Periods में खून के मोटे थक्के आने का कारण, इसे लंबा समय इग्नोर ना करें

punjabkesari.in Friday, Jul 10, 2026 - 07:31 PM (IST)

नारी डेस्क: पीरियड्स के दौरान हल्के-फुल्के खून के थक्के (Blood Clots) निकलना कई महिलाओं के लिए सामान्य हो सकता है, खासकर जब ब्लीडिंग ज्यादा हो। लेकिन यदि बार-बार बड़े आकार के थक्के निकलें, अत्यधिक रक्तस्राव हो या इसके साथ तेज दर्द, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह हार्मोनल असंतुलन, गर्भाशय में फाइब्रॉइड, एंडोमेट्रियोसिस या अन्य स्त्री रोग संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है। ऐसे में समय पर जांच और सही इलाज बेहद जरूरी है।

पीरियड्स में खून के मोटे थक्के क्या होते हैं?

पीरियड्स के दौरान शरीर अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए खून को जमाने वाले पदार्थ (Clotting Factors) बनाता है। जब ब्लीडिंग बहुत अधिक होती है, तो ये थक्के बड़े आकार में बाहर निकल सकते हैं। छोटे थक्के आमतौर पर चिंता का विषय नहीं होते, लेकिन बार-बार बड़े थक्के निकलना जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है।

पीरियड्स में मोटे थक्के आने के लक्षण

पीरियड्स के दौरान बार-बार बड़े खून के थक्के निकलना।
बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना।
हर 1–2 घंटे में पैड या टैम्पोन बदलने की जरूरत पड़ना।
पेट या कमर में तेज दर्द।
कमजोरी, थकान और चक्कर आना।
सांस फूलना (यदि खून की कमी हो जाए)।
पीरियड्स का 7 दिनों से अधिक समय तक चलना।

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पीरियड्स में खून के मोटे थक्के आने के कारण

1. हार्मोनल असंतुलन: एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का संतुलन बिगड़ने पर गर्भाशय की अंदरूनी परत (Endometrium) ज्यादा मोटी हो सकती है, जिससे भारी ब्लीडिंग और बड़े थक्के निकल सकते हैं।

2. गर्भाशय में फाइब्रॉइड (Fibroids): फाइब्रॉइड गर्भाशय में बनने वाली गैर-कैंसरयुक्त गांठें होती हैं, जो अधिक रक्तस्राव और बड़े ब्लड क्लॉट्स का कारण बन सकती हैं।

3. एडेनोमायोसिस (Adenomyosis): इस स्थिति में गर्भाशय की अंदरूनी परत की कोशिकाएं उसकी मांसपेशियों में बढ़ने लगती हैं, जिससे दर्द और अत्यधिक ब्लीडिंग हो सकती है।

4. एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis): यह बीमारी पीरियड्स के दौरान तेज दर्द, भारी ब्लीडिंग और बड़े थक्कों का कारण बन सकती है।

5. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS): पीसीओएस में हार्मोनल गड़बड़ी के कारण पीरियड्स अनियमित और कभी-कभी बहुत भारी हो सकते हैं।

6. गर्भपात (Miscarriage): यदि गर्भावस्था की शुरुआत में भारी ब्लीडिंग के साथ बड़े थक्के निकलें, तो यह गर्भपात का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

7. ब्लीडिंग डिसऑर्डर: कुछ महिलाओं में खून जमने से जुड़ी समस्याओं के कारण भी अत्यधिक ब्लीडिंग और थक्के बन सकते हैं।

किन महिलाओं को ज्यादा खतरा होता है?

35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं।
फाइब्रॉइड या एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाएं।
PCOS या हार्मोनल असंतुलन वाली महिलाएं।
थायरॉयड की समस्या से पीड़ित महिलाएं।
मोटापे से ग्रस्त महिलाएं।
परिवार में फाइब्रॉइड या ब्लीडिंग डिसऑर्डर का इतिहास होना।

इसका इलाज क्या है?

इलाज पूरी तरह कारण पर निर्भर करता है।
हार्मोनल असंतुलन होने पर डॉक्टर हार्मोनल दवाएं या गर्भनिरोधक गोलियां लिख सकते हैं।
आयरन की कमी होने पर आयरन सप्लीमेंट दिए जा सकते हैं।
फाइब्रॉइड या एडेनोमायोसिस जैसी समस्याओं में दवा या जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।
यदि अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बचाव के उपाय

संतुलित और आयरन युक्त आहार लें।
नियमित व्यायाम करें।
वजन को नियंत्रित रखें।
पीरियड्स में होने वाले बदलावों का रिकॉर्ड रखें।
अत्यधिक ब्लीडिंग या बड़े थक्के आने पर जांच करवाने में देरी न करें।
डॉक्टर की सलाह के बिना हार्मोनल दवाएं न लें।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

इन स्थितियों में तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से संपर्क करें:
गोल्फ बॉल के आकार या उससे बड़े थक्के निकलें।
हर 1 घंटे से कम समय में पैड पूरी तरह भीग जाए।
पीरियड्स 7 दिनों से अधिक चलें।
अत्यधिक कमजोरी, चक्कर या बेहोशी महसूस हो।
गर्भावस्था की संभावना के साथ भारी ब्लीडिंग हो।
तेज दर्द के साथ बुखार या दुर्गंधयुक्त डिस्चार्ज आए।

पीरियड्स के दौरान छोटे खून के थक्के सामान्य हो सकते हैं, लेकिन यदि बार-बार बड़े थक्के निकलें, अत्यधिक ब्लीडिंग हो या इसके साथ तेज दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही इलाज से अधिकांश कारणों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यदि पीरियड्स के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग, बड़े ब्लड क्लॉट्स या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।


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Content Writer

Vandana

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