खाने में डालडा इस्तेमाल करते हैं, पहले जान लें दिल पर इसका क्या असर पड़ता है
punjabkesari.in Friday, Aug 14, 2026 - 01:04 PM (IST)
नारी डेस्क : दिल को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ तेल-घी की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसमें मौजूद फैट की किस्म पर भी ध्यान देना जरूरी है। खासतौर पर ट्रांस फैट का ज्यादा सेवन हार्ट हेल्थ के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वनस्पति घी यानी डालडा में ट्रांस फैट की मौजूदगी को लेकर AIIMS की डाइटीशियन ने जरूरी बातें बताई हैं। आइए जानते हैं ट्रांस फैट शरीर पर क्या असर डालता है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
ट्रांस फैट दिल के लिए क्यों है नुकसानदायक?
आजकल खान-पान में तली-भुनी और पैकेज्ड चीजों का इस्तेमाल बढ़ गया है। ऐसे में शरीर में ट्रांस फैट की मात्रा बढ़ने का खतरा भी रहता है। AIIMS के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी की डाइटीशियन के मुताबिक, रोजाना खाए जाने वाले फैट में ट्रांस फैट सबसे कम फायदेमंद फैट माना जाता है। WHO की सलाह के अनुसार, रोजाना कुल कैलोरी का 1 प्रतिशत से कम हिस्सा ट्रांस फैट से आना चाहिए। 2,000 कैलोरी की डाइट में ट्रांस फैट की मात्रा करीब 2 ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। ट्रांस फैट का सेवन जितना कम रखा जाए, दिल की सेहत के लिए उतना बेहतर माना जाता है।

डालडा यानी वनस्पति घी में ट्रांस फैट कैसे बनता है?
वनस्पति घी को तैयार करने के लिए वनस्पति तेल को सॉलिड फैट में बदला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान ट्रांस फैट बन सकता है। इसी वजह से वनस्पति घी से तैयार किए गए कुछ खाद्य पदार्थ ट्रांस फैट का स्रोत बन सकते हैं। हालांकि, भारत में खाद्य पदार्थों में औद्योगिक ट्रांस फैट की मात्रा को सीमित करने के लिए नियम लागू किए गए हैं। इसलिए आज बाजार में मिलने वाले वनस्पति घी में ट्रांस फैट की मात्रा पहले की तुलना में काफी कम हो सकती है। फिर भी इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन किया जाए।
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पैकेट पर ट्रांस फैट जरूर चेक करें
अगर आप पैकेज्ड फूड खरीदते हैं तो उसकी Nutrition Information और Ingredients जरूर पढ़ें। सिर्फ ट्रांस फैट की मात्रा देखकर ही फैसला न करें। अगर किसी पैकेट पर ट्रांस फैट 0 ग्राम लिखा है, तो उसके ingredients भी देखें। Hydrogenated Vegetable Oil, Partially Hydrogenated Oil या Vanaspati जैसे शब्द दिखाई दें तो ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर है।

तली-भुनी चीजों से भी रहें सावधान
ट्रांस फैट सिर्फ वनस्पति घी से ही नहीं, बल्कि कुछ तले हुए और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से भी मिल सकता है। खासतौर पर जब तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल किया जाता है तो उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। स्ट्रीट फूड या ऐसी दुकानों पर मिलने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर विशेष सावधानी बरतें, जहां यह पता न हो कि खाना किस तेल या फैट में तैयार किया गया है। अगर तेल का रंग और गंध बदल गई हो, वह बहुत गाढ़ा या चिपचिपा हो गया हो, उसमें झाग बनने लगे हों या तेल से लगातार धुआं निकल रहा हो, तो ऐसे तेल में बने भोजन से बचना बेहतर है।
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घर में ट्रांस फैट कम करने के लिए अपनाएं ये तरीके
खाना पकाने में वनस्पति घी का इस्तेमाल सीमित करें।
तली हुई चीजों को रोजाना खाने की आदत न बनाएं।
एक बार इस्तेमाल किए गए तेल को बार-बार गर्म करके तलने से बचें।
पैकेज्ड फूड खरीदते समय Nutrition Facts और Ingredients जरूर पढ़ें।
Hydrogenated या Partially Hydrogenated Oil वाले उत्पादों का सेवन कम करें।
बेकरी और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित रखें।
बाहर का ऐसा खाना कम खाएं जिसमें इस्तेमाल होने वाले तेल या फैट की जानकारी न हो।
रोजाना की डाइट में संतुलित मात्रा में स्वस्थ वसा वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें।

डालडा पूरी तरह बंद करना जरूरी है?
हर व्यक्ति की डाइट और स्वास्थ्य की जरूरत अलग होती है। इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ को लेकर बिना जरूरत पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय ट्रांस फैट का सेवन जितना संभव हो उतना कम रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है। खासकर पैकेज्ड, तली हुई और बार-बार गर्म किए गए तेल में तैयार चीजों का सेवन सीमित करना दिल की सेहत के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
नोट: यदि आपको हृदय रोग, हाई कोलेस्ट्रॉल या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लें।

