गर्मी में खा रहे हैं इडली-वड़ा? एक साथ 97 लोग बीमार, खाने से पहले देखें FSSAI की ये गाइडलाइंस
punjabkesari.in Sunday, Apr 19, 2026 - 04:57 PM (IST)
नारी डेस्क: इडली-वड़ा एक लोकप्रिय दक्षिण भारतीय नाश्ता है, जिसमें नरम, भाप में पकी हुई इडली और कुरकुरे, तली हुई मेदू वड़े को गरम सांभर और नारियल की चटनी के साथ परोसा जाता है। इडली चावल और उड़द की दाल के किण्वित (fermented) घोल से बनती है, जो इसे हल्का और सुपाच्य बनाता है, जबकि वड़ा उड़द की दाल के मसालेदार पेस्ट से बनता है। लेकिन, क्या आप जानते है कि गर्मी में ये खाना खाने से सेहत पर काफी बुरा असर पड़ सकता है? आइए जानते है कि गर्मी में ये खाना खाने से क्या होता है...
97 लोग हुए गंभीर रूप से बीमार
जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु के देवनहल्ली इलाके से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, यहां पर एक निजी कंपनी के लगभग 97 कर्मचारी अपनी ऑफिस कैंटीन में खाना खाने के बाद गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। इन सभी ने लंच और नाश्ते में इडली, वड़ा और सांभर-चावल खाया था। खाना खाते ही उनके पेट में तेज दर्द होने लगा और फिर उन्हें उल्टी और दस्त होने लगे। सभी को तुरंत अस्पताल में भर्ती किया गया और ड्रिप देकर उनकी हालत को कंट्रोल किया गया। गनीमत रही कि सभी लोगों की जान बच गई।

गर्मी में फर्मेंटेड फूड खाने से बचना चाहिए
इसके बाद जांच के लिए खाने के सैंपल भेज दिए ग्ए। इस पूरी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गर्मियों में फर्मेंटेड फूड को लेकर हमें बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। फर्मेंटेशन नेचुरल प्रोसेस है, जिसमें यीस्ट, बैक्टीरिया और फंगस जैसे सूक्ष्मजीव खाने में मौजूद प्राकृतिक शुगर और स्टार्च को तोड़ते हैं। इस प्रक्रिया से खाने का स्वाद, बनावट और पोषण तो बढ़ता है, लेकिन बढ़ता तापमान इसे खतरनाक भी बना सकता है। इसलिए गर्मी में ऐसे फूड को खाने से बचना चाहिए, नहीं तो सेहत को काफी नुकसान हो सकता है।
फर्मेंटेड फूड को लेकर जानें FSSAI की जरूरी गाइडलाइन
गर्मियों में दही, छाछ और अन्य फर्मेंटेड फूड का सेवन बढ़ जाता है। ऐसे में इनकी गुणवत्ता और सुरक्षा बेहद जरूरी हो जाती है। भारत की खाद्य सुरक्षा संस्था Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने इन उत्पादों के लिए कुछ सख्त नियम तय किए हैं, जिनका पालन हर फूड बिजनेस को करना जरूरी है।
फर्मेंटेड दूध उत्पादों के नियम
FSSAI के अनुसार, खमीर उठाकर बनाए गए डेयरी उत्पादों में कम से कम 2.9% मिल्क प्रोटीन होना चाहिए। इसके साथ ही, इनमें लैक्टिक एसिड के रूप में कम से कम 0.45% एसिडिटी होना जरूरी है, ताकि उत्पाद सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रहे।

सुरक्षा और गुणवत्ता का ध्यान
खाने-पीने की चीजों में प्रिजर्वेटिव्स, भारी धातुओं और अन्य हानिकारक तत्व तय सीमा के भीतर ही होने चाहिए। 2011 के नियमों के अनुसार, इनकी मात्रा ज्यादा होने पर उत्पाद असुरक्षित माना जाएगा।
तापमान से जुड़े नियम
FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ फर्मेंटेड प्रोडक्ट्स को बनाने के बाद गर्म किया जाता है, जबकि कुछ को नहीं। दोनों तरह के उत्पादों के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं, ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे।
साफ-सफाई के सख्त नियम
FSSAI के शेड्यूल-4 के तहत सभी खाद्य उत्पादों को साफ-सफाई और हाइजीन के कड़े नियमों के अनुसार ही तैयार करना चाहिए। इससे फूड से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।
गर्मी में रखें खास ध्यान
गर्मियों में फर्मेंटेड फूड को हमेशा फ्रिज में रखें और ताजा ही खाएं। थोड़ी-सी सावधानी फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याओं से बचा सकती है।

