लद्दाख के पहाड़ों से London Fashion Week तक पहुंचा Namza Couture

punjabkesari.in Saturday, Sep 26, 2026 - 04:50 PM (IST)

 नारी डेस्क:   फैशन की दुनिया में भारत की महिलाओं ने खूब नाम रोशन किया है। सिर्फ फैशन और स्टाइलिश दिखने में ही नहीं बल्कि दूसरों को दिखाने में भी। ये कलैक्शन सिर्फ एक फैशन ही नहीं बल्कि उनके अंदर छिपे ढेरों ऐसे एहसास थे जिसे उन्होंने अपनी खास कलैक्शन द वैब के जरिए पेश कर दिया।

घर लौटकर बनाई अपनी अलग पहचान

आज जब फैशन की दुनिया में ग्लोबल ट्रेंड्स का असर साफ दिखाई देता है, वहीं Namza Couture ने अपनी पहचान अपनी ही जड़ों से बनाई। लद्दाख की पारंपरिक कला, वहां की संस्कृति और पुराने टेक्सटाइल हुनर को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर इस लेबल ने एक अलग जगह बनाई है। इस कहानी में एक बात खास तौर पर ध्यान खींचती है अपनी जड़ों की ओर लौटना पीछे जाना नहीं होता। कई बार अपने घर, अपनी संस्कृति और अपनी परंपराओं से जुड़ना ही आगे बढ़ने का सबसे मजबूत रास्ता बन जाता है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by SEFT | Fashion Design Courses Online (@seftlearning)

 

 

आपको बता दे कि लद्दाख के पहाड़ों से निकलकर लंदन फैशन वीक के वैश्विक मंच तक पहुंचने वाला मशहूर फैशन लेबल नम्ज़ा कूट्योर (Namza Couture) है। इस ब्रांड की शुरुआत लेह, लद्दाख की दो महिला उद्यमियों और डिजाइनरों पद्मा यांगचान (Padma Yangchen) और जिगमेट डिस्केट (Jigmet Diskit) ने की है। दोनों ने लद्दाख की पारंपरिक कला, संस्कृति और बुनाई को आधुनिक फैशन से जोड़कर इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

लद्दाख की विरासत को फैशन में दी जगह

Namza Couture के डिजाइन में लद्दाख की पारंपरिक कारीगरी की झलक साफ देखने को मिलती है। हाथ से तैयार की गई पश्मीना, पारंपरिक लद्दाखी गोंचा, सिल्क रूट से जुड़ी ब्रोकेड तकनीक और थिगमा या थिकमा टाई-डाई जैसी पारंपरिक कलाओं को आधुनिक फैशन के साथ पेश किया गया है। इस तरह ये डिजाइन सिर्फ पहनने के लिए कपड़े नहीं रह जाते, बल्कि इनके जरिए लद्दाख की कहानी और वहां के कारीगरों का हुनर भी सामने आता है।

PunjabKesari

PunjabKesari

ये भी पढ़ें:  खून को पतला रखने के लिए जरूरी हैं ये चीजें, नहीं तो बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा

पहाड़ों के स्टूडियो से ग्लोबल मंच तक

Namza Couture की कहानी इस बात का उदाहरण है कि फैशन में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए जरूरी नहीं कि शुरुआत किसी बड़े शहर से ही हो। पहाड़ों में बने स्टूडियो से काम शुरू करके भी अपनी कला को दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है। London Fashion Week में डेब्यू और नारी शक्ति पुरस्कार जैसी उपलब्धियां इस सफर के बड़े पड़ाव हैं। लेकिन इसकी असली खूबसूरती इस बात में है कि ग्लोबल मंच तक पहुंचने के बाद भी इस फैशन लेबल ने अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा। आखिरकार, फैशन सिर्फ नए कपड़े और नए ट्रेंड बनाने का नाम नहीं है। यह अपनी सोच, संस्कृति और पहचान को दुनिया के सामने रखने का भी एक तरीका है। जब डिजाइन अपनी जड़ों से जुड़ता है, तो वह सिर्फ फैशन नहीं रहता, बल्कि एक कहानी बन जाता है।

PunjabKesari
 
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Priya Yadav

Related News

static