America का क्रेज हुए खत्म ! अब पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों की  पसंदीदा जगह बना  Europe

punjabkesari.in Tuesday, Jul 21, 2026 - 10:32 AM (IST)

नारी डेस्क: उच्च शिक्षा के लिए भारतीय छात्रों की पसंद के तौर पर यूरोप तेजी से उभर रहा है। इसकी वजह है उत्तरी अमेरिका में शिक्षा की बढ़ती लागत, सख़्त इमिग्रेशन नीतियां और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते के तहत आवाजाही से जुड़े नए नियम, जो दुनिया भर में शिक्षा से जुड़े विकल्पों को बदल रहे हैं। छात्रों और शिक्षा सलाहकारों का कहना है कि जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, पुर्तगाल और इटली जैसे देशों में भारतीय आवेदकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। इसके पीछे सस्ती ट्यूशन फीस, अंग्रेज़ी भाषा में बढ़ते प्रोग्राम और पढ़ाई के बाद नौकरी के बेहतर मौके जैसे कारण हैं

यह भी पढ़ें:  पस भरे दर्दनाक बालतोड़ से हैं परेशान? इस देसी इलाज से तुरंत गायब हो जाएगा दर्द और सूजन
 

यूरोप में सस्ती है पढ़ाई

यह ट्रेंड उस लंबे समय से चली आ रही पसंद में बदलाव को दिखाता है जिसके तहत भारतीय छात्र पारंपरिक रूप से सबसे ज़्यादा संख्या में अमेरिका जाते रहे हैं। हालांकि वीज़ा के कड़े नियमों, रहने के ज़्यादा खर्च और इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण कई छात्र यूरोप में दूसरे देशों का विकल्प तलाश रहे हैं। एजुकेशन कंसल्टेंट्स के अनुसार, यूरोप की यूनिवर्सिटीज़ में ट्यूशन फ़ीस आम तौर पर अमेरिका की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत कम होती है, और कई देशों में रहने का कुल खर्च भी काफ़ी कम है।

PunjabKesari


जर्मनी बदलाव में सबसे आगे

चेन्नई के 22 साल के इंजीनियरिंग ग्रेजुएट ए. श्रीनिकेतन उन छात्रों में शामिल हैं जो अपना रास्ता बदल रहे हैं। अमेरिका में पढ़ाई करने की अपने परिवार की पुरानी परंपरा को मानने के बजाय, वह जर्मनी में मास्टर्स डिग्री करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जर्मनी अमेरिकी विश्वविद्यालयों की तुलना में बहुत कम खर्च में अच्छी शिक्षा देता है और साथ ही ग्लोबल इंडस्ट्रीज़ के साथ मज़बूत संबंध भी बनाए रखता है। उन्होंने कहा- "दुनिया अब मल्टीपोलर (कई ध्रुवों वाली) हो रही है। पहले हर कोई सिर्फ़ अमेरिका की बात करता था, लेकिन आज कई और मौके भी मौजूद हैं।"
 

यह भी पढ़ें:  Sauce की जगह धनिये की चटनी और ब्रेड की जगह रोटी.... लंबा जीना है तो आज ही बदल दें ये चीजें

 

ट्रेड डील से नए मौके खुले

एजुकेशन कंसल्टेंट्स का कहना है कि भारत-EU ट्रेड एग्रीमेंट ने यूरोप में दिलचस्पी काफी बढ़ाई है। इस एग्रीमेंट से वीज़ा मिलने में आसानी, भारतीय क्वालिफिकेशन को बेहतर मान्यता और पढ़ाई के बाद काम करने के साफ़ मौकों का वादा किया गया है। इस एग्रीमेंट में टेक्नोलॉजी पर केंद्रित सपोर्ट ऑफिस बनाने और सोशल सिक्योरिटी की व्यवस्था करने की योजनाएं भी शामिल हैं, जिससे भारतीय प्रोफेशनल्स को यूरोप में लंबे समय तक करियर बनाने में मदद मिलेगी। जानकारों का कहना है कि पहली बार यूरोप खुद को बड़े पैमाने पर भारतीय टैलेंट को आकर्षित करने वाली जगह के तौर पर पेश कर रहा है।

PunjabKesari

कम खर्च छात्रों को आकर्षित करता है

किफ़ायती होना यूरोप की सबसे बड़ी खूबियों में से एक है। एजुकेशन कंसल्टेंट्स के मुताबिक, कई यूरोपीय विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फ़ीस अमेरिकी विश्वविद्यालयों की तुलना में 50% से 80% तक कम है। रहने का खर्च भी आम तौर पर कम होता है, जिससे यूरोप मिडिल-क्लास भारतीय परिवारों के लिए ज़्यादा आकर्षक बनता जा रहा है। छात्र अपने करियर के लक्ष्यों के आधार पर जगह चुनने में भी ज़्यादा सोच-समझकर फ़ैसले ले रहे हैं जैसे इंजीनियरिंग के लिए जर्मनी, मैनेजमेंट के लिए फ़्रांस, वर्क-लाइफ़ बैलेंस के लिए नीदरलैंड्स और पोस्ट-ग्रेजुएट रिसर्च के लिए पुर्तगाल। हाल ही में हुए भारत-EU ट्रेड एग्रीमेंट ने यूरोप के आकर्षण को और बढ़ाया है। इस एग्रीमेंट में एक व्यवस्थित मोबिलिटी फ़्रेमवर्क पेश किया गया है, जिसका मकसद वीज़ा प्रोसेस को आसान बनाना, भारतीय क्वालिफ़िकेशन को बेहतर मान्यता दिलाना और शिक्षा से रोज़गार तक का साफ़ रास्ता तैयार करना है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

vasudha

Related News

static