क्या सच में बच्चों को खाता था एपस्टीन? सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा है वायरल?

punjabkesari.in Saturday, Feb 07, 2026 - 06:53 PM (IST)

नारी डेस्क: खबरों में आप लगातार जेफ़री एपस्टीन का नाम सुन और देख रहे होंगे। डोनाल्ड ट्रंप से लेकर ब्रितानी राजपरिवार के सदस्यों तक, एपस्टीन फ़ाइल्स में कई नाम सामने आए हैं। हाल ही में जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइल्स और दस्तावेज़ सामने आए हैं, जिनमें दुनिया भर की राजनीति और सेलिब्रिटीज़ के नाम जुड़े हैं। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक, एपस्टीन का नाम लगातार सुर्खियों में है। भारत में भी एपस्टीन फ़ाइल्स की चर्चा ने सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ा दिए हैं।यही वजह है कि इस मामले पर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। जेफ़री एपस्टीन की कहानी क्या है?   एपस्टीन फ़ाइल्स से क्या ज़ाहिर होता है? और इनमें किन-किन लोगों के नाम सामने आए हैं? जानिए इस लेख में।

एपस्टीन और नरभक्षण के दावे

कुछ दस्तावेज़ों और सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया कि एपस्टीन बच्चों के साथ अत्याचार करता था और उनकी हानिकारक गतिविधियों में शामिल था। इसके अलावा, कुछ लोग यह भी कहते हैं कि एपस्टीन और उसके सहयोगी बच्चों को काटते और खाते थे। ये दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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"क्रीम चीज़" शब्द को लेकर भ्रम

कुछ नए दस्तावेज़ों में “क्रीम चीज़” शब्द आया है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोग कह रहे हैं कि यह नरभक्षण से जुड़ा है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका मतलब बस सामान्य खाने-पीने की चीज़ या किसी इवेंट की प्लानिंग से है। दस्तावेज़ में कहीं भी ऐसा साफ-साफ संकेत नहीं है कि यह किसी हिंसा या बच्चों के शोषण से जुड़ा है।

यह दावा नया नहीं है

नरभक्षण और बच्चों के बलि देने के आरोप नए नहीं हैं। 2009 में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक मॉडल ने दावा किया कि अमीर लोग बच्चों को अनुष्ठानिक रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। हाल ही में एपस्टीन फाइल्स के खुलने के बाद यही दावा सोशल मीडिया पर दोबारा सामने आया और तेजी से फैल गया।

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 फैक्ट-चेक एजेंसियों की रिपोर्ट

स्नोप्स जैसी स्वतंत्र एजेंसियों ने जांच की है। रिपोर्ट में कहा गया कि फाइल्स में “कैनिबल” और “कैनिबैलिस्म” जैसे शब्द जरूर आए हैं, लेकिन यह किसी भी तरह प्रमाणित नहीं करता कि एपस्टीन ने वास्तव में नरभक्षण किया। ये दावे केवल एफबीआई अधिकारियों और एक अज्ञात व्यक्ति के कथनों पर आधारित हैं।

एपस्टीन की नाव और हिंसा के आरोप

एक व्यक्ति ने एफबीआई को बताया कि उसने एपस्टीन की नाव पर काम करते हुए हिंसा देखी। उसने दावा किया कि वहां बच्चों के शरीर के टुकड़े किए जाते थे, आंतें निकाली जाती थीं और कुछ लोग उन आंतों से मानव मल खाते थे। साथ ही, उसने यह भी कहा कि एपस्टीन और उसके सहयोगियों ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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हालांकि, न्याय विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस व्यक्ति ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं पेश किए। एपस्टीन की मौत हो चुकी है, और जो लोग उस समय उसके साथ थे, उनमें से अधिकांश ने इन आरोपों से दूरी बनाई है या इनकार किया है। अभी तक न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए दस्तावेज़ों में सीधे तौर पर नरभक्षण या बच्चों को खाने जैसी कोई पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर फैल रहे दावे केवल आरोप और कथनों पर आधारित हैं। इसलिए, इन दावों को पूरी तरह सत्य मानना सही नहीं है।  

 


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Content Editor

Priya Yadav

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