लेट Periods से हैं परेशान तो दूध में मिलाकर पिएं ये 2 चीजें, मिल सकती है राहत
punjabkesari.in Friday, Jul 24, 2026 - 01:33 PM (IST)
नारी डेस्क : पीरियड्स महिलाओं की सेहत का एक अहम संकेत माने जाते हैं। आमतौर पर 28 से 35 दिनों के बीच आने वाली पीरियड साइकिल को सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर हर महीने पीरियड्स देर से आते हैं या उनकी तारीख बार-बार बदलती रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसकी वजह हार्मोनल बदलाव, तनाव, खराब खानपान, नींद की कमी, थायरॉयड या पीसीओएस जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन करने के बजाय कुछ पारंपरिक घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं। इन्हीं में से एक है हल्दी और अदरक वाला दूध, जिसे लंबे समय से भारतीय घरों में पीरियड्स को नियमित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।
कैसे मदद कर सकता है हल्दी और अदरक वाला दूध?
विशेषज्ञों के अनुसार, हल्दी और अदरक दोनों की तासीर गर्म मानी जाती है। ये शरीर में रक्त संचार (Blood Circulation) को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, खासकर पेल्विक एरिया में। माना जाता है कि इससे गर्भाशय की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जो पीरियड्स शुरू होने की प्राकृतिक प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकती हैं।
इसके अलावा हल्दी में मौजूद करक्यूमिन (Curcumin) में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।
अदरक सूजन कम करने और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
यह ड्रिंक पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन में भी कुछ राहत पहुंचा सकती है।

कैसे बनाएं हल्दी और अदरक वाला दूध?
इस घरेलू ड्रिंक को तैयार करना बेहद आसान है।
सामग्री
1 गिलास दूध
¼ चम्मच हल्दी
आधा इंच ताजा अदरक (कूटी हुई)
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बनाने का तरीका
दूध को एक पैन में गर्म करें।
इसमें हल्दी और कूटी हुई अदरक डालें।
3–5 मिनट तक अच्छी तरह उबालें।
चाहें तो कच्ची हल्दी का भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
छानकर गुनगुना होने पर पी लें।
इस ड्रिंक का सेवन दिन में एक बार किया जा सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान
घरेलू नुस्खे हर व्यक्ति पर एक जैसा असर नहीं करते। यदि आपके पीरियड्स लगातार कई महीनों से अनियमित हैं, बहुत ज्यादा देरी से आते हैं या इनके साथ अत्यधिक दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग या अन्य असामान्य लक्षण हैं, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि इसके पीछे पीसीओएस (PCOS), थायरॉयड, हार्मोनल असंतुलन, तनाव, अत्यधिक वजन घटना या बढ़ना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

