकृतिक सामग्री में खरीदना नहीं है।
घर में पड़ी पुरानी साड़ी, लकड़ी का छोटा स्टूल, कांच का जार, पुरानी टोकरी, पिछले वर्ष की रोशनी या सजावटी वस्तु इन सभी को नया रूप दिया जा सकता है।
नया खरीदने से पहले घर में मौजूद चीजों को नए नजरिए से देखना सबसे आसान पर्यावरण-अनुकूल कदम है।
इस बार बनाएं अपनी स्थायी सजावट की पेटी
अगर घर में हर साल गणपति स्थापित होते हैं तो एक अलग पेटी बनाएं, जिसमें सजावट की दोबारा इस्तेमाल होने वाली चीजें रखें—
● बांस या लकड़ी का हल्का ढांचा
● दो-तीन सूती कपड़े का बैकग्राउंड
● पीतल के दीपक
● मिट्टी के पात्र
● बांस की टोकरियां
● लकड़ी की सजावटी वस्तुएं
● सुरक्षित बिजली की लड़ियां
● हाथ से बनाए कागज के फूल
अगले वर्ष केवल फूल, पत्तियां या कुछ छोटे तत्व बदलें। इससे हर साल नई सजावट खरीदने की जरूरत कम होगी।
एक जरूरी बात: प्राकृतिक सामान भी सोच-समझकर चुनें
सिर्फ किसी वस्तु पर “पर्यावरण-अनुकूल” लिखा होने से वह अपने आप पर्यावरण के लिए बेहतर नहीं हो जाती। सामान कहां से आई है, उसका दोबारा उपयोग हो सकता है या नहीं और उत्सव के बाद उसका निपटारा कैसे होगा। इन बातों पर ध्यान दें। खासकर सजावट के लिए जीवित पेड़ों, पौधों या उनकी जड़ों को नुकसान पहुंचाने से बचें। प्राकृतिक सजावट के लिए पहले से उपलब्ध, गिरी हुई या दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली सामान बेहतर विकल्प है। इसी तरह फूलों, पत्तियों और पूजा सामग्री को अन्य कचरे से अलग रखना भी जरूरी है।
इस बार सजावट को थोड़ा कम, लेकिन थोड़ा अधिक अपना बनाएं
मेरे लिए सुंदर गणपति सजावट का अर्थ भव्यता नहीं, बल्कि भाव, संतुलन और उपयोगिता है। एक प्राकृतिक मिट्टी की गणेश प्रतिमा, हल्दी के रंग का स्पर्श, सूती कपड़े की सजावट, बांस की जाली, गेंदे के फूल, मिट्टी के दीपक, कुछ हरे पौधे और हल्की रोशनी—इतनी सामग्री से भी गणपति का दरबार बेहद खूबसूरत बन सकता है। और जब इन चीजों में से अधिकांश उत्सव के बाद भी घर में काम आती रहें, तो सजावट केवल सुंदर नहीं रहती, समझदार भी बन जाती है।
इस गणेश उत्सव में इसलिए एक सरल नियम अपनाएं—
कम खरीदें, ज्यादा दोबारा इस्तेमाल करें, प्राकृतिक सामान चुनें और सजावट को सुरक्षित रखें।
क्योंकि जब गणपति की प्रतिमा से लेकर उनके मंडप तक प्रकृति के करीब हो, तो बप्पा का स्वागत भी कुछ ज्यादा आत्मीय और अर्थपूर्ण महसूस होता है।
— रक्षा सेठी, इंटीरियर डिजाइनर एवं वास्तु विशेषज्ञ, इंदौर

