प्रेगनेंसी के दौरान ये  5  मेडिकल टेस्ट हैं बेहद जरूरी, न करें नजरअंदाज

punjabkesari.in Saturday, Apr 05, 2025 - 10:21 AM (IST)

नारी डेस्क: गर्भावस्था में मां और बच्चे दोनों की सेहत का ख्याल रखना बेहद ज़रूरी है। वर्ल्ड हेल्थ डे के मौके पर हम आपको बता रहे हैं वह 5 टेस्ट, जो हर गर्भवती महिला को जरूर करवाने चाहिए। ये टेस्ट किसी भी स्वास्थ्य समस्या का समय रहते पता लगाने में मदद करते हैं, ताकि भविष्य में किसी भी जटिलता से बचा जा सके।

गर्भावस्था का समय किसी महिला के जीवन का सबसे खास और महत्वपूर्ण पल होता है। इस दौरान बच्चे का विकास पूरी तरह से मां की सेहत पर निर्भर करता है। अच्छे खानपान, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के अलावा, कुछ मेडिकल टेस्ट भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये टेस्ट यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

गर्भावस्था के दौरान कौन-कौन से टेस्ट जरूरी हैं?

जेनेटिक स्क्रीनिंग (Genetic Screening)

 इस टेस्ट का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि बच्चे में कोई आनुवांशिक बीमारी का खतरा तो नहीं है। अगर परिवार में पहले से कोई जेनेटिक समस्या रही हो, तो यह टेस्ट जरूरी हो जाता है। इसमें डाउन सिंड्रोम, सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों का पता चलता है। इसके लिए ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और एमनियोसेंटेसिस जैसी जांचें की जाती हैं।

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अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

गर्भावस्था के दौरान कई बार अल्ट्रासाउंड किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिशु ठीक से विकसित हो रहा है। पहले ट्राइमेस्टर में यह ड्यू डेट और जुड़वां गर्भ की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। दूसरे ट्राइमेस्टर में बच्चे के अंगों और प्लेसेंटा की स्थिति देखी जाती है, जबकि तीसरे ट्राइमेस्टर में शिशु की पोजीशन और एम्नियोटिक फ्लूड की मात्रा को चेक किया जाता है।

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ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (Glucose Tolerance Test): इस टेस्ट का उद्देश्य गर्भवती महिला में डायबिटीज का पता लगाना है। आमतौर पर 24 से 28 हफ्तों के बीच यह टेस्ट किया जाता है। अगर मां को गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes) होती है, तो इससे बच्चे का वजन बढ़ सकता है और डिलीवरी में जटिलताएं हो सकती हैं। इस टेस्ट से शरीर में शुगर प्रोसेसिंग की स्थिति का पता चलता है।

फीटल मॉनिटरिंग (Fetal Monitoring)

गर्भावस्था के आखिरी चरण में फीटल मॉनिटरिंग टेस्ट की सलाह दी जाती है, जिसमें शिशु की हृदय गति ट्रैक की जाती है। यह सुनिश्चित करता है कि बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही है या नहीं। अगर कोई असमानता पाई जाती है, तो डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी का सुझाव भी दे सकते हैं।

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ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस (GBS) टेस्ट

ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो गर्भवती महिला को प्रभावित कर सकता है। यह संक्रमण शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है और समय पूर्व प्रसव या अन्य जटिलताएं पैदा कर सकता है। इसलिए 35 से 37 हफ्तों के बीच इस टेस्ट को करवाना जरूरी होता है, ताकि डिलीवरी के दौरान संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।

 गर्भवती महिला को इन सभी टेस्टों को समय पर करवाना चाहिए ताकि वह और उसका बच्चा स्वस्थ रहें। इन जांचों के माध्यम से किसी भी संभावित समस्या का समय रहते पता चलता है और उसे दूर किया जा सकता है। वर्ल्ड हेल्थ डे पर यह समझना और जानकारी रखना जरूरी है कि सही समय पर की गई जांच और डॉक्टर की सलाह से सुरक्षित और स्वस्थ गर्भावस्था संभव है।

हर गर्भवती महिला को डॉक्टर की सलाह के अनुसार इन टेस्टों को करवाना चाहिए ताकि वे एक सुरक्षित और स्वस्थ मातृत्व का अनुभव कर सकें।
 

 

 


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Priya Yadav

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