गर्दन पर काली लाइन सिर्फ गंदगी नहीं, हो सकती है गंभीर और जानलेवा बीमारियों का संकेत
punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 11:37 AM (IST)
नारी डेस्क : अक्सर लोग गर्दन या बगल के काले पड़ने को मामूली गंदगी, पसीना या साफ-सफाई की कमी मान लेते हैं। कई बार लोग इसे हटाने के लिए ज़्यादा रगड़ते हैं, स्क्रब करते हैं या तरह-तरह के घरेलू नुस्खे अपनाते हैं। लेकिन अगर नहाने और साफ रखने के बावजूद भी गर्दन या बगल का कालापन बना रहता है, तो यह सिर्फ त्वचा की समस्या नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स (Acanthosis Nigricans) कहा जाता है।
क्या है एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स?
एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स कोई संक्रामक या सीधे तौर पर जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन यह शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल सिस्टम में गड़बड़ी का संकेत देती है। इसमें त्वचा गहरी, मोटी और मखमली हो जाती है, जो आमतौर पर इन जगहों पर दिखाई देती है। गर्दन के पीछे, बगल, जांघों के बीच, कोहनी और घुटनों के आसपास। यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और अक्सर लोग इसे लंबे समय तक नजरअंदाज करते रहते हैं।

डार्क नेक गंदगी नहीं, इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है
काली गर्दन का सबसे बड़ा कारण होता है इंसुलिन रेजिस्टेंस। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पातीं, तो शरीर जरूरत से ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है। यह बढ़ा हुआ इंसुलिन त्वचा की कोशिकाओं और पिगमेंट बनाने वाली कोशिकाओं को अत्यधिक सक्रिय कर देता है। नतीजा यह होता है कि त्वचा मोटी होने लगती है और उसका रंग काला पड़ जाता है। यही वजह है कि सिर्फ साबुन या स्क्रब से यह कालापन साफ नहीं होता।
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काली गर्दन किन बीमारियों की चेतावनी देती है?
गर्दन या बगल का काला पड़ना सिर्फ सुंदरता से जुड़ी समस्या नहीं है। यह कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है।
जैसे, प्री-डायबिटीज
टाइप 2 डायबिटीज
पीसीओएस (PCOS) खासतौर पर महिलाओं में
फैटी लिवर
मेटाबॉलिक सिंड्रोम
मोटापा और हार्मोनल असंतुलन
कई मामलों में यह लक्षण तब दिखाई देता है, जब बीमारी अभी शुरुआती स्टेज में होती है और समय रहते इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

क्या रोज न नहाने से भी गर्दन काली हो सकती है?
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक साफ-सफाई नहीं रखता या रोज नहीं नहाता, तो हल्का कालापन दिख सकता है। लेकिन अगर नियमित नहाने, साफ रखने और मॉइश्चराइज करने के बावजूद भी गर्दन या बगल का रंग काला बना रहता है, तो इसे गंदगी समझना बड़ी गलती हो सकती है।
क्यों रगड़ने या घरेलू नुस्खों से ठीक नहीं होती समस्या?
अगर गर्दन का कालापन अंदरूनी बीमारी की वजह से है।
तो ज्यादा रगड़ने से
पत्थर या हार्ड स्क्रब से
बिना डॉक्टर की सलाह के क्रीम लगाने से
त्वचा और ज्यादा खराब हो सकती है।
असल इलाज त्वचा पर नहीं, बल्कि बीमारी की जड़ पर होता है।
डार्क नेक से छुटकारा पाने के लिए क्या करें?
लाइफस्टाइल में बदलाव सबसे जरूरी
शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम करें
प्रोटीन और हेल्दी फैट का सेवन बढ़ाएं
वजन धीरे-धीरे कम करें
रोज कम से कम 30 मिनट वॉक करें
हफ्ते में 2–3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें
पूरी और गहरी नींद लें।

त्वचा की सही देखभाल करें
ज्यादा रगड़ने से बचें
माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें
बिना सलाह के स्किन क्रीम न लगाएं।
इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच कैसे करें?
अगर गर्दन या बगल का कालापन बढ़ रहा है या बार-बार लौट आता है, तो ये जांचें कराना फायदेमंद हो सकता है।
फास्टिंग ब्लड शुगर (Fasting Blood Sugar)
एचबीए1सी (HbA1c)
उपवास के दौरान इंसुलिन (Fasting Insulin)
होमियोस्टैटिक मॉडल असेसमेंट ऑफ इंसुलिन रेजिस्टेंस (HOMA-IR)
लिपिड प्रोफाइल (Lipid Profile)
ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT) (Oral Glucose Tolerance Test)
इन टेस्ट्स से डायबिटीज और मेटाबॉलिक समस्याओं को समय रहते पकड़ा जा सकता है।
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गर्दन का कालापन शर्म की बात नहीं, बल्कि शरीर का चेतावनी संकेत है। इसे नजरअंदाज करने की बजाय समय रहते कारण पहचानना और लाइफस्टाइल सुधारना बेहद जरूरी है।

