प्रेग्नेंसी के दौरान गर्मी लगने से लड़के कम होते हैं पैदा, नई स्टडी में दावा
punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 06:26 PM (IST)
नारी डेस्क: प्रेगनेंसी में कई महिलाओं को कभी ज़्यादा ठंड लगती है तो कभी अचानक गर्मी महसूस होती है। पुराने जमाने में यह माना जाता था कि अगर ठंड ज़्यादा लगे तो लड़का होता है और गर्मी ज़्यादा लगे तो लड़की।अब तो एक स्टडी में भी इसे लेकर दावा किया गया है। सब-सहारा अफ्रीका और भारत में डेमोग्राफिक और हेल्थ सर्वे के हालिया एनालिसिस से पता चला है कि जब प्रेग्नेंट महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान ज़्यादा टेम्परेचर मिलता है, तो कम लड़के पैदा होते हैं।
अध्ययन क्या कहता है?
रिसर्च में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान अधिक तापमान होने पर लड़कों के जन्म की संख्या कम हो सकती है। इस अध्ययन में 50 लाख से ज्यादा जन्मों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार गर्भ में पल रहा पुरुष भ्रूण पर्यावरणीय तनाव (जैसे गर्मी) के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकता है। अधिक गर्मी होने पर गर्भपात या भ्रूण की मृत्यु की संभावना बढ़ सकती है, जिससे लड़कों का जन्म कम हो सकता है।
मां के शरीर पर हीट-स्ट्रेस
बहुत ज्यादा गर्मी से गर्भवती महिला के शरीर पर हीट-स्ट्रेस (Heat stress) पड़ता है, जिससे भ्रूण के विकास पर असर पड़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि गर्मी होने से हमेशा लड़की ही पैदा होगी। यह केवल जनसंख्या स्तर (population level) पर एक छोटा सा प्रभाव दिखाता है। बच्चे का लिंग मुख्य रूप से क्रोमोसोम (X और Y) से तय होता है। डब्लयूएचओ के अनुमान के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से 2030 से 2050 तक ढ़ाई लाख अधिक लोगों की मौत की संभावना है। जलवायु परिवर्तन के इन कारणों में से एक प्रमुख वजह हीटवेव्स यानी गर्म हवाएं भी हैं।
गर्मी का नवजात बच्चे पर भी असर
अलग-अलग वर्ग और सामाजिक स्थिति की गर्भवती महिलाओं पर हीटवेव्स के पड़ने वाले असर में गरीब महिलाओं पर इसका ज्यादा असर हो सकता है। गर्मी से बचाव के ज्यादा साधन न होने की वजह से उनके स्वास्थ्य पर ज्यादा खतरा बन जाता है। गर्म तापमान से केवल अजन्मे बच्चों को खतरा नहीं है, बल्कि नवजात बच्चों के लिए भी यह स्थिति बहुत खतरनाक है। द गार्डियन में प्रकाशित लेख के मुताबिक जलवायु संकट पूरी दुनिया में भ्रूण, नवजात और बच्चों के स्वास्थ्य पर असर डालता है। अधिक तापमान की वजह से समय से पहले बच्चे के जन्म होने से उसके स्वास्थ्य पर आजीवन असर पड़ता है। इससे छोटे बच्चों की अस्पताल में भर्ती होने में बढ़ोत्तरी देखी जाती है।

